मारपीट मामले में आरोपी को राहत नहीं, तीन साल की सजा बरकरार

Darshan Balod
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अपीलीय न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को माना उचित; ₹4 हजार का अर्थदंड भी यथावत

बालोद, 25 अगस्त 2026। प्रधान सत्र न्यायाधीश बालोद एस.एल. नवरत्न की अदालत ने मारपीट के एक मामले में आरोपी द्वारा प्रस्तुत अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को यथावत रखने का आदेश पारित किया है। यह निर्णय 24 अगस्त 2026 को सुनाया गया।

मामले में आरोपी अमर सिंह ढीमर, पिता सहदेव ढीमर, उम्र 32 वर्ष, निवासी भाठागांव (आर), थाना रनचिरई, जिला बालोद को भारतीय दंड संहिता की धारा 294 के तहत ₹1,000 अर्थदंड तथा धारा 325 के तहत 3 वर्ष के कठोर कारावास और ₹3,000 अर्थदंड की सजा सुनाई गई थी। अपीलीय न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को उचित मानते हुए सजा बरकरार रखी।

घर के सामने हंगामा करने से रोकने पर हुआ विवाद

अभियोजन के अनुसार, घटना 26 अक्टूबर 2022 की रात की है। प्रार्थिया ने अगले दिन 27 अक्टूबर 2022 को थाना रनचिरई में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, भाठागांव-जोरातराई रोड पर उसके घर के सामने कुछ लोग बैठकर हल्ला-गुल्ला कर रहे थे।

प्रार्थिया ने घर से बाहर आकर उन्हें हल्ला न करने के लिए कहा। इसी दौरान आरोपी अमर सिंह ढीमर ने विवाद करते हुए अश्लील गालियां दीं और जान से मारने की धमकी देने के बाद डंडे से मारपीट की।

मारपीट में प्रार्थिया के दाहिने पैर, दोनों हाथ, पीठ और कंधे में चोटें आईं। चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान एक्स-रे कराने की सलाह दी गई। एक्स-रे रिपोर्ट में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई।

साक्ष्यों के आधार पर हुई थी दोषसिद्धि

घटना की रिपोर्ट के बाद थाना रनचिरई में अपराध दर्ज कर पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू की। प्रार्थिया का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया तथा उसके और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। विवेचना के दौरान आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने पर उसे गिरफ्तार किया गया और बाद में जमानत पर रिहा किया गया।

विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।

निचली अदालत के फैसले के खिलाफ की थी अपील

मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, गुण्डरदेही, जिला बालोद के न्यायालय में हुई। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर 18 जून 2026 को आरोपी को धारा 294 के तहत दोषसिद्ध करते हुए ₹1,000 अर्थदंड तथा धारा 325 के तहत 3 वर्ष का कठोर कारावास और ₹3,000 अर्थदंड से दंडित किया था।

इस आदेश के खिलाफ आरोपी ने प्रधान सत्र न्यायाधीश बालोद के न्यायालय में अपील प्रस्तुत की थी। अपीलीय न्यायालय ने प्रकरण में उपलब्ध साक्ष्यों और निचली अदालत के निर्णय का परीक्षण करने के बाद निचली अदालत के आदेश को उचित पाया और आरोपी को दी गई सजा को यथावत रखने का आदेश पारित किया।

प्रकरण में अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक तोमन लाल साहू ने पैरवी की।

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