चिटौद (गुरुर), बालोद। चित्रोत्पला महानदी स्थित मां अंगारमोती के सानिध्य और गंगरेल बांध की बरसाती लहरों की ठंडी फिजाओं के बीच चिटौद गांव में सुबह का दृश्य उस समय खास बन गया, जब इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ की कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा ने बच्चों के बीच सितार पर अहीर भैरव राग की प्रस्तुति दी। सितार की मधुर झंकार के साथ वातावरण में संगीत की ऐसी लहर बिखरी कि नन्हे विद्यार्थी भी सुरों में खो गए।
डॉ. लवली शर्मा ने अहीर भैरव की विशेषता बताते हुए कहा, “अहीर भैरव सुबह का राग है। इसमें कोमल रे और कोमल ध करुणा और शांति के प्रतीक हैं। जैसे सुबह की लहरें धीरे-धीरे किनारे को छूती हैं, वैसे ही ये स्वर मन को छूते हैं।”
सितार की पहली झंकार के साथ ही कक्षा पांचवीं की पूर्वी, साक्षी, मंजुलता, झनेंद्र, खुशी और तारिका तथा कक्षा चौथी की प्रेरणा, झरना, रेणु, राजलक्ष्मी, वेदिका, पलक, त्रिषिका और खुशबू सहित अन्य नन्हे कलाकार एकाग्र होकर संगीत सुनने लगे। बच्चों की उत्सुकता और संगीत के प्रति उनकी सहज आत्मीयता ने पूरे आयोजन को भावनात्मक बना दिया।
देर रात गांव के बीच गूंजे सितार के सुर
शासकीय प्राथमिक विद्यालय चिटौद के शिक्षक ईश्वरी कुमार सिन्हा ने बताया कि यह विशेष सांगीतिक यात्रा इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ की कुलपति डॉ. लवली शर्मा की पहल पर विद्यार्थियों, शिक्षकों, पालकों और ग्रामवासियों के लिए यादगार बन गई। अपने प्रकृति प्रवास के दौरान ओन्हाकोन्हा स्थित पर्यटन स्थल का अवलोकन करने के बाद उन्होंने गांव के मध्य स्थित लीला चौक में सितार वादन के साथ राज्यगीत की प्रस्तुति दी।
इस दौरान नन्हीं बालिकाओं की टोली ने “सांसों की सरगम” गीत के साथ मधुर स्वर लहरियों में सुस्वागतम् प्रस्तुत किया और स्वागत नृत्य से अतिथियों का अभिनंदन किया। ग्राम पंचायत सरपंच तीरथ यादव, श्रीराम मानस मंडली के गोकुल साहू, लोकनाथ पटेल, देवलाल साहू सहित ग्रामीणों ने कुलपति डॉ. लवली शर्मा का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।
संगीत और बचपन का रिश्ता गहरा और अटूट
कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने कहा कि “बचपन में संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह बच्चों के मस्तिष्क और व्यक्तित्व को कई तरीकों से आकार देता है। मां की लोरी से शुरू होने वाला यह सफर बचपन की यादों का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन जाता है।”
उन्होंने बच्चों के बीच संगीत की ऐसी सहज प्रस्तुति के माध्यम से यह संदेश भी दिया कि संगीत को विद्यालयीन शिक्षा और बाल्यकाल के अनुभवों से जोड़ना बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
चिटौद के लिए गौरव का क्षण
ग्राम पंचायत सरपंच तीरथ यादव और ग्रामीणों ने कुलपति डॉ. लवली शर्मा के गांव आगमन और बच्चों के बीच सितार वादन को चिटौद के लिए गौरव का क्षण बताया। ग्रामीणों ने कहा कि गांव के नन्हे विद्यार्थियों को इतने बड़े संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति से सीधे संगीत सुनने और संवाद करने का अवसर मिलना उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव है।
इस यादगार सांगीतिक एवं सृजनात्मक सफर में कलकत्ता से डॉ. ए.एन. शर्मा, गायत्री परिवार गोकुलपुर इकाई धमतरी से गजानंद साहू, छायाचित्रकार तुषार साहू और तबला वादक अवध सिंह ठाकुर की सहभागिता भी विशेष रही। प्रकृति, लोकजीवन, बचपन और शास्त्रीय संगीत के इस अनूठे संगम ने चिटौद की उस सुबह को यादगार बना दिया।
