2015 के एंबुश केस में अदालत का बड़ा फैसला, 33 लाख के इनामी नक्सली दंपति समेत 5 माओवादियों को सजा

Darshan Balod
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प्रभाकर और राजे कांगे को 7-7 साल का सश्रम कारावास, तीन अन्य दोषियों को 5-5 वर्ष की सजा

कांकेर। वर्ष 2015 के कोरर थाना क्षेत्र के भैसगांव-नगरमारी पहाड़ी पुलिस एंबुश मामले में कांकेर की विशेष अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पांच माओवादियों को दोषी ठहराया है। अदालत ने माओवादी संगठन के DKSZC सदस्य प्रभाकर उर्फ बालमुरी नारायण राव और उसकी पत्नी राजे कांगे उर्फ माल्टी को 7-7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं मामले में दोषी पाए गए रमेश कुमार कुमेटी, श्यामनाथ उसेंडी और चिंटूराम ताम्रकार को 5-5 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया गया है।

पुलिस के अनुसार प्रभाकर पर 25 लाख रुपये और राजे कांगे पर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। दोनों लंबे समय से माओवादी संगठन में सक्रिय रहे हैं। पुलिस अधिकारियों ने इस फैसले को बस्तर क्षेत्र में सक्रिय बड़े नक्सली कैडरों को न्यायालय के माध्यम से सजा दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

गश्त पर निकली सुरक्षा टीम पर हुआ था हमला

मामला वर्ष 2015 का है। कोरर थाना क्षेत्र के भैसगांव-नगरमारी पहाड़ी जंगल में पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों की संयुक्त टीम सर्चिंग और गश्त अभियान पर निकली थी। इसी दौरान जंगल में घात लगाकर बैठे सशस्त्र माओवादियों ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हुए फायरिंग शुरू कर दी थी।

जवाबी कार्रवाई के बाद माओवादी जंगल का फायदा उठाकर मौके से भाग निकले थे। घटना के बाद कोरर थाने में हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट और यूएपीए सहित संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।

2024 में गिरफ्तारी के बाद आगे बढ़ी कानूनी कार्रवाई

लंबे समय तक फरार रहे प्रभाकर और राजे कांगे को सुरक्षा बलों ने 2024 में गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक दोनों के खिलाफ हत्या, लूट, फिरौती और सुरक्षा बलों के जवानों एवं पुलिस अधिकारियों पर हमले सहित 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।

डिजिटल साक्ष्यों ने मजबूत किया अभियोजन का पक्ष

मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों से बरामद इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल सामग्री को भी साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत किया। साइबर सेल की मदद से डिजिटल दस्तावेजों को सुरक्षित तरीके से संकलित कर न्यायालय के समक्ष ई-साक्ष्य के रूप में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष ने इन साक्ष्यों के साथ अन्य दस्तावेजी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को साबित करने का प्रयास किया।

अदालत ने गंभीर अपराधों पर सख्त रुख अपनाया

फैसले में अदालत ने देश की संप्रभुता, सुरक्षा और एकता को प्रभावित करने वाली गतिविधियों से जुड़े अपराधों को गंभीर प्रकृति का माना। अदालत ने कहा कि जब अभियोजन पक्ष ठोस साक्ष्यों के आधार पर पूर्व नियोजित गंभीर अपराध को साबित करता है, तो कानून के अनुरूप कठोर दंड दिया जाना आवश्यक है।

पांच माओवादियों को सुनाई गई सजा को पुलिस एवं अभियोजन पक्ष के लिए महत्वपूर्ण न्यायिक उपलब्धि माना जा रहा है। यह फैसला नक्सल प्रभावित क्षेत्र में दर्ज पुराने मामलों की न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।

* प्रकरण की विवेचना में इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों का महत्वपूर्ण उपयोग - उक्त प्रकरण की विवेचना तत्कालीन पुलिस उप महानिरीक्षक, कांकेर रेंज कांकेर एवं वर्तमान अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर, रायपुर श्री अमित तुकाराम कांबले (भापुसे) के निर्देशन तथा पुलिस अधीक्षक कांकेर श्री निखिल राखेचा (भापुसे) के मार्गदर्शन एवं उप पुलिस अधीक्षक श्री राजीव शर्मा के पर्यवेक्षण में व उप पुलिस अधीक्षक कांकेर श्री गिरिजाशंकर साव (रापुसे) द्वारा की गई थी। प्रकरण की विवेचना के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण इलेक्ट्रानिक दस्तावेजों एवं डिजिटल साक्ष्यों को वैज्ञानिक एवं तकनीकी तरीके से सुरक्षित रखने तथा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की दिशा में कांकेर पुलिस द्वारा विशेष सावधानी बरती गई।






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