बालोद की कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने दिलाया जिले को देश भर में अलग पहचान

Darshan Balod
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संकल्प, संवेदनशीलता और सुशासन की नई मिसाल: कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के नेतृत्व में नई ऊंचाइयों को छूता बालोद — माधुरी दीपक यादव, संपादक
बालोद। किसी भी जिले की पहचान केवल उसके भूगोल से नहीं, बल्कि वहां के विकास, सुशासन और जनकल्याण के कार्यों से होती है। आज बालोद जिला उसी पहचान के साथ प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के नेतृत्व में प्रशासन ने जनभागीदारी, नवाचार, पारदर्शिता और संवेदनशील कार्यशैली के माध्यम से विकास का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है, जो अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बनता जा रहा है।

 देश के सर्वश्रेष्ठ जिला मजिस्ट्रेटों में मिली जगह 

मई 2026 में फेम इंडिया एवं एशिया पोस्ट एजेंसी के राष्ट्रीय सर्वेक्षण में कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा को देश के लगभग 800 जिलों में शीर्ष 100 सर्वश्रेष्ठ जिला मजिस्ट्रेटों की सूची में स्थान मिला। उन्होंने छत्तीसगढ़ में प्रथम स्थान प्राप्त किया। बेहतर प्रशासन, सुशासन, संकट प्रबंधन, त्वरित निर्णय क्षमता, नवाचार और जनसंपर्क जैसे विभिन्न मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर यह सम्मान मिला। 

 जल संरक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान 

बालोद ने 'जल संचयन–जन भागीदारी अभियान' में देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त कर नया इतिहास रचा। जिले में एक लाख से अधिक नई जल संरक्षण एवं जल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण किया गया। यह उपलब्धि केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि जनभागीदारी की शक्ति का भी उत्कृष्ट उदाहरण है। 

  बाल विवाह मुक्त अभियान बना देश के लिए मिसाल 

सामाजिक सुधार के क्षेत्र में भी बालोद ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। बाल विवाह जैसी कुप्रथा के विरुद्ध व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर जिले ने बाल विवाह मुक्त जिला बनने की दिशा में ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की। बच्चों के अधिकारों की रक्षा और सामाजिक जागरूकता के लिए किए गए इन प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी मिला।

  'एक पेड़ मां के नाम' से हरियाली का नया इतिहास 

पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए 'महतारी वंदन वृक्षारोपण अभियान – एक पेड़ मां के नाम' के अंतर्गत जिले में एक ही दिन में ढाई लाख से अधिक पौधों का रोपण किया गया। महिलाओं, विद्यार्थियों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों की सहभागिता ने इस अभियान को ऐतिहासिक बना दिया।

  सुव्यवस्थित और विकसित बालोद की ओर बढ़ते कदम 

शहर को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाने, अतिक्रमण हटाने, जल संरक्षण, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और जनसुनवाई जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में भी जिला प्रशासन लगातार सक्रिय रहा है। प्रशासन की त्वरित निर्णय क्षमता और मैदानी कार्यशैली ने आम जनता का विश्वास और मजबूत किया है। 

  जनभागीदारी से विकास का नया मॉडल

आज बालोद में विकास केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनभागीदारी का अभियान बन चुका है। पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, विद्यार्थियों, युवाओं और आम नागरिकों की सहभागिता ने जिले को नई पहचान दिलाई है।

  संपादकीय दृष्टि 

किसी भी प्रशासनिक अधिकारी की सबसे बड़ी पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके कार्यों से बनती है। जब योजनाएं धरातल पर उतरती हैं, जनता की भागीदारी बढ़ती है और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचता है, तभी सुशासन की वास्तविक तस्वीर दिखाई देती है। बालोद जिले में पिछले समय में हुए अनेक नवाचार और उपलब्धियां इसी सकारात्मक सोच का परिणाम हैं। यह आवश्यक है कि विकास की यह गति निरंतर बनी रहे और प्रशासन तथा जनता मिलकर जिले को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएं। आज बालोद केवल एक जिला नहीं, बल्कि सुशासन, सामाजिक सुधार, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी आधारित विकास का एक प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभर रहा है।

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