किसानों-मजदूरों की 9 सूत्रीय मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा का प्रदर्शन

Darshan Balod
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डौंडी में बाइक रैली के बाद तहसील कार्यालय के सामने धरना, 5 एकड़ वाले किसानों के राशन कार्ड से नाम काटने से लेकर स्थानीय युवाओं को रोजगार देने तक उठाए मुद्दे

डौंडी। क्षेत्र की किसान, मजदूर और ग्रामीण समस्याओं को लेकर छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ दल्लीराजहरा एवं किसान संघ बालोद के संयुक्त तत्वावधान में डौंडी में प्रदर्शन किया गया। संगठन की ओर से मुख्यमंत्री के नाम 9 सूत्रीय ज्ञापन अनुविभागीय दंडाधिकारी, डौंडी को सौंपा गया। ज्ञापन तहसीलदार देवेंद्र नेताम ने प्राप्त किया। इस दौरान प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे।

प्रदर्शन की शुरुआत मथई चौक से बाइक रैली के रूप में हुई। रैली तहसील कार्यालय डौंडी पहुंचने के बाद धरना-प्रदर्शन में तब्दील हो गई। इस दौरान पूर्व विधायक एवं मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जनक लाल ठाकुर, माइंस श्रमिक संघ अध्यक्ष सोमनाथ उइके, उपाध्यक्ष सुरेंद्र साहू सहित संतु, भीष्म, हुमन, घना राम, गौतम, प्रेम, कचरू, सुनील कुरेटी और कुसुमटोला के ग्रामीण सहित संगठन के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं पर सरकार को घेरा

मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जनक लाल ठाकुर ने किसानों और मजदूरों की समस्याओं का शीघ्र निराकरण करने की मांग की। उन्होंने केंद्र एवं राज्य की भाजपा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कई आरोप लगाए। ठाकुर ने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण किसानों, मजदूरों और ग्रामीण जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों तथा खनन क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को रोजगार देने की मांग को प्रमुखता से उठाया।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं का समयबद्ध तरीके से निराकरण नहीं किया गया तो संगठन किसान-मजदूर और क्षेत्रीय जनता को साथ लेकर आंदोलन करेगा।

9 सूत्रीय ज्ञापन में ये प्रमुख मांगें

1. 5 एकड़ रकबा वाले किसानों का नाम राशन कार्ड से नहीं काटने की मांग: संगठन ने आरोप लगाया कि प्रदेश में 5 एकड़ रकबा वाले कृषक परिवारों के राशन कार्ड से खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा बिना जानकारी और सूचना के नाम काटे जा रहे हैं। इस प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई।

2. सामूहिक एग्रीटेक पंजीयन रद्द कर एकल पंजीयन की मांग: किसानों के सामूहिक एग्रीटेक पंजीयन को रद्द करते हुए पूर्व की तरह एकल एग्रीटेक पंजीयन को प्राथमिकता देने की मांग रखी गई।

3. फसलों में बीमारी और कीट प्रकोप पर रोकथाम: संगठन ने कहा कि वर्तमान समय में किसानों की फसलों में बीमारी एवं कीट प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। इसकी रोकथाम के लिए कृषि विभाग के माध्यम से तत्काल उचित उपाय और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की गई।

4. गांवों को नगर पंचायत में शामिल करने की प्रक्रिया रोकने की मांग: डौंडी नगर पंचायत क्षेत्र में खैरवाही, औराटोला, उकारी, गंगोलीडीह, कांड़े, अवारी, छिंदगांव, दगांव, सल्हाईटोला सहित अन्य गांवों को ग्राम पंचायत से अलग कर नगर पंचायत में शामिल करने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई। संगठन ने इन गांवों को पूर्व की तरह ग्राम पंचायत में ही रखने की मांग की है।

5. गुदुम क्षेत्र के युवाओं को औद्योगिक प्रशिक्षण और रोजगार: गुदुम ग्राम पंचायत में प्रस्तावित निर्माणाधीन बेनीफिशियल प्लांट के संचालन से पहले आसपास के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को उनकी आवश्यकता के अनुरूप औद्योगिक प्रशिक्षण देने की मांग की गई। संगठन का कहना है कि प्रशिक्षण के बाद स्थानीय एवं प्रभावित निवासियों को प्लांट में रोजगार के अवसर मिलना चाहिए।

6. सिंचाई एवं पीडब्ल्यूडी कार्यों की समीक्षा: क्षेत्र में सिंचाई विभाग एवं लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा कर उन्हें निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा कराने की मांग की गई।

7. दल्लीराजहरा क्षेत्र के स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार: संगठन ने कहा कि दल्लीराजहरा और आसपास का क्षेत्र खनिज संपदा से समृद्ध है, इसके बावजूद स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं। संगठन ने स्थानीय युवाओं के रोजगार के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

8. यूसीसी वापस लेने की मांग: ज्ञापन में केंद्र एवं राज्य सरकार से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को तत्काल वापस लेने की मांग भी शामिल की गई।

9. कुसुमटोला के स्थानीय लोगों को खनन क्षेत्र में रोजगार: ग्राम पंचायत बम्हनी के अंतर्गत आने वाले कुसुमटोला के ग्रामीणों ने कलवर डुलकी माइंस में स्थानीय निवासियों को रोजगार नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाया। संगठन ने खनन क्षेत्र में स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की।

मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन की चेतावनी

संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से शासन-प्रशासन से सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर निराकरण की दिशा में पहल करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई और समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो संगठन क्षेत्र के किसानों, मजदूरों एवं क्षेत्रीय जनता को साथ लेकर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। संगठन ने आंदोलन की स्थिति में इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होने की बात कही।

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