संस्कारों की सीख, तकनीक का साथ और नवाचार की राह पर ईश्वरी कुमार सिन्हा

Darshan Balod
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राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक ने मलेशिया के शिक्षाविद से ऑनलाइन संवाद कराकर विद्यार्थियों का बढ़ाया आत्मविश्वास

बालोद/गुरुर। शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में ज्ञान, संस्कार, जिज्ञासा, आत्मविश्वास और सीखने की क्षमता विकसित करने वाला मार्गदर्शक होता है। ईश्वरी कुमार सिन्हा, सहायक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक विद्यालय चिटौद तथा पूर्व आचार्य, सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नवापारा राजिम, ने शिक्षा में नवाचार, तकनीकी प्रयोग, शोध और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई है।







शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2017-18 से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा आदर्श संस्कार शाला, मथुरा (उत्तरप्रदेश) में आदर्श शिक्षा रत्न सम्मान से भी उन्हें नवाजा गया है। उन्होंने Multi Media Reading and Learning विषय पर क्रियात्मक अनुसंधान किया है। वे आइडिया ग्लोबल स्कॉलरशिप के विजेता रहे हैं तथा National Mission for Mentorship in NCTE और International School Award for Innovative Class जैसी शैक्षिक पहलों से भी जुड़े रहे हैं।

कोरोना काल में सैकड़ों बच्चों को तकनीक से जोड़ा

कोरोना वैश्विक संकट के दौर में जब स्कूलों में नियमित कक्षाएं प्रभावित हुईं, तब ईश्वरी कुमार सिन्हा ने अपने निवास स्थान से ही गांव के सैकड़ों बच्चों को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने का कार्य किया। ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को सीखने के अवसर उपलब्ध कराए और तकनीक के माध्यम से शिक्षा जारी रखने के लिए प्रेरित किया।

ग्रामीण बच्चों को डिजिटल माध्यमों से जोड़कर उन्हें बदलते समय के अनुरूप आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उनका यह प्रयास उल्लेखनीय रहा।

मलेशिया के शिक्षाविद से ऑनलाइन संवाद, बच्चों को मिला नया आत्मविश्वास

इसी दौरान उन्होंने गांव के विद्यार्थियों को मलेशिया के एक शिक्षाविद से ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संवाद का अवसर उपलब्ध कराया। अंतरराष्ट्रीय स्तर के शिक्षाविद से सीधे बातचीत और मार्गदर्शन ने विद्यार्थियों के ज्ञान, जिज्ञासा और आत्मविश्वास को नई दिशा दी तथा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

कक्षा से बाहर भी सीखने पर जोर

सिन्हा के शिक्षण में मौखिक अभिव्यक्ति, प्रकृति भ्रमण और ब्रेन स्टॉर्मिंग जैसी गतिविधियों को विशेष स्थान है। इन गतिविधियों के माध्यम से वे बच्चों में रचनात्मक सोच, अभिव्यक्ति क्षमता, जिज्ञासा और आत्मविश्वास विकसित करने पर जोर देते हैं।

उनकी रचना ‘मेरी शैक्षिक यात्रा’ का राष्ट्रीय स्तर पर भोपाल से प्रकाशन हुआ, जबकि ‘मेरा भाषाई अनुभव’ का प्रकाशन LLF, नई दिल्ली से हुआ।

शोध और तकनीकी शिक्षा में भी बनाई पहचान

उन्होंने डॉ. सीवी रमन विश्वविद्यालय, बिलासपुर के अंतर्राष्ट्रीय शैक्षिक सम्मेलन में भाषा और तकनीक विषय पर रिसर्च पेपर प्रस्तुत किया तथा Best Research Paper Presentation Award प्राप्त किया। प्राथमिक शिक्षा में तकनीकी उपयोगिता पर उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी में लेख प्रस्तुत किया।

अंतर्राष्ट्रीय कोडिंग ऑनलाइन कक्षा अध्ययन के एंबेसेडर के रूप में वे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड का हिस्सा भी रहे हैं।

जिला से राज्य स्तर तक निभाई शैक्षिक जिम्मेदारियां

विकासखंड, जिला और राज्य स्तर पर स्त्रोत व्यक्ति के रूप में उन्होंने MGML एवं सामुदायिक सहभागिता सहित प्राथमिक शिक्षा के विभिन्न विषयों पर कार्य किया। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद छत्तीसगढ़ में गणित, भाषा, अंग्रेजी, शाला त्यागी, SAS, NAS और CCE जैसी गतिविधियों में भी उनकी सहभागिता रही है।

शिक्षा के साथ सेवा का भी संकल्प

शिक्षण के साथ सामाजिक सरोकारों को भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारी माना है। वे अब तक 15 बार रक्तदान कर चुके हैं।

उनका शिक्षकीय सफर इस बात की प्रेरक मिसाल है कि संस्कार को तकनीक से, तकनीक को नवाचार से और शिक्षा को सेवा से जोड़ा जाए तो शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।

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