बालोद। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, आत्मज्ञान भवन आमापारा बालोद की ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर सेवाकेंद्र के साथ-साथ नगर के विभिन्न संस्थानों में पहुंचकर भाई-बहनों को राखी बांधी गई। इस दौरान उन्होंने रक्षाबंधन के आध्यात्मिक रहस्य और जीवन में पवित्रता एवं श्रेष्ठ संकल्पों के महत्व से भी अवगत कराया।
ब्रह्माकुमारी बहनों ने नगर के वृद्धाश्रम, अनाथ आश्रम, मूक-बधिर केंद्र, घरौंदा आश्रम, 21वीं बटालियन के जवानों, जिला जेल, कोतवाली थाना एवं महिला सेल में पहुंचकर रक्षासूत्र बांधा। इस पहल के माध्यम से संस्था ने समाज के विभिन्न वर्गों के साथ रक्षाबंधन की खुशियां साझा कीं।
रक्षाबंधन केवल धागा नहीं, पवित्रता का संकल्प
संस्था की मुख्य संचालिका राजयोगिनी बी.के. विजयलक्ष्मी दीदी ने रक्षाबंधन का आध्यात्मिक महत्व बताते हुए कहा कि रक्षाबंधन केवल धागा बांधने का उत्सव नहीं, बल्कि आत्मा को श्रेष्ठता और पवित्रता के सूत्र में बांधने का पर्व है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि सच्ची सुरक्षा केवल बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि हमारी आंतरिक स्थिति से आती है।
उन्होंने कहा कि जब मन शांत और संकल्प श्रेष्ठ होते हैं, तब व्यक्ति जीवन की विभिन्न परिस्थितियों में भी स्वयं को सुरक्षित और सशक्त अनुभव करता है। वास्तविक रक्षा केवल बाहरी संकटों से बचना नहीं है, बल्कि अपने मन को नकारात्मक विचारों से, बुद्धि को भ्रम से और संस्कारों को कमजोरी से बचाना भी है।
श्रेष्ठ विचार और मधुर वाणी का लें संकल्प
बी.के. विजयलक्ष्मी दीदी ने कहा कि रक्षासूत्र हमें यह संकल्प दिलाता है कि हम अपने विचारों को पवित्र बनाएंगे, वाणी को मधुर रखेंगे और व्यवहार को श्रेष्ठ बनाएंगे। हमारा जीवन ऐसा हो कि हमारी उपस्थिति से दूसरों को शांति, सकारात्मकता और सुरक्षा का अनुभव हो।
उन्होंने कहा कि इस रक्षाबंधन पर केवल कलाई पर धागा न बांधें, बल्कि इसके साथ अपने जीवन को आत्मिक शक्ति, पवित्रता और ईश्वरीय स्मृति के सूत्र में भी बांधें। यही सच्ची रक्षा, आत्मविश्वास और जीवन की वास्तविक विजय का मार्ग है।
ब्रह्माकुमारी बहनों की इस पहल से विभिन्न संस्थानों में रक्षाबंधन का पर्व आत्मीयता, भाईचारे और आध्यात्मिक संदेश के साथ मनाया गया।



