संतान की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना को लेकर माताओं ने रखा व्रत
डौण्डी लोहारा। वनांचल क्षेत्र में बुधवार को हलषष्ठी (कमरछठ) पर्व परंपरा, आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर माताओं ने अपनी संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य एवं सुखी जीवन की कामना को लेकर व्रत रखा और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
सुबह से ही गांव-गांव में पर्व की तैयारियां शुरू हो गई थीं। ग्राम रेंगाडबरी के आमापारा, बाजार चौक, बजरंग नगर, नंदी चौक सहित विभिन्न मोहल्लों में महिलाएं तालाब किनारे एवं घरों के आंगन में एकत्र हुईं। महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार भैंस के दूध, दही, घी, महुआ के पत्ते, पसहर चावल और सात प्रकार की भाजी सहित पूजन सामग्री से पूजा-अर्चना की।
इस दौरान पूजा-अर्चना पंडित लोचन प्रसाद शर्मा द्वारा विधि-विधान से संपन्न कराई गई। उन्होंने महिलाओं को हलषष्ठी व्रत कथा का श्रवण कराया तथा पर्व की धार्मिक मान्यताओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मान्यता के अनुसार हलषष्ठी के दिन हल से जुते हुए अन्न तथा गाय के दूध-दही का सेवन वर्जित माना जाता है। इसी कारण इस पर्व पर पूजा एवं व्रत में भैंस के दूध-दही का विशेष महत्व माना जाता है।
सगरी की पूजा कर संतान के लिए की मंगलकामना
व्रती महिलाओं ने पारंपरिक रूप से सगरी बनाकर उसकी पूजा-अर्चना की और अपनी संतान के सुख, स्वास्थ्य एवं दीर्घायु के लिए प्रार्थना की। पूजा के पश्चात महिलाओं ने एक-दूसरे को पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं तथा प्रसाद का वितरण किया।
पूरे दिन क्षेत्र में भक्ति, उत्साह और मातृत्व प्रेम का वातावरण बना रहा। महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पर्व मनाकर अपनी आस्था और संस्कृति को जीवंत रखा।
रिपोर्ट : नेमन साहू, रेंगाडबरी

