शिक्षक समाज का पथ प्रदर्शक, नैतिक मूल्यों का निर्माण शिक्षक ही कर सकता है : वक्ता

Darshan Balod
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ब्रह्मकुमारीज बहनों ने शिक्षक दिवस पर किया शिक्षकों का सम्मान, सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं हुए शामिल

गुरूर। प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय प्रभु उपहार भवन गुरूर के तत्वावधान में शिक्षक दिवस के अवसर पर विशाल शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गुरूर विकासखंड के सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान ब्रह्मकुमारी बहनों द्वारा शिक्षकों को स्मृति चिह्न एवं अभिनंदन पत्र भेंटकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सी.एस. चौबे, सेवानिवृत्त प्राचार्य पीजी कॉलेज धमतरी, डी.के. राठौर, सेवानिवृत्त प्राचार्य शासकीय महाविद्यालय बासीन, के.एल. रावटे, प्राचार्य शासकीय नवीन कॉलेज गुरूर, टी. गौतम, प्राचार्य हायर सेकंडरी स्कूल गुरूर तथा देवेन्द्र हरमुख, प्रांतीय उपाध्यक्ष छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन उपस्थित रहे। ब्रह्मकुमारी धमतरी संचालिका बी.के. सरिता दीदी, गुरूर सेवा केंद्र संचालिका बी.के. सरस दीदी एवं बी.के. परमेश्वरी दीदी भी मौजूद रहीं।

दीप प्रज्ज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इसके बाद बच्चों ने स्वागत गीत एवं शिक्षकों के सम्मान में मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। काव्या और गुंजन ने गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति दी। वहीं कु. वैष्णवी भारद्वाज ने भी गीत प्रस्तुत किया।

शिक्षक केवल ज्ञान नहीं, जीवन की दिशा भी देते हैं : बी.के. सरिता

बी.के. सरिता दीदी ने कहा कि शिक्षक दिवस उन महान आत्माओं के सम्मान का दिन है, जो केवल पढ़ाते ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने के साथ उनके चरित्र का निर्माण करते हैं। भारतीय परंपरा में गुरु और शिक्षक का स्थान अत्यंत ऊंचा माना गया है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक ज्ञान देने के साथ यह भी सिखाता है कि उस ज्ञान को जीवन में कैसे उतारा जाए। आध्यात्मिक दृष्टि से उन्होंने कहा कि परमात्मा आत्मिक ज्ञान देकर यह समझाते हैं कि व्यक्ति केवल शरीर नहीं, बल्कि शांत, पवित्र एवं शक्तिशाली आत्मा है। यह समझ जीवन में आने पर विचार, व्यवहार और संस्कारों में सकारात्मक परिवर्तन आता है।

संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक सोच जरूरी : सी.एस. चौबे

सेवानिवृत्त प्राचार्य सी.एस. चौबे ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि मूल संस्कार, अनुशासन, धैर्य और सकारात्मक सोच के माध्यम से ही जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है।

के.एल. रावटे, प्राचार्य शासकीय नवीन कॉलेज गुरूर ने कहा कि सच्चा शिक्षक केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन में सही दिशा प्रदान करता है।

गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत रखने की जरूरत : डी.के. राठौर

सेवानिवृत्त प्राचार्य डी.के. राठौर ने गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परंपरा सनातन काल से चली आ रही है। उन्होंने द्रोणाचार्य-अर्जुन और विश्वामित्र-राम के उदाहरण देते हुए कहा कि गुरु ने अपने शिष्यों को शिक्षा के साथ जीवन की दिशा भी दी। उन्होंने चिंता जताई कि आधुनिक समय में यह परंपरा धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है।

वेदों और शास्त्रों की ओर लौटने की जरूरत : देवेन्द्र हरमुख

छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रांतीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र हरमुख ने ब्रह्मकुमारी बहनों द्वारा प्रतिवर्ष शिक्षकों के सम्मान के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज में विभिन्न दिवस उत्साह के साथ मनाए जाते हैं, लेकिन शिक्षकों के सम्मान का अवसर भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि भारत के वेदों और पुराणों में हजारों वर्ष पहले ज्ञान की बातें लिखी गई हैं, जिन पर आज भी शोध किए जा रहे हैं। उन्होंने युवाओं से भारतीय वेदों, शास्त्रों और पुराणों के ज्ञान से जुड़ने का आह्वान किया।

शिक्षकों को कराया गया नशामुक्ति का संकल्प

गुरूर सेवा केंद्र की संचालिका बी.के. सरस दीदी ने उपस्थित शिक्षक-शिक्षिकाओं को नशामुक्ति अभियान की जानकारी दी तथा नशे से दूर रहने की शपथ भी दिलाई। इसके बाद सभी उपस्थित शिक्षकों को ब्रह्मकुमारी बहनों द्वारा स्मृति चिह्न एवं अभिनंदन पत्र भेंटकर सम्मानित किया गया।

सोशल मीडिया नैतिक शिक्षा का विकल्प नहीं : खिलानंद साहू

कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन करते हुए खिलानंद साहू, जिला सचिव सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन ने कहा कि आज विद्यार्थियों के पास मोबाइल, इंटरनेट और एआई जैसे सीखने के अनेक साधन उपलब्ध हैं। इसके बावजूद नैतिक शिक्षा, मूल्य, धैर्य, समर्पण एवं अनुशासन की जरूरत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इन मूल्यों का निर्माण केवल तकनीकी साधनों से नहीं, बल्कि शिक्षक के मार्गदर्शन से ही प्रभावी रूप से हो सकता है।

कार्यक्रम का संचालन वर्षा बहन ने किया। आयोजन में ब्रह्मकुमारी सेवा केंद्र से जुड़े भाई-बहनों ने भी सक्रिय सहयोग दिया। बी.के. परमेश्वरी दीदी, सत्या बहन, सुषमा बहन, विनीता, सत्यभामा, चंद्रिका, तुलसी साहू, शांता माता, अमीरचंद भाई, सेवक भाई, नंदकुमार भाई, षष्ठकृत भाई, घनश्याम भाई, यशवंत भाई, बी.पी. यादव, लखन लाल साहू, पुरन भाई, छोटी काव्या बेबी, भुनेश्वरी माता, बेबी ओझा, पिंकी चंद्राकर सहित अन्य भाई-बहनों का विशेष योगदान रहा।

कार्यक्रम में प्रहलाद कोसमार्य, ब्लॉक अध्यक्ष डौंडी, छबिलाल साहू, ब्लॉक अध्यक्ष गुंडरदेही, उमेश साहू, ब्लॉक अध्यक्ष गुरूर, मोहन सिन्हा, मदन लाल साहू, धनेश यादव, पल्लवी साहू, सविता साहू, दिनेश्वरी साहू, शैलेन्द्र ठाकुर, हेमंत देशमुख, मिथुन साहू, डामन पटेल, नकुल एलेन्द्र, अरविंद गंजीर, दिलीप सिन्हा, किशन लाल साहू, छत्रपाल साहू, विमला रानी गंगबेर, वंदना साहू सहित सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

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