17 हजार से अधिक प्रसव और 228 जुड़वां बच्चों की सुरक्षित डिलीवरी का उल्लेखनीय कीर्तिमान; गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम, डॉक्टर्स डे पर देहदान का महासंकल्प
दुर्ग/बालोद। चिकित्सा सेवा को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानवता की साधना मानकर अपना जीवन समर्पित करने वाली दुर्ग जिला अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. विनीता धुर्वे ने सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता की ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज के लिए लंबे समय तक प्रेरणा बनी रहेगी। हजारों माताओं को सुरक्षित प्रसव की सौगात देने और जटिल परिस्थितियों में नवजीवन की राह आसान बनाने वाली डॉ. विनीता धुर्वे का नाम 228 जुड़वां बच्चों की सफल एवं सुरक्षित डिलीवरी के उल्लेखनीय कीर्तिमान के साथ गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे के अवसर पर मृत्यु उपरांत देहदान का महासंकल्प लेकर यह संदेश दिया है कि मानव सेवा की भावना जीवन की अंतिम सांस के बाद भी समाज के काम आ सकती है।
17 हजार से अधिक प्रसव और 228 जुड़वां बच्चों की सुरक्षित डिलीवरी
डॉ. विनीता धुर्वे की चिकित्सा यात्रा समर्पण और उपलब्धियों से भरी रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने अपने चिकित्सकीय सेवाकाल में 17 हजार से अधिक सफल एवं सुरक्षित प्रसव कराए हैं। इनमें 228 जुड़वां बच्चों की सुरक्षित डिलीवरी का अनोखा रिकॉर्ड भी शामिल है। बताया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में ही उन्होंने बड़ी संख्या में ट्विन्स डिलीवरी कराकर चिकित्सा क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। यह उपलब्धि केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की खुशियों से जुड़ी कहानी है, जिनके जीवन में डॉ. विनीता धुर्वे ने सुरक्षित मातृत्व और नवजात शिशुओं के रूप में नई उम्मीद जगाई। जुड़वां गर्भधारण जैसे मामलों में विशेष चिकित्सकीय सतर्कता और देखभाल की आवश्यकता होती है। ऐसे मामलों में लगातार सेवाएं देकर उन्होंने अपने समर्पण और कार्यकुशलता का परिचय दिया है।
गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम
डॉ. विनीता धुर्वे की इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए उन्हें गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड का आधिकारिक प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। यह सम्मान उनके लिए ही नहीं, बल्कि दुर्ग जिला अस्पताल और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है। इस उपलब्धि से चिकित्सा क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की पहचान को भी नई मजबूती मिली है।
हाई-रिस्क मामलों में भी सेवा का जज्बा
डॉ. विनीता धुर्वे की पहचान कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी मरीजों के साथ खड़े रहने वाली चिकित्सक के रूप में बनी है। जिला अस्पताल में एचआईवी और हेपेटाइटिस-बी जैसे हाई-रिस्क मामलों में गर्भवती महिलाओं की चिकित्सा देखभाल और सुरक्षित प्रसव के दौरान विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है। ऐसे मामलों में भी उन्होंने जिम्मेदारी के साथ अपनी सेवाएं दी हैं। जटिल से जटिल परिस्थितियों में धैर्य और संवेदनशीलता के साथ मरीजों का उपचार करना उनके चिकित्सकीय जीवन की महत्वपूर्ण विशेषता रही है।
डॉक्टर्स डे पर लिया जीवन का सबसे बड़ा 'महादान' का संकल्प
रिकॉर्ड और सम्मान की ऊंचाइयों तक पहुंचने के बावजूद डॉ. विनीता धुर्वे ने मानव सेवा को अपने जीवन का मूल उद्देश्य बनाए रखा। राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे के अवसर पर उन्होंने मृत्यु उपरांत देहदान का संकल्प लेते हुए देहदान की वसीयत सौंपी। इस अवसर पर अस्पताल परिसर में आयोजित विशेष कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. आशीष मिंज, डॉ. जे.पी. मेश्राम एवं नवदृष्टि फाउंडेशन के सदस्यों की उपस्थिति रही। डॉ. विनीता धुर्वे ने बताया कि जब वह मेडिकल की पढ़ाई कर रही थीं, तभी से उनके मन में समाज और चिकित्सा शिक्षा के विकास के लिए देहदान करने का संकल्प था। डॉक्टर्स डे पर इसे औपचारिक रूप देकर उन्होंने अपने जीवन के इस महत्वपूर्ण संकल्प को पूरा किया। देहदान के माध्यम से चिकित्सा विद्यार्थियों को अध्ययन, शोध और व्यावहारिक प्रशिक्षण में सहायता मिल सकती है, जिससे भविष्य में चिकित्सा के क्षेत्र में नई पीढ़ी को बेहतर प्रशिक्षण प्राप्त होगा।
भाई विवेक धुर्वे ने कहा—बहन की सेवा भावना हम सभी के लिए प्रेरणा
डॉ. विनीता धुर्वे के इस निस्वार्थ और प्रेरणादायी निर्णय पर उनके भाई श्री विवेक धुर्वे (व्याख्याता) सहित पूरे परिवार और चिकित्सा जगत ने गर्व व्यक्त किया है। विवेक धुर्वे ने कहा कि उनकी बहन ने अपने पूरे चिकित्सकीय जीवन में सेवा और समर्पण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। हजारों माताओं को सुरक्षित प्रसव की सुविधा देने से लेकर जुड़वां बच्चों की रिकॉर्ड संख्या में सफल डिलीवरी कराने तक उनका सफर अपने आप में प्रेरणादायी है। अब देहदान का संकल्प लेकर उन्होंने मानवता की सेवा को जीवन के बाद भी जारी रखने का जो निर्णय लिया है, वह पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि डॉ. विनीता का जीवन यह संदेश देता है कि चिकित्सा केवल उपचार का माध्यम नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सबसे बड़ा अवसर भी है। उनका यह महासंकल्प आने वाली पीढ़ियों को भी समाज और चिकित्सा के क्षेत्र में निस्वार्थ भाव से योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा।
सम्मान और रिकॉर्ड से बड़ी है सेवा की भावना
डॉ. विनीता धुर्वे की उपलब्धियों में वर्ल्ड रिकॉर्ड और हजारों सफल प्रसव निश्चित रूप से गौरव का विषय हैं, लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि उन माताओं और परिवारों के चेहरों पर आई मुस्कान है, जिन्हें उन्होंने सुरक्षित चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई। उनका कार्य यह साबित करता है कि किसी चिकित्सक की महानता केवल पुरस्कारों और रिकॉर्ड से नहीं, बल्कि उसके द्वारा बचाई गई जिंदगियों और समाज के प्रति उसके समर्पण से तय होती है। डॉ. विनीता धुर्वे की कहानी हमें यह सिखाती है कि सच्ची सेवा का कोई अंत नहीं होता। उन्होंने अपने चिकित्सकीय जीवन में हजारों परिवारों को खुशियां दीं और अब देहदान का संकल्प लेकर समाज को यह प्रेरणा दी है कि मानवता की सेवा जीवन के बाद भी जारी रह सकती है। 'जीते जी चिकित्सा सेवा, जाते-जाते देहदान'—डॉ. विनीता धुर्वे का यह महासंकल्प वास्तव में छत्तीसगढ़ की धरती से निकली मानवता, सेवा, समर्पण और त्याग की एक ऐसी प्रेरणादायी कहानी है, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी।
