एकलव्य छात्र की मौत ने उठाए सुरक्षा पर सवाल, मुख्यमंत्री ने दिए हॉस्टल और स्कूलों के सेफ्टी ऑडिट के निर्देश

Darshan Balod
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डौंडी में 10वीं के छात्र की मौत के कुछ घंटों बाद सामने आया शासन का सुरक्षा निर्देश, जोखिमपूर्ण भवनों की जांच में लापरवाही पर तय होगी जवाबदेही

बालोद। डौंडी के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के हॉस्टल में 10वीं कक्षा के छात्र विनय कुमार की मौत की घटना ने जिले में चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच गुरुवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के सभी जिलों में हॉस्टल, पीजी, कोचिंग सेंटर, स्कूल और बड़े शैक्षणिक भवनों का तत्काल निरीक्षण एवं सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों और नागरिकों की सुरक्षा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। संभावित जोखिमों की पहले पहचान कर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।

मुख्यमंत्री ने रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के संभागायुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और वरिष्ठ अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में बालोद कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा सहित संबंधित अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से शामिल हुए।

डौंडी के एकलव्य हॉस्टल में छात्र की मौत

इसी दिन डौंडी के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के हॉस्टल में कमरा नंबर 16 में 10वीं कक्षा के छात्र विनय कुमार की मौत की घटना सामने आई। बताया गया कि सुबह हॉस्टल के विद्यार्थी रोजाना की तरह पीटी के लिए मैदान में गए थे, जबकि विनय कमरे में ही रुक गया था। पीटी समाप्त होने के बाद साथी विद्यार्थी कमरे में पहुंचे, तब घटना की जानकारी हुई।

स्कूल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। डौंडी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने परिजनों को सूचना देने के साथ मर्ग कायम कर जांच आगे बढ़ाई है। छात्र की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या रहा, यह फिलहाल जांच का विषय है।

मुख्यमंत्री बोले—सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय संभावित जोखिमों की पहले पहचान की जानी चाहिए। उन्होंने सभी जिलों में हॉस्टल, पीजी, कोचिंग सेंटर, स्कूल और बड़े शैक्षणिक भवनों का तत्काल निरीक्षण एवं सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान यदि किसी भवन में सुरक्षा संबंधी कमी पाई जाती है तो उसे दूर करने के लिए समय-सीमा निर्धारित करने और कार्रवाई की नियमित मॉनिटरिंग करने को कहा गया है। पुराने और जर्जर स्कूल भवनों, छात्रावासों, पुस्तकालयों तथा अन्य सार्वजनिक भवनों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर ऐसे भवनों की पहचान करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिनसे जनहानि की आशंका हो।

डौंडी की घटना के बाद निर्देश का स्थानीय महत्व

मुख्यमंत्री का यह निर्देश ऐसे समय आया है जब डौंडी के आवासीय विद्यालय में छात्र की मौत की घटना ने हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा, निगरानी और उनकी समस्याओं की समय रहते पहचान जैसे मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। हालांकि मुख्यमंत्री की बैठक में डौंडी के इस विशेष मामले का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन हॉस्टल और शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा को लेकर जारी निर्देश घटना के संदर्भ में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को अपने-अपने जिलों में सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा करने तथा शासन के निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन के निर्देशों के पालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

अब बालोद जिले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद एकलव्य सहित अन्य आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था, भवनों की स्थिति तथा विद्यार्थियों की निगरानी व्यवस्था की किस स्तर पर समीक्षा की जाती है।

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