कबाड़ से जुगाड़ कर बनाई 6 फीट की अनोखी राखी, पर्यावरण और जल संरक्षण का दे रही संदेश

Darshan Balod
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साइकिल के पुराने पहिए और वेस्ट मटेरियल से तैयार की तितलीनुमा राखी, सड़क किनारे नीम के पेड़ पर लगाकर कर रहे जागरूक

बालोद। रक्षाबंधन के पर्व पर जहां बाजारों में तरह-तरह की राखियां लोगों को आकर्षित कर रही हैं, वहीं गुंडरदेही विकासखंड के ग्राम देवरी द निवासी पर्यावरण प्रेमी एवं जल प्रहरी भोज साहू (शुभम्) ने कबाड़ से जुगाड़ कर तैयार की गई अपनी अनोखी राखी से लोगों का ध्यान खींचा है। उन्होंने साइकिल के पुराने पहिए के रिंग, स्कोप और अन्य वेस्ट मटेरियल का रचनात्मक उपयोग करते हुए तितली के आकार की करीब 6 फीट लंबी और 4 फीट चौड़ी विशाल राखी तैयार की है।

राखी में छिपा पर्यावरण और जल संरक्षण का संदेश

भोज साहू ने राखी को आकर्षक स्वरूप देने के बाद इसके ऊपर फ्लैक्स लगाकर पर्यावरण एवं जल संरक्षण से जुड़े जागरूकता संदेश लिखे हैं। इसमें “जल ही जीवन है”, “जल है तो कल है”, “प्रकृति का अनमोल उपहार हूं” और “पेड़-पौधों की सुरक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है” जैसे संदेश शामिल हैं।

इस विशाल राखी को सड़क किनारे स्थित नीम के पेड़ पर लगाया गया है, जहां से गुजरने वाले राहगीरों का ध्यान बरबस इसकी ओर आकर्षित हो रहा है।

10 साल से राखी के जरिए सामाजिक संदेश

भोज साहू पिछले करीब 10 वर्षों से राखी के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को जन-जागरूकता से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। वे हर वर्ष अलग-अलग विषयों को केंद्र में रखकर रचनात्मक राखियां तैयार करते हैं।

इससे पहले वे पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, मतदान जागरूकता, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ सहित देश के वीर जवानों को समर्पित तिरंगा थीम पर भी राखियां तैयार कर चुके हैं।

कबाड़ को बनाया जागरूकता का माध्यम

भोज साहू का कहना है कि जिन वस्तुओं को लोग कबाड़ समझकर फेंक देते हैं, उनका रचनात्मक उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण के साथ समाज को सकारात्मक संदेश दिया जा सकता है। उनका उद्देश्य केवल आकर्षक राखी तैयार करना नहीं, बल्कि इसके माध्यम से लोगों को प्रकृति, जल संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है।

उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी रचनात्मक पहल भी लोगों का ध्यान महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों की ओर खींच सकती है।

राहगीरों को आकर्षित कर रही अनोखी राखी

कबाड़ से तैयार की गई यह विशाल तितलीनुमा राखी राहगीरों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। लोग रुककर इसे देख रहे हैं और भोज साहू के इस अभिनव प्रयास की सराहना कर रहे हैं।

भोज साहू की यह पहल ‘कबाड़ से जुगाड़’ को रचनात्मकता से जोड़ने के साथ पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने और जन-जागरूकता का अनूठा संदेश दे रही है।


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