बालोद। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर लोगों को हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है। हेपेटाइटिस मुख्य रूप से लिवर को प्रभावित करने वाली बीमारी है, जिसके कई प्रकार होते हैं। समय पर पहचान और उचित उपचार नहीं मिलने पर यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। ऐसे में बीमारी को लेकर जागरूकता, समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह बेहद महत्वपूर्ण है। महामारी विशेषज्ञ एवं फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. वीरेंद्र गंजीर ने बताया कि हेपेटाइटिस के कई प्रकार होते हैं और इनके फैलने के कारण भी अलग-अलग हो सकते हैं। हेपेटाइटिस ए और ई आमतौर पर दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैल सकते हैं, जबकि हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमित रक्त तथा कुछ अन्य संक्रमित शारीरिक द्रवों के संपर्क से फैल सकते हैं। इसलिए स्वच्छता का ध्यान रखना, सुरक्षित पेयजल एवं भोजन का सेवन करना और संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस के कई मामलों में शुरुआत में स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, जिसके कारण लोग बीमारी को गंभीरता से नहीं लेते। थकान, भूख कम लगना, मतली, पेट में असहजता, बुखार या आंखों और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए। हालांकि, इन लक्षणों के अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय चिकित्सकीय जांच जरूरी है। डॉ. गंजीर ने बताया कि हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए प्रभावी टीका उपलब्ध है, इसलिए पात्र लोगों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार टीकाकरण कराना चाहिए। वहीं हेपेटाइटिस सी का इलाज आधुनिक दवाओं से संभव है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा न लें और यदि किसी व्यक्ति में हेपेटाइटिस की पुष्टि होती है तो विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह के अनुसार पूरा उपचार कराएं। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस से बचाव के लिए सुरक्षित रक्त एवं रक्त उत्पादों का उपयोग, व्यक्तिगत स्वच्छता, सुरक्षित स्वास्थ्य प्रक्रियाएं और संक्रमण की रोकथाम के उपाय महत्वपूर्ण हैं। लोगों को हेपेटाइटिस से संक्रमित व्यक्ति के प्रति भेदभाव करने के बजाय उसका सहयोग करना चाहिए, क्योंकि जागरूकता और सही जानकारी ही बीमारी से बचाव का मजबूत माध्यम है। विश्व हेपेटाइटिस दिवस (28 जुलाई) पर डॉ. वीरेंद्र गंजीर ने संदेश दिया कि लिवर की सेहत को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच कराएं, चिकित्सकीय सलाह लें और हेपेटाइटिस के प्रति स्वयं जागरूक होने के साथ अपने परिवार और समाज को भी जागरूक करें। वहीं चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य कर रहे मेडिकल तथा पैरामेडिकल स्टाफ को वायरल हेपेटाइटिस बी से बचने हेतु प्रोफाइलेक्टिक टीकाकरण अवश्य कराना चाहिए जिसमें 0 दिवस 1 महीने पश्चात तथा 6 महीने के अंतराल में कुल 3 टीके लगा कर 20 से 25 साल तक के लिए सुरक्षा पाया जा सकता है। उसी प्रकार बच्चों को जन्म के समय लगने वाला हेपेटाइटिस बी टीकाकरण आजीवन सुरक्षा प्रदान करता है। सभी प्रकार के वायरल हेपेटाइटिस के रोकथाम बचाव व उपचार हेतु भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है जिसमें रोग के त्वरित पहचान उपचार बचाओ तथा नियंत्रण के प्रयास किए जा रहे हैं। शासकीय चिकित्सालयों में उक्त जांच और उपचार निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। हमेशा नए निडिल व सीरीज के इस्तेमाल, सेविंग करते समय हमेशा हमेशा नए रेजर ब्लेड के उपयोग तथा संयमित जीवन, टीकाकरण अपना कर वायरल हेपिटाइटिस संक्रमण से बचाव किया जा सकता है।
विश्व हेपेटाइटिस दिवस विशेष : समय पर जांच और सही उपचार से रोका जा सकता है हेपेटाइटिस का खतरा
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हेपेटाइटिस को लेकर जागरूकता ही बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम : महामारी विशेषज्ञ एवं फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. वीरेंद्र गंजीर
बालोद। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर लोगों को हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है। हेपेटाइटिस मुख्य रूप से लिवर को प्रभावित करने वाली बीमारी है, जिसके कई प्रकार होते हैं। समय पर पहचान और उचित उपचार नहीं मिलने पर यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। ऐसे में बीमारी को लेकर जागरूकता, समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह बेहद महत्वपूर्ण है। महामारी विशेषज्ञ एवं फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. वीरेंद्र गंजीर ने बताया कि हेपेटाइटिस के कई प्रकार होते हैं और इनके फैलने के कारण भी अलग-अलग हो सकते हैं। हेपेटाइटिस ए और ई आमतौर पर दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैल सकते हैं, जबकि हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमित रक्त तथा कुछ अन्य संक्रमित शारीरिक द्रवों के संपर्क से फैल सकते हैं। इसलिए स्वच्छता का ध्यान रखना, सुरक्षित पेयजल एवं भोजन का सेवन करना और संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस के कई मामलों में शुरुआत में स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, जिसके कारण लोग बीमारी को गंभीरता से नहीं लेते। थकान, भूख कम लगना, मतली, पेट में असहजता, बुखार या आंखों और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए। हालांकि, इन लक्षणों के अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय चिकित्सकीय जांच जरूरी है। डॉ. गंजीर ने बताया कि हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए प्रभावी टीका उपलब्ध है, इसलिए पात्र लोगों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार टीकाकरण कराना चाहिए। वहीं हेपेटाइटिस सी का इलाज आधुनिक दवाओं से संभव है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा न लें और यदि किसी व्यक्ति में हेपेटाइटिस की पुष्टि होती है तो विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह के अनुसार पूरा उपचार कराएं। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस से बचाव के लिए सुरक्षित रक्त एवं रक्त उत्पादों का उपयोग, व्यक्तिगत स्वच्छता, सुरक्षित स्वास्थ्य प्रक्रियाएं और संक्रमण की रोकथाम के उपाय महत्वपूर्ण हैं। लोगों को हेपेटाइटिस से संक्रमित व्यक्ति के प्रति भेदभाव करने के बजाय उसका सहयोग करना चाहिए, क्योंकि जागरूकता और सही जानकारी ही बीमारी से बचाव का मजबूत माध्यम है। विश्व हेपेटाइटिस दिवस (28 जुलाई) पर डॉ. वीरेंद्र गंजीर ने संदेश दिया कि लिवर की सेहत को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच कराएं, चिकित्सकीय सलाह लें और हेपेटाइटिस के प्रति स्वयं जागरूक होने के साथ अपने परिवार और समाज को भी जागरूक करें। वहीं चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य कर रहे मेडिकल तथा पैरामेडिकल स्टाफ को वायरल हेपेटाइटिस बी से बचने हेतु प्रोफाइलेक्टिक टीकाकरण अवश्य कराना चाहिए जिसमें 0 दिवस 1 महीने पश्चात तथा 6 महीने के अंतराल में कुल 3 टीके लगा कर 20 से 25 साल तक के लिए सुरक्षा पाया जा सकता है। उसी प्रकार बच्चों को जन्म के समय लगने वाला हेपेटाइटिस बी टीकाकरण आजीवन सुरक्षा प्रदान करता है। सभी प्रकार के वायरल हेपेटाइटिस के रोकथाम बचाव व उपचार हेतु भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है जिसमें रोग के त्वरित पहचान उपचार बचाओ तथा नियंत्रण के प्रयास किए जा रहे हैं। शासकीय चिकित्सालयों में उक्त जांच और उपचार निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। हमेशा नए निडिल व सीरीज के इस्तेमाल, सेविंग करते समय हमेशा हमेशा नए रेजर ब्लेड के उपयोग तथा संयमित जीवन, टीकाकरण अपना कर वायरल हेपिटाइटिस संक्रमण से बचाव किया जा सकता है।
बालोद। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर लोगों को हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है। हेपेटाइटिस मुख्य रूप से लिवर को प्रभावित करने वाली बीमारी है, जिसके कई प्रकार होते हैं। समय पर पहचान और उचित उपचार नहीं मिलने पर यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। ऐसे में बीमारी को लेकर जागरूकता, समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह बेहद महत्वपूर्ण है। महामारी विशेषज्ञ एवं फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. वीरेंद्र गंजीर ने बताया कि हेपेटाइटिस के कई प्रकार होते हैं और इनके फैलने के कारण भी अलग-अलग हो सकते हैं। हेपेटाइटिस ए और ई आमतौर पर दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैल सकते हैं, जबकि हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमित रक्त तथा कुछ अन्य संक्रमित शारीरिक द्रवों के संपर्क से फैल सकते हैं। इसलिए स्वच्छता का ध्यान रखना, सुरक्षित पेयजल एवं भोजन का सेवन करना और संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस के कई मामलों में शुरुआत में स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, जिसके कारण लोग बीमारी को गंभीरता से नहीं लेते। थकान, भूख कम लगना, मतली, पेट में असहजता, बुखार या आंखों और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए। हालांकि, इन लक्षणों के अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय चिकित्सकीय जांच जरूरी है। डॉ. गंजीर ने बताया कि हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए प्रभावी टीका उपलब्ध है, इसलिए पात्र लोगों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार टीकाकरण कराना चाहिए। वहीं हेपेटाइटिस सी का इलाज आधुनिक दवाओं से संभव है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा न लें और यदि किसी व्यक्ति में हेपेटाइटिस की पुष्टि होती है तो विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह के अनुसार पूरा उपचार कराएं। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस से बचाव के लिए सुरक्षित रक्त एवं रक्त उत्पादों का उपयोग, व्यक्तिगत स्वच्छता, सुरक्षित स्वास्थ्य प्रक्रियाएं और संक्रमण की रोकथाम के उपाय महत्वपूर्ण हैं। लोगों को हेपेटाइटिस से संक्रमित व्यक्ति के प्रति भेदभाव करने के बजाय उसका सहयोग करना चाहिए, क्योंकि जागरूकता और सही जानकारी ही बीमारी से बचाव का मजबूत माध्यम है। विश्व हेपेटाइटिस दिवस (28 जुलाई) पर डॉ. वीरेंद्र गंजीर ने संदेश दिया कि लिवर की सेहत को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच कराएं, चिकित्सकीय सलाह लें और हेपेटाइटिस के प्रति स्वयं जागरूक होने के साथ अपने परिवार और समाज को भी जागरूक करें। वहीं चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य कर रहे मेडिकल तथा पैरामेडिकल स्टाफ को वायरल हेपेटाइटिस बी से बचने हेतु प्रोफाइलेक्टिक टीकाकरण अवश्य कराना चाहिए जिसमें 0 दिवस 1 महीने पश्चात तथा 6 महीने के अंतराल में कुल 3 टीके लगा कर 20 से 25 साल तक के लिए सुरक्षा पाया जा सकता है। उसी प्रकार बच्चों को जन्म के समय लगने वाला हेपेटाइटिस बी टीकाकरण आजीवन सुरक्षा प्रदान करता है। सभी प्रकार के वायरल हेपेटाइटिस के रोकथाम बचाव व उपचार हेतु भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है जिसमें रोग के त्वरित पहचान उपचार बचाओ तथा नियंत्रण के प्रयास किए जा रहे हैं। शासकीय चिकित्सालयों में उक्त जांच और उपचार निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। हमेशा नए निडिल व सीरीज के इस्तेमाल, सेविंग करते समय हमेशा हमेशा नए रेजर ब्लेड के उपयोग तथा संयमित जीवन, टीकाकरण अपना कर वायरल हेपिटाइटिस संक्रमण से बचाव किया जा सकता है।
