‘कठपुतली वाले गुरुजी’ के नाम से मशहूर युगल किशोर देवांगन, अनोखे नवाचार की जिलेभर में चर्चा
बालोद। शिक्षक दिवस पर ऐसे शिक्षकों की कहानी प्रेरणा देती है, जो अपनी प्रतिभा को शिक्षा से जोड़कर कक्षा को जीवंत बना देते हैं। गुण्डरदेही ब्लॉक के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय देवरी ख में पदस्थ शिक्षक (एलबी) युगल किशोर देवांगन ने कठपुतली कला को शिक्षण का माध्यम बनाकर पढ़ाई को बच्चों के लिए मनोरंजक और प्रभावी बना दिया है। कठपुतलियों के पात्र जब संवाद करते हैं तो बच्चे उत्सुकता से उन्हें देखते हैं और इसी दौरान कठिन विषय भी सहजता से समझ लेते हैं। इसी अनूठे अंदाज के कारण वे क्षेत्र में ‘कठपुतली वाले गुरुजी’ के नाम से पहचाने जाते हैं।
जब कठपुतली के पात्र बने शिक्षक और बच्चे बने सीखने वाले कलाकार
युगल किशोर कठपुतलियों के माध्यम से कहानी, संवाद और अभिनय को पाठ्यक्रम से जोड़ते हैं। बच्चे केवल किताब पढ़ने के बजाय पात्रों और गतिविधियों के जरिए विषय को समझते हैं। खेल-खेल में शिक्षा की यह पद्धति बच्चों की कल्पनाशक्ति, अभिव्यक्ति और रचनात्मकता को भी बढ़ावा देती है।
उन्होंने सीसीआरटी हैदराबाद से कठपुतली कला का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उनकी दक्षता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने उन्हें जिले में कठपुतली कला के प्रचार-प्रसार के लिए नोडल अधिकारी बनाया है।
जिले के स्कूलों तक पहुंचा रहे कठपुतली आधारित शिक्षा
वे जिले के विभिन्न विद्यालयों में इस कला को पहुंचाने के साथ शिक्षकों को इसके शैक्षणिक उपयोग के लिए प्रेरित कर रहे हैं। खिलौनों के माध्यम से शिक्षा के लिए भी उन्हें जिला नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी मिली है।
अब स्कूल में तैयार होगा संस्कृति का अपना मंच
युगल किशोर देवांगन अब अपने विद्यालय में राष्ट्रीय सांस्कृतिक क्लब शुरू करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने सीसीआरटी राजस्थान से रिफ्रेशर कोर्स प्राप्त किया है और सीसीआरटी नई दिल्ली के मार्गदर्शन में आगे की तैयारी कर रहे हैं।
इस पहल के जरिए बच्चों को भारतीय कला, संगीत, नृत्य, नाट्य, साहित्य और लोक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास होगा।
आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कृति से भी जोड़ने की पहल
उनका मानना है कि आधुनिक शिक्षा के साथ बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना भी जरूरी है। विद्यार्थी अपनी विरासत को समझें, उसका सम्मान करें और उसके संरक्षण में भागीदार बनें—सांस्कृतिक क्लब का यही उद्देश्य है।
नवाचार के लिए मिल चुके हैं सम्मान
कठपुतली कला और नवाचारी शिक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान को विभिन्न स्तरों पर सराहना मिली है। उन्हें उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान और मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण प्राप्त हो चुका है।
युगल किशोर देवांगन का यह प्रयोग बताता है कि जब शिक्षक अपनी कला को कक्षा से जोड़ता है, तो कठपुतलियां भी शिक्षक बन सकती हैं और खेल-खेल में बच्चे जीवन भर के लिए सीख सकते हैं।
