एम्स रायपुर में मरीजों और उनके परिजनों के बीच बांटी खुशियां, जन्मदिन को मानव सेवा से जोड़कर पेश की प्रेरणादायी मिसाल
रायपुर/बालोद। आज के दौर में जहां जन्मदिन का अवसर अक्सर उत्सव और भव्य आयोजनों तक सीमित रह जाता है, वहीं बालोद जिले के ग्राम नर्रा निवासी एवं वर्तमान में पदुमनगर, भिलाई-3 निवासी बेनुराम साहू ने अपनी पुत्री हर्षिता साहू के जन्मदिन को मानव सेवा और जरूरतमंदों की मदद के लिए समर्पित कर एक प्रेरणादायी मिसाल पेश की। 17 जुलाई 2026 को हर्षिता साहू के जन्मदिन के अवसर पर एम्स अस्पताल रायपुर में दूरस्थ अंचलों से उपचार कराने पहुंचे मरीजों एवं उनके परिजनों के लिए ‘ए मां भोजन सेवा समिति’ के सहयोग से दोपहर के समय 500 से अधिक जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क भोजन कराया गया।
बेनुराम साहू, जो भारतीय रेलवे में सीनियर पैसेंजर ट्रेन मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं, लंबे समय से सामाजिक सेवा की गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि जन्मदिन जैसे विशेष अवसरों को केवल व्यक्तिगत खुशी तक सीमित रखने के बजाय जरूरतमंदों की सेवा से जोड़ने पर मिलने वाला संतोष और खुशी कहीं अधिक अनमोल होती है। किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाने और कठिन समय से गुजर रहे मरीजों तथा उनके परिजनों की मदद करने से बढ़कर जन्मदिन मनाने का इससे बेहतर तरीका और क्या हो सकता है।उन्होंने बताया कि ‘ए मां भोजन सेवा समिति’ पिछले सात वर्षों से दानदाताओं के सहयोग से एम्स रायपुर में प्रतिदिन दोनों समय जरूरतमंद मरीजों एवं उनके परिजनों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराने का पुनीत कार्य कर रही है। इस सेवा का लाभ प्रतिदिन लगभग 1,200 से 1,500 मरीज एवं उनके परिजन प्राप्त करते हैं। ऐसे सेवाभावी कार्य में सहभागी बनना अपने आप में सौभाग्य की बात है और इस माध्यम से जरूरतमंदों की सेवा करने का अवसर मिलना ईश्वर की विशेष कृपा के समान है। बेनुराम साहू ने कहा कि माता-पिता के पुण्य प्रताप और समाज के सहयोग से उन्हें सेवा कार्यों से जुड़ने की प्रेरणा मिली है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि परिवार में आने वाले जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और अन्य शुभ अवसरों को जरूरतमंदों की सेवा, भोजन वितरण और समाजहित के कार्यों से जोड़ना चाहिए। इससे न केवल किसी जरूरतमंद की मदद होती है, बल्कि नई पीढ़ी में भी सेवा, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। बेटी हर्षिता साहू के जन्मदिन पर किया गया यह सेवा कार्य निश्चित रूप से एक ऐसा प्रेरणादायी उदाहरण है, जो यह संदेश देता है कि खुशियां तभी सार्थक होती हैं, जब उन्हें दूसरों के साथ बांटा जाए। बेनुराम साहू की इस पहल ने जन्मदिन को केवल एक पारिवारिक उत्सव न बनाकर मानवता की सेवा का अवसर बना दिया। एम्स जैसे अस्पताल में दूर-दराज से इलाज के लिए आने वाले जरूरतमंद मरीजों और उनके परिजनों के लिए भोजन की व्यवस्था करना संवेदनशील समाज की पहचान है। यह पहल लोगों को प्रेरित करती है कि वे भी अपने जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों को सेवा और परोपकार से जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में अपना योगदान दें।
