बालोद/अर्जुंदा। चन्द्रशेखर दिल्लीवार, सहायक शिक्षक (विज्ञान), स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी/हिन्दी माध्यम विद्यालय मोहदीपाट, जिला बालोद, शिक्षा के साथ-साथ स्काउटिंग के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहकर विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक एवं सर्वांगीण विकास के लिए उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। वे स्काउटिंग को केवल प्रशिक्षण का माध्यम न मानकर बच्चों में अनुशासन, आत्मनिर्भरता, नेतृत्व क्षमता, सेवा भावना एवं सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने का प्रभावी माध्यम बनाते हैं।
10 साल की सक्रियता, 50 विद्यार्थियों को मिला राज्यपाल पुरस्कार
विगत 10 वर्षों से स्काउटिंग के क्षेत्र में सक्रिय चन्द्रशेखर दिल्लीवार के मार्गदर्शन में लगभग 50 विद्यार्थियों ने राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त कर विद्यालय एवं जिले का गौरव बढ़ाया है। वे विद्यार्थियों को स्काउटिंग के विभिन्न कौशलों के साथ शारीरिक एवं मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।
उनकी सक्रियता के कारण अनेक विद्यार्थियों को राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला है।
जिला और राज्य स्तर पर ट्रेनर की जिम्मेदारी
वे जिला एवं राज्य स्तरीय स्काउटिंग ट्रेनर के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं तथा अन्य विद्यार्थियों एवं स्काउटिंग से जुड़े प्रशिक्षणार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उनके प्रशिक्षण का प्रमुख उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन, सहयोग और नेतृत्व की भावना विकसित करना है।
स्काउटिंग के जरिए पर्यावरण और समाजसेवा से जोड़ रहे बच्चों को
स्काउटिंग गतिविधियों के माध्यम से वे विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, स्वच्छता एवं सामुदायिक सेवा के कार्यों से जोड़ते हैं। साथ ही बच्चों को मितव्ययी बनने, सीमित संसाधनों का सदुपयोग करने तथा कठिन परिस्थितियों में आत्मनिर्भर होकर जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं।
जरूरतमंद विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए भी कर रहे प्रयास
आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की शिक्षा में आर्थिक बाधा न आए, इसके लिए वे जनसहयोग के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों की सहायता जुटाने का प्रयास करते हैं। उनकी पहल से विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ सेवा, सहयोग और सामाजिक सरोकारों के प्रति संवेदनशीलता विकसित हो रही है।
कक्षा से आगे बढ़कर गढ़ रहे जिम्मेदार नागरिक
चन्द्रशेखर दिल्लीवार का समर्पण इस बात का उदाहरण है कि एक शिक्षक कक्षा शिक्षण से आगे बढ़कर विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
