8 दिन तक चला तलाश अभियान; स्कूटी से मिला पत्र और मोबाइल बना था जांच का अहम बिंदु, पत्नी की शिकायत पर दर्ज था अपहरण का मामला
बालोद। जिला जेल में पदस्थ जेल प्रहरी महेंद्र कुमार वर्मा (42) के 13 अगस्त से लापता होने के मामले में आखिरकार राहत की खबर सामने आई है। करीब 8 दिन बाद महेंद्र वर्मा शुक्रवार को सुरक्षित अपने शिकारीपारा स्थित घर लौट आए। उनके घर पहुंचने की सूचना मिलते ही बालोद पुलिस मौके पर पहुंची और उनसे घटनाक्रम के संबंध में पूछताछ की।
पुलिस के अनुसार महेंद्र वर्मा ने प्रारंभिक पूछताछ में बताया कि वह ट्रेन और बस के माध्यम से अलग-अलग स्थानों पर गए थे। इस दौरान वे उज्जैन भी पहुंचे और महाकाल के दर्शन किए। हालांकि पुलिस ने उनकी वर्तमान मानसिक स्थिति को देखते हुए मामले से संबंधित विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने से फिलहाल परहेज किया है।
ड्यूटी के लिए निकले थे घर से
बालोद थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार महेंद्र वर्मा 13 अगस्त की सुबह करीब 5:45 बजे शिकारीपारा स्थित अपने घर से स्कूटी से जिला जेल में ड्यूटी के लिए निकले थे। सामान्य तौर पर ड्यूटी समाप्त होने के बाद वे रात करीब 10:30 बजे तक घर लौट आते थे, लेकिन उस दिन वे वापस नहीं पहुंचे।
काफी देर तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने रिश्तेदारों और संभावित ठिकानों पर उनकी तलाश शुरू की। कई स्थानों पर खोजबीन के बावजूद उनका पता नहीं चल सका। इसके बाद उनकी पत्नी किरण वर्मा की शिकायत पर बालोद थाने में मामला दर्ज कराया गया और पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की।
जेल गेट के बाहर मिली थी स्कूटी
जांच के दौरान महेंद्र वर्मा की स्कूटी जिला जेल के गेट के बाहर मिली थी। स्कूटी की डिक्की से उनका मोबाइल फोन और एक पत्र बरामद हुआ था। पत्र में उच्च अधिकारियों पर मानसिक प्रताड़ना एवं दबाव के आरोप लगाए जाने की बात सामने आई थी। पत्र में स्वयं को तलाश नहीं करने की बात भी लिखे होने की जानकारी सामने आई थी।
इन परिस्थितियों के कारण पुलिस और परिजनों के सामने मामला और गंभीर हो गया था। पुलिस ने संभावित अनहोनी समेत विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तलाश तेज कर दी थी।
विचाराधीन बंदी को मोबाइल देने का मामला भी आया था सामने
महेंद्र वर्मा के लापता होने से एक दिन पहले 12 अगस्त को जिला जेल में एक विचाराधीन बंदी की तलाशी के दौरान उसके पास से मोबाइल फोन बरामद होने की बात सामने आई थी। सहायक जेल अधीक्षक एस.के. कुर्रे के अनुसार पूछताछ में बंदी ने कथित तौर पर बताया था कि मोबाइल उसे जेल प्रहरी महेंद्र वर्मा ने दिया था।
जेल प्रशासन के अनुसार इस घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज में भी मामले की पुष्टि होने की बात कही गई थी। इसके अगले दिन महेंद्र वर्मा की स्कूटी जेल परिसर के बाहर मिली और वे लापता हो गए। जेल प्रशासन ने इसकी सूचना कलेक्टर, एसपी एवं थाना प्रभारी को दी थी।
पत्नी की शिकायत पर दर्ज हुआ था अपहरण का मामला
महेंद्र वर्मा की पत्नी किरण वर्मा की शिकायत के आधार पर बालोद पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 140(3) के तहत अपहरण का अपराध दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस की विभिन्न टीमें बालोद सहित आसपास के जिलों में उनकी तलाश कर रही थीं।
सुरक्षित लौटने से परिजनों ने ली राहत की सांस
शुक्रवार को दोपहर करीब 3 से 4 बजे के बीच महेंद्र वर्मा के अचानक सुरक्षित घर लौटने से परिजनों और पुलिस ने राहत की सांस ली। पुलिस ने घर पहुंचकर उनसे बातचीत की और उनके अलग-अलग स्थानों पर जाने के संबंध में जानकारी जुटाई।
फिलहाल पुलिस उनके बयान, लापता होने के दौरान की गतिविधियों, उज्जैन जाने सहित पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। स्कूटी, मोबाइल, पत्र, जेल में मोबाइल पहुंचने की घटना और महेंद्र वर्मा के 8 दिन बाद सुरक्षित लौटने—इन सभी पहलुओं को जोड़कर जांच की जा रही है।
महेंद्र वर्मा के सुरक्षित मिलने के बाद अब मामले में एक नया मोड़ आ गया है। पहले जहां पुलिस अपहरण समेत संभावित अनहोनी के पहलुओं पर जांच कर रही थी, वहीं अब उनके स्वयं अलग-अलग स्थानों पर जाने की जानकारी सामने आने से उनके लापता होने की वास्तविक वजह और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियां पुलिस की जांच के केंद्र में हैं।

