चॉक से शुरू हुआ सफर, समाजसेवा तक पहुंची नंदकिशोर यादव की प्रेरक यात्रा

Darshan Balod
0

करीब 40 वर्षों तक शिक्षा की अलख जगाई, विद्यालय विकास से लेकर प्रशासनिक दायित्वों और समाजसेवा तक छोड़ी अपनी अलग पहचान



बालोद। एक शिक्षक का जीवन केवल कक्षा, ब्लैकबोर्ड और किताबों तक सीमित नहीं होता। वह अपने विद्यार्थियों के भविष्य को संवारते हुए समाज और राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव भी तैयार करता है। शिक्षक दिवस विशेष श्रृंखला में आज बात ऐसे ही शिक्षाविद् श्री नंदकिशोर यादव की, जिन्होंने करीब चार दशकों तक शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्ति को जीवन का विराम नहीं, बल्कि समाजसेवा की नई शुरुआत बना लिया।

ग्राम टेकापार, जिला बालोद निवासी नंदकिशोर यादव ने अपने लंबे शिक्षकीय जीवन में विद्यालय विकास, प्रशासनिक जिम्मेदारियों, प्रशिक्षण कार्यों और सामाजिक गतिविधियों में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। 30 अप्रैल 2026 को प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनकी सक्रियता और समाज के प्रति समर्पण लगातार जारी है।

13 सितंबर 1986 : जब हाथ में पहली बार शिक्षक की जिम्मेदारी आई

नंदकिशोर यादव की प्रथम नियुक्ति 13 सितंबर 1986 को सहायक शिक्षक के पद पर शासकीय प्राथमिक शाला इटई (नांदघाट), जिला बेमेतरा में हुई। यहीं से शुरू हुआ वह सफर, जो आने वाले वर्षों में शिक्षा और सामाजिक सरोकारों की एक प्रेरक यात्रा बन गया।

इसके बाद उन्होंने शासकीय प्राथमिक शाला नयापारा, बालोद, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला नेवारीकला तथा शासकीय बुनियादी उच्चतर माध्यमिक शाला, बालोद में अपनी सेवाएं दीं। अपने अनुभव, कार्यकुशलता और शिक्षा के प्रति समर्पण के बल पर वे आगे बढ़ते रहे।

नवंबर 2025 में उन्हें प्राचार्य पद पर पदोन्नति मिली और अप्रैल 2026 में वे शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हुए।

सिर्फ पढ़ाया नहीं, विद्यालयों को संवारने में भी निभाई बड़ी भूमिका

शिक्षक के रूप में नंदकिशोर यादव की सोच केवल बच्चों को पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं रही। उन्होंने विद्यालयों के विकास को भी अपनी जिम्मेदारी का अहम हिस्सा माना।

अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से विद्यालयों के कायाकल्प, संसाधनों के सुदृढ़ीकरण, बेहतर व्यवस्थाओं और अनुशासन के लिए सक्रिय प्रयास किए। शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में भी उनका नेतृत्व प्रभावी रहा।

जब शिक्षक ने खुद संभाली वायरिंग और नल-फिटिंग की जिम्मेदारी

नंदकिशोर यादव की कार्यशैली की एक खास बात उनकी तकनीकी दक्षता भी रही। प्लंबिंग, इलेक्ट्रिशियन, टेलरिंग और मोटर बाइंडिंग जैसे कार्यों में उनकी रुचि और अनुभव का लाभ विद्यालयों को भी मिला।

शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला नेवारीकला में विद्यालय की आवश्यकताओं को देखते हुए उन्होंने स्वप्रेरणा से स्वयं वायरिंग और नल-फिटिंग का कार्य किया। यह पहल बताती है कि उनके लिए विद्यालय केवल कार्यस्थल नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी और परिवार की तरह था।

पुरस्कारों ने बढ़ाया सम्मान, जिम्मेदारियों ने बनाई अलग पहचान

शिक्षा और प्रशासनिक क्षेत्र में उनके योगदान को विभिन्न स्तरों पर सम्मान मिला। उन्हें ज्ञान दीप शिक्षा गौरव अलंकरण पुरस्कार 2019, संभाग स्तरीय उत्कृष्ट प्रधान पाठक पुरस्कार 2021, जनगणना कार्य के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार 2004 तथा उत्कृष्ट जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर पुरस्कार 2018 एवं 2023 से सम्मानित किया गया।

लेकिन उनकी पहचान केवल पुरस्कारों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी सफलतापूर्वक निभाईं।

चुनाव से जनगणना तक, निभाई मास्टर ट्रेनर की जिम्मेदारी

नंदकिशोर यादव ने वर्ष 2013 से 2024 तक निर्वाचन कार्य में जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा वे जनगणना 2011 के लिए जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर रहे और सेवाकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी मास्टर ट्रेनर की जिम्मेदारी संभाली।

वर्ष 2012 से अपनी सेवानिवृत्ति तक जिला स्तरीय उद्घोषक के रूप में भी वे लगातार सेवाएं देते रहे। शिक्षा के साथ प्रशासनिक और प्रशिक्षण कार्यों में उनकी सक्रियता ने उन्हें बहुआयामी व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया।

सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी है समाज के लिए सेवा का सफर

सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद जहां कई लोग आराम को प्राथमिकता देते हैं, वहीं नंदकिशोर यादव ने अपने अनुभव को समाज के लिए और अधिक उपयोगी बनाने का संकल्प लिया।

वर्तमान में वे उपमहासभा बालोद के महासचिव, बालोद राज के संरक्षक, जिला संगठन बालोद के प्रवक्ता तथा प्रांतीय संचालक, ठेठवार महासभा छत्तीसगढ़ के दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।

इन जिम्मेदारियों के माध्यम से वे समाज को संगठित करने, सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और लोगों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करने का कार्य कर रहे हैं।

साहित्य, संगीत और समाजसेवा में भी गहरी रुचि

शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों के साथ नंदकिशोर यादव की रुचि साहित्य सृजन एवं अध्ययन, संगीत, धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी रही है। उनका मानना है कि व्यक्ति का जीवन केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए भी उपयोगी होना चाहिए।

शिक्षा के प्रति उनका दृष्टिकोण हमेशा व्यापक रहा है। वे मानते हैं—

“शिक्षा ही समाज का सबसे सशक्त आधार है। एक शिक्षक केवल ज्ञान का संचार नहीं करता, बल्कि राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का शिल्पकार होता है।”

चार दशक की सेवा, लेकिन मिशन आज भी जारी

करीब 40 वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहने के बाद नंदकिशोर यादव भले ही शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हों, लेकिन शिक्षा, समाज और जनसेवा के प्रति उनका मिशन आज भी जारी है।

उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि शिक्षक की असली पहचान केवल नौकरी के वर्षों से नहीं होती, बल्कि उन पीढ़ियों, संस्थानों और समाज पर पड़ने वाले उसके सकारात्मक प्रभाव से होती है, जिन्हें वह अपने जीवनकाल में संवारता है।

शिक्षक दिवस के अवसर पर नंदकिशोर यादव जैसे शिक्षकों का जीवन यह प्रेरणा देता है कि हाथ में पकड़ी चॉक भले ही एक दिन छूट जाए, लेकिन ज्ञान बांटने और समाज को दिशा देने का संकल्प कभी सेवानिवृत्त नहीं होता।

Post a Comment

0 Comments

Post a Comment (0)
To Top