बालोद जिला न्यायालय का फैसला; चाकू से वार कर वामन साहू की हत्या करने और घटना को छिपाने का था आरोप
बालोद। पारिवारिक विवाद के दौरान चाकू से वार कर वामन साहू की हत्या करने के मामले में बालोद जिला न्यायालय ने उसकी मां और भाई को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश आनंद प्रकाश दीक्षित की अदालत ने आरोपी रमेश्वरी बाई साहू और कुंदन साहू को हत्या तथा साक्ष्य छिपाने के अपराध में दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया। निर्णय 9 अक्टूबर 2026 को पारित किया गया।
हत्या के मामले में उम्रकैद और जुर्माना
न्यायालय ने कोबा, थाना डौंडीलोहारा निवासी रमेश्वरी बाई साहू (55 वर्ष) और कुंदन साहू (26 वर्ष) को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास और प्रत्येक पर 500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। वहीं, धारा 201 के तहत साक्ष्य छिपाने के अपराध में दोनों को सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास और प्रत्येक पर 500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
खाना खाने को कहने पर शुरू हुआ था विवाद
अभियोजन के अनुसार, घटना 31 मार्च 2024 की रात करीब 7:30 से 8 बजे के बीच की है। वामन साहू नशे की हालत में घर पहुंचा था। परिजनों ने उसे खाना खाने के लिए कहा, लेकिन उसने मना कर दिया और गाली-गलौज करते हुए विवाद करने लगा। आरोप के अनुसार, घर के आंगन में भी वह अपनी मां को गाली देने लगा।
विवाद के दौरान उसकी मां रमेश्वरी बाई घर में रखे प्याज काटने वाले चाकू को लेकर बाहर आई। इसी बीच उसने अपने छोटे बेटे कुंदन साहू को आवाज देकर बुलाया। अभियोजन के मुताबिक, दोनों ने मिलकर वामन साहू के साथ मारपीट की और चाकू से उसके कंधे तथा गर्दन के पास तीन वार किए।
खून से लथपथ हालत में पहुंचा रिश्तेदार के घर
गंभीर रूप से घायल वामन साहू अपनी जान बचाने के लिए मदद की गुहार लगाते हुए स्कूल की ओर स्थित अपने चचेरे भाई बिरेन्द्र साहू के घर पहुंचा। ग्रामीणों और अन्य लोगों ने उसकी हालत देखकर परिजनों को बुलाया। अभियोजन के अनुसार, पूछताछ के दौरान रमेश्वरी बाई ने कानूनी कार्रवाई से बचने के उद्देश्य से वामन के सीढ़ियों से गिरकर घायल होने की बात कही।
घायल वामन साहू को 108 संजीवनी एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल बालोद ले जाया गया, जहां चिकित्सक ने रात 10:10 बजे उसे मृत घोषित कर दिया।
साक्ष्य छिपाने और जांच में सामने आए तथ्य
प्रकरण की विवेचना के दौरान अभियोजन ने आरोप लगाया कि घटना के बाद कुंदन साहू मौके से फरार हो गया, जबकि रमेश्वरी बाई ने साक्ष्य छिपाने की नीयत से घर की लिपाई-पुताई कर दी। विवेचना के दौरान आरोपियों के कथनों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर धारदार चाकू, कपड़े, मोबाइल और मोटरसाइकिल जब्त किए गए।
मामले में 24 जून 2024 को न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
अतिरिक्त लोक अभियोजक ने की पैरवी
प्रकरण में अभियोजन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक सनद कुमार श्रीवास्तव ने पैरवी की। मामले की विवेचना निरीक्षक लक्ष्मीप्रसाद जायसवाल ने की। न्यायालय ने प्रकरण में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दंडित किया।

