नाड़ी देखकर शरीर की समस्या पहचानने का दावा, वर्षों से जरूरतमंदों की निःशुल्क सेवा; शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवता के लिए भी बढ़ाए मदद के हाथ
बालोद। आज हम आपको ऐसे इंसान से परिचित करवा रहे हैं जिन्होंने अपने जीवन को केवल स्वयं तक सीमित न रखते हुए समाज और मानवता की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। ऐसे ही प्रेरणादायी व्यक्तित्व हैं बालोद जिले के ग्राम भेंड़ी (सुरेगांव) निवासी गुरुदेव वीरेंद्र कुमार देशमुख, जो लंबे समय से नाड़ी वैद्य के रूप में लोगों की सेवा करने के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों और जरूरतमंदों की मदद के लिए भी सक्रिय हैं। उनका जीवन सेवा, परोपकार और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना का प्रेरक उदाहरण है। 8 मार्च 1987 को जन्मे गुरुदेव वीरेंद्र कुमार देशमुख, पिता श्री राम सिंह देशमुख के सुपुत्र हैं और अन्य पिछड़ा वर्ग के कुर्मी समाज से आते हैं। नाड़ी चिकित्सा के क्षेत्र में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके पास दूर-दूर से लोग अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। वे नाड़ी परीक्षण के माध्यम से शरीर की स्थिति और संभावित समस्याओं को समझने का प्रयास करते हैं और इसके आधार पर आयुर्वेदिक औषधियों से उपचार करते हैं। उनके अनुसार कई बार मरीजों को अपनी समस्या समझने के लिए महंगी जांचों की आवश्यकता नहीं पड़ती और नाड़ी परीक्षण के माध्यम से शरीर की स्थिति का आकलन किया जा सकता है। हालांकि गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में वे आधुनिक चिकित्सा जांच और विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता को भी महत्वपूर्ण मानते हैं। गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख का कहना है कि चिकित्सा सेवा उनके लिए केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि मानव सेवा का माध्यम है। वे उपचार के लिए अलग से कोई फीस नहीं लेते, बल्कि मरीजों से केवल आवश्यक दवाइयों की लागत ली जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को कई बार निःशुल्क उपचार एवं सहायता भी प्रदान की जाती है। वर्ष 2005 से वे विभिन्न स्थानों पर नियमित रूप से नाड़ी परीक्षण एवं सेवा कार्य कर रहे हैं। प्रत्येक रविवार और गुरुवार को कामधेनु काली मंदिर, भेंड़ी-सुरेगांव, सोमवार को इंदिरा मार्केट दुर्ग, मंगलवार को कमला कॉलेज के पास राजनांदगांव, बुधवार को एलआईसी कार्यालय के पास बालोद तथा शनिवार को धनोरा-दुर्ग में लोगों को सेवा उपलब्ध कराते हैं। नाड़ी परीक्षण और आयुर्वेदिक उपचार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के कारण लकवा, वात संबंधी समस्या, अस्थमा सहित विभिन्न स्वास्थ्य परेशानियों से जूझ रहे लोग भी उनसे परामर्श लेने पहुंचते हैं। वे लोगों को अपनी स्वास्थ्य समस्या के संबंध में मार्गदर्शन देने के साथ आयुर्वेदिक औषधियों के माध्यम से उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास करते हैं। उनके पास आने वाले कई मरीज उनके उपचार से लाभ मिलने की बात भी बताते हैं। हालांकि किसी भी गंभीर बीमारी के उपचार में योग्य चिकित्सक की सलाह और आवश्यक चिकित्सकीय जांच को प्राथमिकता देना जरूरी है।
इलाज के साथ जरूरतमंदों की मदद में भी आगे
गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख की पहचान केवल नाड़ी वैद्य के रूप में ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील समाजसेवी के रूप में भी है। जरूरतमंद परिवारों की परेशानी सामने आने पर वे अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक और सामाजिक सहयोग करते रहते हैं। हाल ही में नवापारा राजिम में एक पीड़ित परिवार को उन्होंने 31 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। इससे पहले भी वे कई जरूरतमंदों की मदद कर चुके हैं। उनका मानना है कि समाज में यदि सक्षम लोग अपने आसपास के जरूरतमंद परिवारों का सहयोग करें तो कई कठिन परिस्थितियों को आसानी से कम किया जा सकता है।
शिक्षा के लिए 8 लाख रुपये का सहयोग, स्कूल निर्माण में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
सेवा की इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख ने नवागांव पुरदा क्षेत्र में स्कूल निर्माण के लिए 8 लाख रुपये का सहयोग प्रदान किया है। उन्होंने अपने खर्चे से दुर्ग जिले के ग्राम नवागांव (पुरदा) में स्कूल के लिए कमरे के निर्माण की पहल की और इसके भूमिपूजन में भी शामिल हुए। शिक्षा के क्षेत्र में उनका यह योगदान ग्रामीण बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। उनका मानना है कि समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब स्वास्थ्य के साथ शिक्षा को भी मजबूत किया जाए।
भेंड़ी में कामधेनु मंदिर बना आस्था और सेवा का केंद्र
ग्राम भेंड़ी में उनके द्वारा निर्मित विशाल मंदिर परिसर भी उनकी धार्मिक आस्था और सेवा भावना का प्रतीक है। यहां कामधेनु की विशाल प्रतिमा के साथ मां काली की प्रतिमा विराजित है। मंदिर परिसर में ही लोगों को नाड़ी परीक्षण और स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन भी दिया जाता है। कामधेनु प्रतिमा के निर्माण में कोलकाता, जगन्नाथपुरी और इलाहाबाद सहित विभिन्न स्थानों से मिट्टी एवं बालू लाए जाने की जानकारी है। पेड़-पौधों की गुदा और विशेष पत्थरों से प्रतिमा निर्माण का कार्य किया गया है।
लिमोरा में बनवा रहे हैं 64 योगिनी कामधेनु मंदिर, मोक्ष धाम फाउंडेशन के संस्थापक भी हैं
गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। गुंडरदेही क्षेत्र के ग्राम लिमोरा में 64 योगिनी कामधेनु का भव्य मंदिर बनवा रहे है । मोक्ष धाम फाउंडेशन के माध्यम से संचालित गतिविधियों के नेतृत्व में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस फाउंडेशन के वे संस्थापक हैं। इस निर्माणाधीन मंदिर में माता काली और मां कामधेनु की भव्य मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। विशाल गुंबद का निर्माण जारी है। यह ऐसा मंदिर होगा जहां पर कोई दान पेटी नहीं होगी।
नाड़ी वैद्य महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बने
उनकी सेवा और पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सक्रियता को देखते हुए हाल ही में उन्हें अखिल भारतीय परंपरागत वन औषधि प्रशिक्षित वैद्य महासंघ, छत्तीसगढ़ का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उतई में हुए नियुक्ति और शपथ ग्रहण के आयोजन में देश और प्रदेश के विभिन्न राज्यों से आए वैद्यराजों एवं पदाधिकारियों की मौजूदगी रही।
सेवा को ही बनाया जीवन का उद्देश्य
गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख का जीवन इसी भावना को दर्शाता है। एक ओर वे नाड़ी चिकित्सा और आयुर्वेदिक उपचार के माध्यम से लोगों की सेवा कर रहे हैं, तो दूसरी ओर शिक्षा, आर्थिक सहायता, धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से समाज के जरूरतमंद वर्ग तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि उन्होंने सेवा को किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा। स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा और जरूरतमंद परिवारों की सहायता तक, वे अपनी क्षमता के अनुसार समाज के लिए योगदान देने का प्रयास कर रहे हैं। उनका जीवन यह प्रेरणा देता है कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बड़े पद या संसाधन से अधिक जरूरी है—सेवा की भावना, संवेदनशील सोच और दूसरों के लिए कुछ करने का संकल्प।
