घर की चारदीवारी से शहर की स्वच्छता तक पहुंचीं निशा बेगम, एमआरएफ प्लांट में लिख रहीं बदलाव की कहानी

Darshan Balod
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2017 में स्वच्छता कर्मी के रूप में शुरू हुआ सफर, आज घर-घर कचरा संग्रहण से लेकर उसके प्रबंधन तक संभाल रहीं जिम्मेदारी

बालोद, 21 सितंबर। कभी घर की साफ-सफाई, झाड़ू-पोछा और बच्चों की देखभाल तक सीमित रहने वाली निशा बेगम आज बालोद शहर की स्वच्छता व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। नगरपालिका बालोद के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत संचालित एमआरएफ प्लांट में स्वच्छता दीदी के रूप में काम करते हुए उन्होंने मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति से अपनी जिंदगी को नई दिशा दी है।

निशा बेगम का यह सफर वर्ष 2017 में ‘मिशन क्लीन सिटी’ के तहत स्वच्छता कर्मी के रूप में शुरू हुआ। उनके लिए यह बिल्कुल नई दुनिया थी। शुरुआत में उन्हें साइकिल तक चलाना नहीं आता था। लेकिन काम सीखने और आत्मनिर्भर बनने की इच्छा ने उन्हें आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे उन्होंने रिक्शा चलाना सीखा और आज आत्मविश्वास के साथ घर-घर जाकर कचरा संग्रहण और प्रबंधन का कार्य कर रही हैं।

अब बालोद की गलियां बनीं उनकी पहचान

निशा बताती हैं कि पहले उनकी दुनिया घर और आसपास के मोहल्ले तक सीमित थी। स्वच्छता दीदी बनने के बाद उनका परिचय बालोद शहर की गलियों और घरों से बढ़ता गया। आज वे शहर के अलग-अलग हिस्सों में घर-घर कचरा संग्रहण के काम से जुड़ी हैं।

घर-घर से एकत्र कचरे को एमआरएफ प्लांट लाया जाता है। यहां गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग किया जाता है तथा उपयोगी सामग्री की छंटाई की जाती है। Reduce, Reuse और Recycle के सिद्धांत पर आधारित यह प्रक्रिया कचरे के बेहतर प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण में उपयोगी भूमिका निभाती है।

कमाई ने बदली परिवार की तस्वीर

निशा बेगम के लिए स्वच्छता का काम केवल रोजगार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का माध्यम भी बना। वे बताती हैं कि पहले परिवार के पास कई ऐसी चीजें खरीदने के साधन नहीं थे, जिन्हें वे अपने बच्चों के लिए लेना चाहती थीं। अब इस कार्य से मिलने वाली आय के जरिए वे अपने बच्चों को बेहतर जीवन और शिक्षा देने में सक्षम हो रही हैं।

उनकी कहानी बताती है कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, सीखने और आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति इंसान की जिंदगी बदल सकती है। एक समय घर की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली निशा आज शहर की स्वच्छता व्यवस्था में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं।

स्वच्छता के साथ आत्मनिर्भरता का संदेश

निशा बेगम केंद्र सरकार द्वारा संचालित स्वच्छता अभियानों और योजनाओं से मिले अवसर के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। उनके अनुसार, स्वच्छता से जुड़े कार्य ने उनके जैसे परिवारों के जीवन में बदलाव का रास्ता खोला है।

आज निशा जैसी स्वच्छता दीदियां शहर को स्वच्छ रखने के साथ उन महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं, जो अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और आत्मनिर्भर बनने की राह तलाश रही हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि कोई काम छोटा नहीं होता; मेहनत, निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ किया गया हर काम समाज में बदलाव की नींव बन सकता है।

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