वर्ष 2015-16 से 2025-26 तक के कार्यों की मांगी गई जानकारी, चालान और ट्रांजेक्शन रिपोर्ट भी करनी होगी प्रस्तुत
बालोद, 16 सितंबर। जिले में शासकीय निर्माण कार्यों के दौरान खनिज राजस्व मद के तहत देय रॉयल्टी एवं जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) राशि की जानकारी को अद्यतन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देश पर खनिज शाखा ने जिले के विभिन्न विभागों, निर्माण एजेंसियों एवं संबंधित अधिकारियों से निर्धारित प्रारूप में जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।
खनिज शाखा द्वारा जारी पत्र के अनुसार वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2025-26 तक कराए गए शासकीय निर्माण कार्यों में निर्माण एजेंसियों एवं ठेकेदारों द्वारा देय रॉयल्टी और डीएमएफ राशि के विरुद्ध जमा की गई राशि का ब्यौरा मांगा गया है। इसमें देय रॉयल्टी, जमा रॉयल्टी, देय डीएमएफ, जमा डीएमएफ तथा भुगतान के लिए शेष राशि की जानकारी शामिल है।
माहवार और दिनांकवार देना होगा ब्यौरा
संबंधित विभागों एवं निर्माण एजेंसियों को निर्धारित प्रारूप में माहवार एवं दिनांकवार जानकारी उपलब्ध करानी होगी। केवल राशि का विवरण ही नहीं, बल्कि जमा राशि से संबंधित चालान की प्रति अथवा ट्रांजेक्शन रिपोर्ट भी प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है।
खनिज शाखा ने निर्देश दिया है कि पत्र प्राप्त होने के 5 दिवस के भीतर यह जानकारी विशेष वाहक के माध्यम से खनिज शाखा कार्यालय में अथवा ई-मेल के जरिए उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।
प्राप्त जानकारी के आधार पर जिले में शासकीय निर्माण कार्यों से संबंधित रॉयल्टी एवं डीएमएफ राशि का संकलित डाटा तैयार कर उसका मिलान किया जाएगा। इससे विभागीय अभिलेखों में राशि संबंधी जानकारी को अद्यतन रखने के साथ ही भुगतान की स्थिति का स्पष्ट रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा।
2026-27 से हर माह की 5 तारीख तक जानकारी अनिवार्य
खनिज शाखा ने वित्तीय वर्ष 2026-27 से व्यवस्था को नियमित करते हुए प्रत्येक माह की 5 तारीख तक संबंधित जानकारी उपलब्ध कराना अनिवार्य किया है। खास बात यह है कि यदि किसी विभाग या निर्माण एजेंसी के संबंध में उस माह की जानकारी निरंक हो, तब भी निर्धारित प्रारूप में निरंक रिपोर्ट भेजनी होगी।
प्रशासन के अनुसार इस प्रक्रिया का उद्देश्य शासकीय निर्माण कार्यों में खनिज राजस्व एवं डीएमएफ मद से संबंधित राशि का सुव्यवस्थित अभिलेखीकरण, पारदर्शिता और समयबद्ध मिलान सुनिश्चित करना है। इससे संबंधित विभागों और निर्माण एजेंसियों के स्तर पर जमा की गई राशि का रिकॉर्ड भी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध रहेगा।

