श्रीकृष्ण जन्माष्टमी विशेष : बालोद-दुर्ग सीमा पर बसे ओटेबंद बगीचा में विराजे हैं विष्णु-लक्ष्मी, कदंब वृक्ष से जुड़ी है श्रद्धालुओं की गहरी आस्था
बालोद। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उनसे जुड़ी आस्थाओं की चर्चा स्वाभाविक है। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुंडरदेही विकासखंड में बालोद-दुर्ग जिले की सीमा पर बसा ओटेबंद बगीचा ऐसा ही एक धार्मिक स्थल है, जहां आस्था, पौराणिक मान्यता और अद्भुत शिल्प का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यहां स्थित विष्णुधाम मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता भगवान विष्णु की क्षीरसागर में शयन मुद्रा में विराजमान प्रतिमा है। भगवान विष्णु के चरणों के समीप माता लक्ष्मी की सेवा मुद्रा मंदिर को विशिष्ट आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान करती है।
कदंब वृक्ष पर बंधती है श्रद्धा की डोर
ओटेबंद बगीचा की धार्मिक पहचान में कदंब का वृक्ष विशेष महत्व रखता है। मंदिर समिति के संस्थापक सदस्य वीरेंद्र कुमार दिल्लीबार के अनुसार, श्रद्धालु इस वृक्ष के नीचे स्थित राधा-कृष्ण के स्वरूप के समक्ष सच्ची श्रद्धा से मन्नत मांगते हैं और कदंब की डाल पर नारियल बांधते हैं।
स्थानीय मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना यहां पूरी होती है। मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, संतान की कामना लेकर इंदौर से आए एक परिवार को मन्नत के बाद संतान सुख प्राप्त हुआ। इसी तरह एक व्यक्ति का घर से गायब हुआ ट्रक भी मन्नत मांगने के दो दिन बाद मिल गया। ऐसी मान्यताओं और अनुभवों ने कदंब वृक्ष को श्रद्धालुओं के लिए आस्था का विशेष केंद्र बना दिया है।
1961 से चली आ रही महायज्ञ और मेले की परंपरा
मंदिर समिति के सदस्य एवं स्थानीय जनपद अध्यक्ष पुरुषोत्तम लाल चंद्राकर ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल पक्ष में यहां 11 दिवसीय महायज्ञ और मेला आयोजित होता है। इसकी परंपरा वर्ष 1961 से चली आ रही है। वर्तमान विष्णुधाम मंदिर का निर्माण 1993 में प्रारंभ हुआ और 1996 में पूर्ण हुआ।
संतों ने बताया तपोभूमि
इस तीर्थ की धार्मिक महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महर्षि करपात्री महाराज यहां पधारे थे और उन्होंने इस स्थल को ‘तपोभूमि’ की संज्ञा दी। मंदिर समिति के अनुसार, यहां चार शंकराचार्यों का भी आगमन हो चुका है।
देशभर से पहुंचते हैं श्रद्धालु
विष्णुधाम में विराजमान भगवान विष्णु की विशाल शयन मुद्रा वाली प्रतिमाओं की श्रृंखला और मंदिर की कलात्मक बनावट श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। फाल्गुन मेले के दौरान छत्तीसगढ़ ही नहीं, देश के विभिन्न हिस्सों से साधु-संत और श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर ओटेबंद बगीचा का यह विष्णुधाम हमें उस आस्था से जोड़ता है, जहां कदंब वृक्ष पर बंधा एक नारियल केवल मन्नत नहीं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास की डोर बन जाता है।

