हर महीने 8 से 9 लाख रुपये का डिजिटल लेन-देन, 18 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी; घर-घर पहुंचा रहीं बैंकिंग सुविधाएं
बालोद, 5 सितंबर। कभी सुदूर वनांचल में रहने वाले ग्रामीणों के लिए बैंक तक पहुंचना और सरकारी योजनाओं की राशि निकालना बड़ी चुनौती हुआ करता था। लंबी दूरी, आने-जाने का खर्च और बैंक में लगने वाली कतारों के कारण ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब डौंडी विकासखंड के ग्राम नलकसा की करिश्मा ढीमर ने इस तस्वीर को बदलने की दिशा में मिसाल कायम की है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर ‘बैंक सखी’ बनीं करिश्मा आज वनांचल के ग्रामीणों के घर तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचा रही हैं।
8 गांवों में घर-घर पहुंच रहीं बैंकिंग सेवाएं
करिश्मा अपने गांव नलकसा सहित आसपास के करीब 8 गांवों में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। माइक्रो एटीएम के माध्यम से वे ग्रामीणों को घर बैठे विभिन्न योजनाओं की राशि निकालने की सुविधा देती हैं। इनमें वृद्धावस्था पेंशन, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और विकसित भारत जी राम जी जैसी योजनाओं की राशि का भुगतान शामिल है।
इसके अलावा वे बिजली बिल भुगतान, मोबाइल रिचार्ज और मनी ट्रांसफर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करा रही हैं। इससे ग्रामीणों को बैंक जाने के लिए लंबी दूरी तय करने, कतार में लगने तथा आवागमन पर समय और धन खर्च करने से काफी राहत मिली है।
हर महीने 20 हजार तक की आमदनी
करिश्मा की बैंक सखी के रूप में पहल ग्रामीणों के लिए सुविधा का माध्यम बनने के साथ ही उनके स्वावलंबन का मजबूत आधार भी बनी है। वे हर महीने औसतन 8 से 9 लाख रुपये का डिजिटल लेन-देन करती हैं। इसके माध्यम से उन्हें कमीशन के रूप में प्रतिमाह करीब 18 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है।
इस आय से वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर जीवन की ओर आगे बढ़ रही हैं। उनकी सफलता ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
महिलाओं के सशक्तीकरण की मिसाल
करिश्मा का कहना है कि बैंक सखी के रूप में काम करते हुए उन्हें ग्रामीणों की मदद करने के साथ-साथ स्वयं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। अपनी सफलता और ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आ रहे सकारात्मक बदलाव से उत्साहित करिश्मा ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में संचालित योजनाओं के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया।
उन्होंने कहा, “महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें स्वाभिमान से जीने का अवसर देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद विष्णु भैया।”
वनांचल की करिश्मा ढीमर की यह कहानी बताती है कि यदि अवसर और जिम्मेदारी मिले तो ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत कर सकती हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लोगों के जीवन को आसान बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

