बालोद। ग्राम देऊरतराई के शासकीय भूमि पर वर्षों से खेती कर रहे भूमिहीन कृषि मजदूर लिलेश्वर चंद्राकर को कब्जा हटाने के तहसीलदार न्यायालय के आदेश के बाद मामला चर्चा में आ गया है। लिलेश्वर का कहना है कि वह करीब 20-21 वर्षों से उक्त भूमि को कृषि योग्य बनाकर खेती कर रहे हैं और गांव के अनेक लोगों ने भी इस संबंध में अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया है। इसके बावजूद उनके खिलाफ ही कार्रवाई का आदेश जारी किया जाना उन्हें दुर्भावनापूर्ण और अन्यायपूर्ण लग रहा है।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, ग्राम देऊरतराई, प.ह.नं. 21, तहसील बालोद स्थित शासकीय भूमि खसरा नंबर 2/1 पर अतिक्रमण का मामला तहसीलदार न्यायालय में पहुंचा था। न्यायालय द्वारा 26 दिसंबर 2025 को पारित आदेश के आधार पर लिलेश्वर चंद्राकर द्वारा करीब 0.595 हेक्टेयर (लगभग 1.47 एकड़) भूमि पर धान की फसल लगाकर किए गए अतिक्रमण से कब्जा हटाने का आदेश जारी किया गया है। इसके पालन के लिए संबंधित अधिकारी को कार्रवाई कर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
20 वर्षों से कर रहे खेती का दावा
लिलेश्वर चंद्राकर का कहना है कि वह भूमिहीन कृषि मजदूर हैं और करीब दो दशक से उक्त जमीन पर मेहनत कर खेती करते आ रहे हैं। उन्होंने जमीन को अपने श्रम से कृषि योग्य बनाया और लगातार खेती की है। वर्तमान में भी उक्त भूमि पर फसल होने की बात उन्होंने कही है।
इस मामले में ग्राम देऊरतराई के ग्रामीणों द्वारा जारी किए गए अनापत्ति प्रमाण पत्र में भी कहा गया है कि लिलेश्वर चंद्राकर करीब 20-21 वर्षों से नदी के कछार से लगी उक्त भूमि पर खेती कर रहे हैं। प्रमाण पत्र में ग्रामीणों ने यह भी उल्लेख किया है कि उक्त जमीन गांव के मुक्तिधाम से करीब एक किलोमीटर दूर है और वहां खेती किए जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
'दूसरे लोग भी सरकारी जमीन पर कर रहे खेती, कार्रवाई सिर्फ मेरे खिलाफ क्यों?'
लिलेश्वर चंद्राकर का आरोप है कि ग्राम में अन्य कई लोग भी शासकीय भूमि पर इसी तरह खेती कर रहे हैं। उन्होंने पूर्व में ऐसे लोगों के खिलाफ शिकायत भी की थी, लेकिन उनके अनुसार अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है तो सभी अतिक्रमणकारियों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।
लिलेश्वर ने कहा कि उनके मामले में ही अलग से कार्रवाई किए जाने से उन्हें दुर्भावना की आशंका है। उनका कहना है कि वे प्रशासन के आदेश और कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन कार्रवाई में समानता और निष्पक्षता होनी चाहिए।
मुक्तिधाम बनाने की मंशा पर भी उठाए सवाल
लिलेश्वर का यह भी कहना है कि गांव में मुक्तिधाम पहले से बना हुआ है। जिस स्थान पर वे वर्तमान में खेती कर रहे हैं, वह बस्ती से काफी दूर है। उनका आरोप है कि कुछ लोग उनकी खेती वाली जमीन को कब्जामुक्त कराकर वहां नया मुक्तिधाम बनाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए और यह भी देखा जाना चाहिए कि वास्तव में उक्त भूमि का उपयोग किस उद्देश्य के लिए प्रस्तावित है।
समान कार्रवाई की मांग
लिलेश्वर चंद्राकर ने प्रशासन से मांग की है कि ग्राम देऊरतराई की शासकीय भूमि खसरा नंबर 2/1 पर यदि अन्य लोगों द्वारा भी अतिक्रमण कर खेती की जा रही है तो उसकी भी जांच कर समान रूप से कार्रवाई की जाए। उन्होंने ग्रामीणों द्वारा दिए गए अनापत्ति प्रमाण पत्र, अपने लंबे समय से खेती करने और अन्य अतिक्रमण संबंधी पूर्व शिकायतों को भी मामले की जांच में शामिल करने की मांग की है।
फिलहाल मामला प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई के दौर में है। लिलेश्वर का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी सरकारी व्यवस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि अपने मामले में निष्पक्षता और समानता की मांग रखना है। दूसरी ओर, शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के संबंध में अंतिम स्थिति संबंधित राजस्व अभिलेखों एवं सक्षम न्यायालय/प्रशासनिक आदेशों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

