95 किलोमीटर लंबी दल्लीराजहरा–रावघाट रेल लाइन का निर्माण पूरा, 17.5 किलोमीटर के अंतिम रेलखंड से वनांचल को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी; यात्री सेवा शुरू होने से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार को मिलेगी नई दिशा
बालोद/कांकेर। बस्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। दल्लीराजहरा से रावघाट तक 95 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का निर्माण पूरा हो चुका है। ताड़ोकी से रावघाट के बीच 17.5 किलोमीटर लंबे अंतिम रेलखंड के तैयार होने के बाद अब रावघाट तक यात्री रेल सेवा शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। रेलवे की ओर से रायपुर से रावघाट तक प्रस्तावित मेमू ट्रेन की समय-सारिणी जारी कर दी गई है। हालांकि, ट्रेन के उद्घाटन और नियमित परिचालन की आधिकारिक तारीख का अभी इंतजार है।
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, यात्री रेल सेवा 12 अक्टूबर से शुरू की जानी थी, लेकिन रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का प्रस्तावित दौरा रद्द होने के कारण उद्घाटन कार्यक्रम टल गया। ऐसे में समय-सारिणी जारी होने के बाद भी यात्रियों को ट्रेन के परिचालन की नई तारीख का इंतजार है। रेल सेवा शुरू होने पर कांकेर जिले के दूरस्थ गांवों सहित आसपास के वनांचल क्षेत्रों के लोगों को आवागमन का बेहतर विकल्प मिलने की संभावना है।
दशकों पुराना सपना पूरा होने की ओर, वनांचल को मिलेगी रेल की सौगात
दल्लीराजहरा–रावघाट रेल लाइन केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। सड़क परिवहन पर निर्भर रहने वाले लोगों के लिए रेल सेवा शुरू होना आवागमन के विकल्पों का विस्तार करेगा। इससे रायपुर, भिलाई और अन्य प्रमुख क्षेत्रों तक पहुंचने में यात्रियों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।
रेल संपर्क बेहतर होने से विद्यार्थियों, मरीजों, नौकरीपेशा लोगों, छोटे कारोबारियों और व्यापारियों को लाभ मिल सकता है। पढ़ाई के लिए बड़े शहरों में जाने वाले विद्यार्थियों को यात्रा का अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। वहीं, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दूसरे शहरों का रुख करने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए भी रेल सेवा उपयोगी साबित हो सकती है।
वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए परिवहन की सुविधा का सीधा संबंध शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार तक पहुंच से है। ऐसे में रावघाट तक यात्री ट्रेन का संचालन शुरू होना क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कृषि उपज और वनोपज को बाजार तक पहुंचाने में मिलेगी मदद
रेल संपर्क का लाभ केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। बेहतर परिवहन व्यवस्था से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादित कृषि उपज और वनोपज को बड़े बाजारों तक पहुंचाने के लिए बेहतर संपर्क सुविधा उपयोगी हो सकती है। इससे स्थानीय व्यापारियों और उत्पादकों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
रेल सेवा के विस्तार से भविष्य में पर्यटन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं। बस्तर और आसपास के जनजातीय अंचलों में प्राकृतिक संपदा, स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली की विशिष्ट पहचान है। बेहतर कनेक्टिविटी से इन क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने पर पर्यटन संबंधी गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
हालांकि, इन संभावनाओं का वास्तविक लाभ रेल सेवा के नियमित संचालन, आगे के रेल नेटवर्क के विस्तार और क्षेत्र में विकसित होने वाली अन्य सुविधाओं पर निर्भर करेगा।
भिलाई इस्पात संयंत्र के लिए भी अहम है रेल परियोजना
दल्लीराजहरा–रावघाट रेल लाइन का औद्योगिक महत्व भी काफी बड़ा है। भिलाई इस्पात संयंत्र के लिए लौह अयस्क की आपूर्ति और परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिहाज से यह रेल मार्ग महत्वपूर्ण माना जाता है। रेल के माध्यम से माल परिवहन को बेहतर लॉजिस्टिक सहयोग मिलने से औद्योगिक गतिविधियों को लाभ हो सकता है।
यह परियोजना एक ओर दूरस्थ क्षेत्रों में यात्री सुविधाओं के विस्तार का आधार बन सकती है, वहीं दूसरी ओर खनिज परिवहन और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में भी उपयोगी साबित हो सकती है। इस तरह रेल लाइन का महत्व जनसुविधा और औद्योगिक विकास, दोनों दृष्टियों से जुड़ा हुआ है।
घने जंगलों और चुनौतीपूर्ण इलाकों में हुआ निर्माण
दल्लीराजहरा से रावघाट तक रेल लाइन का निर्माण घने जंगलों और सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में होने के कारण चुनौतीपूर्ण रहा। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच रेल अधोसंरचना विकसित करने के लिए इंजीनियरों, तकनीकी कर्मचारियों और श्रमिकों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निर्माण कार्य में लगे कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेल लाइन के आसपास लगभग प्रत्येक पांच किलोमीटर पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के शिविर स्थापित किए गए थे। सुरक्षा व्यवस्था और कठिन परिस्थितियों के बीच परियोजना का पूरा होना क्षेत्र में रेल नेटवर्क के विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
रेल लाइन के तैयार होने से अब यात्री सेवा शुरू करने की दिशा में आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, यात्रियों को वास्तविक सुविधा तभी मिल सकेगी, जब रेलवे की ओर से परिचालन की तारीख घोषित कर नियमित सेवा शुरू की जाएगी।
1955 से उठ रही थी रायपुर–जगदलपुर रेल संपर्क की मांग
रायपुर से जगदलपुर को रेल मार्ग से जोड़ने की मांग कई दशकों पुरानी है। वर्ष 1955 से इस दिशा में मांग उठती रही है। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय वर्ष 1993 में योजना आयोग ने इस परियोजना को मंजूरी दी थी, लेकिन इसके क्रियान्वयन में लंबे समय तक देरी होती रही।
छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद इस रेल परियोजना को आगे बढ़ाने के प्रयास तेज हुए। 24 दिसंबर 2007 को राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी), स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल), छत्तीसगढ़ सरकार और रेलवे के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ। इसके तहत दल्लीराजहरा–रावघाट–जगदलपुर रेल लाइन परियोजना को आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई।
प्रस्तावित रेल मार्ग की कुल लंबाई लगभग 235 किलोमीटर निर्धारित की गई थी। परियोजना को दो चरणों में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया। पहले चरण में दल्लीराजहरा से रावघाट तक रेल लाइन का निर्माण और दूसरे चरण में रावघाट से जगदलपुर तक रेल संपर्क का विस्तार प्रस्तावित है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में ताड़ोकी तक रेल सेवा का किया था शुभारंभ
इस रेल परियोजना के विकास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव 3 अक्टूबर 2023 को आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जगदलपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ताड़ोकी तक रेल सेवा का शुभारंभ किया था। अब ताड़ोकी से रावघाट तक रेल संपर्क का विस्तार होने के बाद परियोजना के पहले चरण में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी सोशल मीडिया पर साझा संदेश में 95 किलोमीटर लंबी दल्लीराजहरा–रावघाट रेल लाइन को छत्तीसगढ़ में कनेक्टिविटी मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने भी इस परियोजना को दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में अहम कदम बताया है।
अब रावघाट से जगदलपुर तक रेल लाइन के विस्तार पर नजर
दल्लीराजहरा से रावघाट तक रेल लाइन का निर्माण पूरा होने के बाद अब परियोजना के अगले चरण पर निगाहें टिकी हैं। रावघाट से जगदलपुर के बीच लगभग 140 किलोमीटर लंबे रेलखंड का विकास इस परियोजना का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस खंड में रेल लाइन का विस्तार पूरा होने से बस्तर क्षेत्र को व्यापक रेल नेटवर्क से जोड़ने की संभावनाएं और मजबूत होंगी।
रायपुर से रावघाट तक मेमू ट्रेन की समय-सारिणी जारी होना यात्री रेल सेवा की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है। लेकिन उद्घाटन कार्यक्रम स्थगित होने के कारण अब नियमित परिचालन की नई तारीख घोषित होना बाकी है। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि जल्द ही ट्रेन सेवा शुरू होगी और वर्षों से रेल संपर्क की प्रतीक्षा कर रहे वनांचल के लोगों को इसका लाभ मिलेगा।
दल्लीराजहरा–रावघाट रेल लाइन को बस्तर के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि रेलवे कब तक उद्घाटन और नियमित यात्री परिचालन की नई तारीख घोषित करता है। सेवा शुरू होने के बाद यह रेल मार्ग दूरस्थ अंचलों के लोगों के लिए आवागमन का नया विकल्प बनने के साथ क्षेत्र के विकास को भी नई रफ्तार दे सकता है।





