बालोद । छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपरा एवं संस्कृति से विद्यार्थियों को जोड़ने के उद्देश्य से शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला गोडेला, जिला बालोद में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी पारंपरिक पोला पर्व हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन शिक्षिका प्रतिभा त्रिपाठी के मार्गदर्शन एवं विद्यार्थियों के सहयोग से किया गया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता का परिचय देते हुए मिट्टी से नंदीबैल, जाता, चूल्हा सहित विभिन्न पारंपरिक खिलौनों का निर्माण किया। बच्चों द्वारा स्वयं तैयार किए गए इन खिलौनों की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों ने पोला पर्व की परंपरा को करीब से समझते हुए उसे जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
संस्था प्रमुख रमेश कुमार हिरवानी ने विद्यार्थियों को पोला पर्व की परंपरा, महत्व एवं छत्तीसगढ़ी लोकजीवन में इसकी भूमिका की जानकारी दी। वहीं शोभाराम देवांगन ने बताया कि पोला पर्व मुख्य रूप से किसानों और कृषि संस्कृति से जुड़ा पारंपरिक पर्व है। यह पर्व कृषि कार्यों में पशुधन, विशेषकर बैलों के महत्व को दर्शाता है और किसानों एवं पशुधन के बीच आत्मीय संबंध तथा कृषि संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करता है।
कार्यक्रम में शिक्षिका प्रतिभा त्रिपाठी ने कहा कि विद्यालय में पारंपरिक पर्वों एवं लोकसंस्कृति को गतिविधियों के माध्यम से बच्चों तक पहुंचाने का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी माटी, संस्कृति, परंपरा और लोकजीवन से जोड़े रखना है। बच्चों द्वारा स्वयं मिट्टी के पारंपरिक खिलौने बनाकर उनकी पूजा करना इसी दिशा में एक सार्थक पहल है।
विद्यालय के शिक्षकों ने भी आयोजन में सक्रिय सहभागिता निभाई। शिक्षकों के मार्गदर्शन एवं सहयोग से विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस आयोजन के माध्यम से विद्यालय में शिक्षा के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली और पर्व-परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश भी दिया गया।
