27 वर्षों की शिक्षकीय यात्रा में सीमित संसाधनों को नहीं बनने दिया बाधा, खेल से लेकर शिक्षा और व्यक्तित्व विकास तक बच्चों को दे रहे नई उड़ान
गुरुर। शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सपनों को दिशा देने वाला सच्चा मार्गदर्शक होता है। इस भावना को अपने 27 वर्षों की शिक्षकीय सेवा में चरितार्थ कर रहे हैं बालाराम निषाद, प्रधान पाठक, शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय डढारी, संकुल केंद्र खुंदनी, विकासखंड गुरुर, जिला बालोद।
आर्थिक और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपने कदम पीछे नहीं खींचे और निरंतर बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित रहे।
महज 500 रुपये मासिक मानदेय से शुरू की शिक्षकीय यात्रा
बालाराम निषाद ने अपने शिक्षकीय जीवन की शुरुआत एक वैकल्पिक शिक्षक के रूप में महज 500 रुपये मासिक मानदेय से की थी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और शिक्षा की ज्योति जलाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ते रहे।
आज वे शैक्षिक गतिविधियों के साथ साहित्यिक, सांस्कृतिक, खेलकूद, योग, व्यायाम, मार्च पास्ट, स्काउट-गाइड, ईको क्लब, रेडक्रॉस एवं बाल कैबिनेट जैसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
खेल के मैदान में बच्चों ने बढ़ाया विद्यालय का मान
उनके मार्गदर्शन में विद्यालय के विद्यार्थियों ने पढ़ाई के साथ खेलकूद के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। खो-खो, कबड्डी, एथलेटिक्स और योग जैसी विधाओं में लगभग 200 बच्चों ने राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिताओं में सहभागिता की है, जबकि 25 बच्चों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।
10 बच्चों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर किया छत्तीसगढ़ और भारत का प्रतिनिधित्व
विद्यालय के 10 बच्चों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में छत्तीसगढ़ एवं भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पदक हासिल किए हैं। वर्तमान में विद्यालय के एक विद्यार्थी का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए हुआ है, जो अक्टूबर माह में कर्नाटक में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेगा।
जरूरतमंद बच्चों के लिए हरसंभव सहयोग
बालाराम निषाद का सेवा भाव विद्यालय तक सीमित नहीं है। वे जरूरतमंद विद्यार्थियों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार कापी, पेन, मोजा, जूता, टाई, बेल्ट और आईकार्ड जैसी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के साथ खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए भी सहयोग करते हैं।
संस्कृति, पर्यावरण और समाजसेवा से जोड़ रहे नई पीढ़ी को
सांस्कृतिक गतिविधियों, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से वे विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित कर रहे हैं। शिक्षा के साथ बच्चों के भीतर अनुशासन, आत्मविश्वास और सामाजिक सरोकारों को विकसित करने का उनका प्रयास लगातार जारी है।
समर्पण से बदली सीमित संसाधनों की कहानी
शिक्षक दिवस के अवसर पर बालाराम निषाद की 27 वर्षों की शिक्षकीय यात्रा यह संदेश देती है कि सच्चा शिक्षक संसाधनों का इंतजार नहीं करता, बल्कि अपने समर्पण, मेहनत और मार्गदर्शन से सीमित अवसरों को भी बच्चों के लिए बड़ी संभावनाओं में बदल देता है।
