23 साल बाद भी सफलता की जड़ों को नहीं भूले पूर्व छात्र : क्रांतिभूषण साहू
निकुम। समय बीता, उम्र बढ़ी, जिम्मेदारियां बदलीं और जिंदगी ने सभी को अलग-अलग मुकाम तक पहुंचा दिया, लेकिन स्कूल और गुरुजनों की यादें पूर्व छात्रों के दिलों में आज भी ताजा हैं। इसका जीवंत उदाहरण शनिवार को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भरदाकला में देखने को मिला, जहां वर्ष 2003 बैच के करीब 50 पूर्व छात्र 23 वर्ष बाद एक बार फिर अपने विद्यालय पहुंचे।
कभी इसी विद्यालय की कक्षाओं में बैठकर भविष्य के सपने देखने वाले इन पूर्व छात्रों ने अपने गुरुजनों से मुलाकात की और शाल, श्रीफल एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर उनका सम्मान किया। इस दौरान पुराने दिनों की यादें ताजा हुईं और गुरु-शिष्य का आत्मीय मिलन भावुक क्षणों में बदल गया।
अलग-अलग क्षेत्रों में बनाई पहचान
गौरतलब है कि वर्ष 2003 बैच के कई पूर्व छात्र आज विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं। कोई पुलिस विभाग में अपनी सेवाएं दे रहा है तो कोई डॉक्टर, शिक्षक, राजस्व विभाग सहित न्यायिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहा है। अपनी सफलता और व्यस्तताओं के बावजूद इन पूर्व छात्रों ने अपनी सफलता की जड़ों को नहीं भुलाया और 23 साल बाद उसी विद्यालय में लौटकर गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
कार्यक्रम की शुरुआत शिक्षकों पी.आर. खारांसु, पदुम लोचन शर्मा, भूपत कलिहारी, हेमलाल साहू, सी.आर. गेडाम एवं श्रीमती नंदिता झा सहित उपस्थित शिक्षकों द्वारा मां सरस्वती की पूजा-अर्चना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद पूर्व छात्रों ने गुरुजनों का सम्मान किया। शिक्षकों ने भी अपने पुराने विद्यार्थियों को आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं दीं।
शिक्षा के साथ दीक्षा भी जरूरी : पी.आर. खारांसु
सेवानिवृत्त वरिष्ठ व्याख्याता पी.आर. खारांसु ने कहा कि जीवन में शिक्षा के साथ दीक्षा भी जरूरी है। शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान देती है, जबकि संस्कार और सही मार्गदर्शन उसे जीवन में आगे बढ़ने की दिशा प्रदान करते हैं।
गुरु का सम्मान और लक्ष्य के प्रति दृढ़ता सफलता की कुंजी : क्रांतिभूषण साहू
ग्राम पंचायत भरदाकला के सरपंच क्रांतिभूषण साहू ने कहा कि जीवन में गुरुजनों का सम्मान करते हुए अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प के साथ कार्य किया जाए तो सफलता अवश्य मिलती है। भरदाकला विद्यालय के शिक्षकों के परिश्रम और मार्गदर्शन से यहां के अनेक विद्यार्थी आज विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय में विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किया जाएगा।
पूर्व छात्रों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में भरदाकला विद्यालय के पूर्व छात्र एवं वर्तमान में दंतेवाड़ा जिले में न्यायिक क्षेत्र में कार्यरत भूपत त्यागी ने भी अपने अनुभव साझा किए। वहीं पूर्व छात्र एवं एसटीएफ मेजर बलराम यादव ने कहा कि गुरुजनों का मार्गदर्शन उनके जीवन की मजबूत नींव बना। विद्यालय में बिताया समय और शिक्षकों से मिले संस्कार आज भी उन्हें जीवन में प्रेरणा देते हैं।
देशभक्ति और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की प्रस्तुति ने मोहा मन
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने देशभक्ति एवं छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति पर आधारित गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा। वर्षों बाद गुरुजनों और पूर्व छात्रों के इस आत्मीय मिलन ने विद्यालय परिसर को भावनाओं से भर दिया।
आयोजक समूह के अध्यक्ष शकुन तला साहू ने कहा कि यह सम्मान समारोह इस बात का संदेश देता है कि समय कितना भी बीत जाए, गुरु और शिष्य का रिश्ता कभी पुराना नहीं होता। गुरुजनों के आशीर्वाद और संस्कार जीवनभर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हैं।
कार्यक्रम में पूर्व छात्रों टिकेंद्र साहू, डॉ. संदीप बेलचंदन, लीकेश्वर साहू, उत्तम साहू, प्रहलाद सहित बड़ी संख्या में पूर्व छात्र, वरिष्ठ ग्रामीणजन एवं विद्यालय स्टाफ उपस्थित रहे।

