सुकमा के चुनौतीपूर्ण मोर्चे से बालोद तक—अनुभवी आईपीएस अधिकारी की कार्यशैली में अपराध नियंत्रण के साथ जनविश्वास और अनुशासन पर जोर
बालोद। जिले की पुलिसिंग में जुलाई 2026 से एक नया अध्याय शुरू हुआ है। नवपदस्थ पुलिस अधीक्षक श्री किरण गंगाराम चव्हाण (भा.पु.से.) ने 16 जुलाई 2026 को बालोद जिले की कमान संभाली और पदभार ग्रहण करने के साथ ही कानून-व्यवस्था को मजबूत करने, अपराध नियंत्रण को प्रभावी बनाने तथा आमजन में सुरक्षा का विश्वास और अधिक मजबूत करने की दिशा में अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दीं। उनके नेतृत्व में ‘मिशन नवचेतना’ के तहत नशे के अवैध कारोबार और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में लगातार कार्रवाई की जा रही है। एसपी चव्हाण की कार्यशैली का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि वे पुलिसिंग को केवल कार्रवाई तक सीमित रखने के बजाय अनुशासन, फिटनेस, प्रोफेशनल पुलिसिंग, जनसहभागिता और बेहतर थाना स्तर के समन्वय से जोड़कर देखते हैं। बालोद में पदभार संभालने के बाद आयोजित साप्ताहिक जनरल परेड के निरीक्षण के दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ड्रिल, अनुशासन, वर्दी टर्नआउट और शारीरिक फिटनेस पर विशेष जोर दिया। उन्होंने पुलिस वाहनों की स्थिति और रखरखाव का भी निरीक्षण किया, ताकि जरूरत के समय पुलिस बल त्वरित और प्रभावी ढंग से कार्रवाई कर सके।
‘मिशन नवचेतना’ से नशे के खिलाफ लगातार कार्रवाई
बालोद पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘मिशन नवचेतना’ का उद्देश्य जिले में नशे से जुड़ी अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। अभियान के तहत पुलिस द्वारा अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री सहित नशे से संबंधित गतिविधियों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। हालिया कार्रवाई में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किए गए और अवैध शराब बिक्री तथा सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन के मामलों में वैधानिक कार्रवाई की गई। यह अभियान इस बात का संकेत है कि बालोद पुलिस नशे के कारोबार को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के साथ आगे बढ़ रही है। एसपी चव्हाण के नेतृत्व में पुलिस की प्राथमिकता केवल अपराधियों पर कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि युवाओं और आम नागरिकों को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए जागरूकता और सामाजिक सहभागिता को भी बढ़ावा देना है। मिशन नवचेतना इसी व्यापक सोच का हिस्सा बनकर सामने आ रहा है, जिसमें पुलिस की कार्रवाई के साथ समाज की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुकमा के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र से बालोद तक का अनुभव
किरण गंगाराम चव्हाण 2018 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी हैं। पुलिस सेवा में आने के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में जिम्मेदारियां संभालीं। उपलब्ध प्रकाशित जानकारी के अनुसार, उनके सेवाकाल में बिलासपुर में प्रारंभिक पुलिस जिम्मेदारियों के बाद उन्होंने जगदलपुर में नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) के रूप में कार्य किया। इसके बाद वे सुकमा जैसे अत्यंत संवेदनशील नक्सल प्रभावित जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (नक्सल ऑपरेशन) रहे और बाद में सुकमा के पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी भी संभाली। सुकमा में उनके कार्यकाल का अनुभव बालोद की पुलिसिंग के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, सुरक्षा बलों के बीच समन्वय, जनसहभागिता बढ़ाने तथा मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध कार्रवाई जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में काम करने का अनुभव उन्हें जमीनी पुलिसिंग की व्यापक समझ देता है। उनके कार्यों के लिए वर्ष 2024 में FICCI Best Performing Officer सम्मान से सम्मानित किए जाने की जानकारी भी प्रकाशित हुई है।
अनुभव से निकली पुलिसिंग, बालोद के लिए नई उम्मीद
बालोद अपेक्षाकृत शांत जिला माना जाता है, लेकिन बदलते समय के साथ साइबर अपराध, नशे का प्रसार, अवैध गतिविधियां, यातायात व्यवस्था और युवाओं से जुड़े अपराध जैसी चुनौतियां पुलिस के सामने लगातार बनी रहती हैं। ऐसे समय में चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में काम कर चुके अनुभवी पुलिस अधिकारी का नेतृत्व जिले के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एसपी किरण चव्हाण की प्राथमिकताओं में अपराध नियंत्रण के साथ पुलिस बल की कार्यक्षमता बढ़ाना, थाना स्तर पर बेहतर समन्वय, प्रभावी गश्त, त्वरित कार्रवाई और आम जनता के साथ सकारात्मक संवाद शामिल दिखाई दे रहे हैं। उनकी कार्यशैली में अनुशासन और आधुनिक पुलिसिंग के साथ मानवीय दृष्टिकोण का समन्वय नजर आता है।
पदभार के शुरुआती दिनों में ही दिखने लगा एक्शन मोड
16 जुलाई को पदभार संभालने के बाद से ही पुलिस विभाग की गतिविधियों में सक्रियता दिखाई दे रही है। ‘मिशन नवचेतना’ के तहत अवैध शराब और नशे से जुड़ी गतिविधियों पर कार्रवाई, साप्ताहिक जनरल परेड में अनुशासन एवं फिटनेस पर जोर और पुलिस संसाधनों के निरीक्षण जैसे कदम यह दर्शाते हैं कि नए पुलिस कप्तान व्यवस्था को भीतर से मजबूत करने के साथ-साथ अपराध नियंत्रण को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। बालोद पुलिस की यह नई कार्यशैली आने वाले समय में किस तरह परिणाम देती है, यह तो समय बताएगा, लेकिन शुरुआती संकेत सकारात्मक हैं। यदि पुलिस की कार्रवाई के साथ समाज, अभिभावकों, शिक्षण संस्थानों और युवाओं की सक्रिय सहभागिता भी जुड़ती है, तो ‘मिशन नवचेतना’ नशे के खिलाफ केवल पुलिस अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का अभियान बन सकता है।
एक अधिकारी, एक अनुभव और एक नई उम्मीद
सुकमा के कठिन और संवेदनशील पुलिसिंग अनुभव से गुजरकर बालोद की कमान संभालने वाले एसपी किरण गंगाराम चव्हाण के सामने अब चुनौती है कि वे जिले की स्थानीय जरूरतों को समझते हुए पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी बनाएं। उनकी शुरुआती सक्रियता से यह उम्मीद जगी है कि बालोद में कानून-व्यवस्था के साथ जनविश्वास, अनुशासन और नशामुक्त समाज की दिशा में भी ठोस पहल आगे बढ़ेगी। ‘सुरक्षित बालोद—सजग बालोद’ की भावना को मजबूत करते हुए यदि पुलिस और जनता मिलकर आगे बढ़ते हैं, तो ‘मिशन नवचेतना’ निश्चित रूप से बालोद जिले में सकारात्मक बदलाव की एक प्रेरणादायक कहानी लिख सकता है।
