शिक्षक शब्द में समाया, जग सारा,
शिक्षक के चरणों में नमन हमारा।
ज्ञान की ज्योति से रोशन करते जीवन,
अज्ञान का तम हर लेते बनकर उजियारा।
सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस को,
मनाते हैं हम शिक्षक दिवस प्यारा।
5 सितंबर का दिन कहलाता,
पावन और महान शिक्षक दिवस हमारा।
शिक्षक की महिमा निराली,
जग में फैले उजियाली।
ज्ञान, संस्कार और सद्गुण देकर,
करते हैं दुनिया खुशहाली।
गुरु ही हमें राह दिखाते,
गिरकर फिर से उठना सिखाते।
मुश्किल राहों में बनकर सहारा,
जीवन को सुंदर बनाते।
अक्षर-अक्षर ज्ञान सिखाकर,
सपनों को देते हैं पंख।
हममें भरते आत्मविश्वास,
दूर भगाते मन के संदेह।
गुरु केवल पाठ नहीं पढ़ाते,
जीवन का अर्थ समझाते हैं।
सही-गलत का भेद बताकर,
मानवता का पाठ पढ़ाते हैं।
कभी डाँट में छिपा स्नेह,
कभी मुस्कान में प्यार।
शिष्य की छोटी-सी सफलता पर,
हो जाते हैं वे सबसे खुशहाल।
शिक्षक खुद जलते दीपक बनकर,
शिष्यों का जीवन रोशन करते।
अपना सुख-दुख भूलकर अक्सर,
भविष्य हमारा सुंदर करते।
कल के वैज्ञानिक, डॉक्टर, शिक्षक,
कल के नेता, कलाकार।
हर सपने की नींव में होता,
गुरु का स्नेह अपार।
गुरु से ही संस्कार मिले हैं,
गुरु से मिला सम्मान।
गुरु के आशीषों से ही,
बनता है जीवन महान।
आज शिक्षक दिवस के अवसर पर,
करें गुरुजनों का अभिनंदन।
उनके चरणों में शीश नवाकर,
करें हृदय से वंदन।
हे गुरुवर! आपका ऋण हम पर,
शब्दों में कहाँ चुका पाएँगे।
आपने जो राह दिखाई है,
उस राह पर सदा चलते जाएँगे।
ज्ञान की ज्योति जलती रहे,
हर मन में विश्वास रहे।
गुरु-शिष्य का यह पावन रिश्ता,
सदा यूँ ही खास रहे।
शिक्षक शब्द में समाया,
सचमुच जग का सारा उजियारा।
शिक्षक के चरणों में नमन हमारा,
शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ—
गुरुवर को शत-शत नमन हमारा।
स्वरचित : प्रतिभा सुधीर त्रिपाठी
शिक्षक
गुरु बालक दास शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, गोडेला
विकासखंड–गुंडरदेही, जिला–बालोद

