स्थानीय उदाहरणों और रोचक गतिविधियों से बना रहे गणित को आसान, ‘सेल्फी विद विषय वीर’ जैसी पहल से बढ़ा रहे विद्यार्थियों का उत्साह
बालोद। शिक्षा को किताब और ब्लैकबोर्ड तक सीमित न रखकर गतिविधियों, प्रयोगों और स्थानीय परिवेश से जोड़ने वाले रघुनंदन गंगबोईर ने गणित शिक्षण में अलग पहचान बनाई है। शासकीय हाई स्कूल जमरूवा में सेवा देने के बाद वर्तमान में वे शासकीय हाई स्कूल तरौद में वरिष्ठ व्याख्याता एवं प्रभारी प्राचार्य के रूप में कार्यरत हैं। शैक्षिक नवाचारों के लिए राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित गंगबोईर लगातार गणित को विद्यार्थियों के लिए सरल और रोचक बनाने में जुटे हैं। हालांकि वर्तमान में वे 15 महीने से युक्तियुक्तकरण में हुई विसंगति को लेकर लड़ाई भी लड़ रहे हैं।
‘सेल्फी विद विषय वीर’ से पढ़ाई के प्रति बढ़ा उत्साह
तरौद हाई स्कूल में ‘नवा जतन’ के तहत उन्होंने ‘सेल्फी विद विषय वीर’ पहल शुरू की। विद्यार्थी पढ़ाए जाने वाले पाठ की तैयारी करके विद्यालय आते हैं। सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को ‘विषय वीर’ के रूप में प्रोत्साहित किया जाता है और उनकी उपलब्धि विद्यालय के व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से पालकों व समुदाय तक पहुंचाई जाती है। इससे विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति उत्साह और सकारात्मक प्रतिस्पर्धा बढ़ी।
पनघट की सीढ़ियों से समझाया धनात्मक और ऋणात्मक गणित
गंगबोईर ने ग्रामीण परिवेश को गणित शिक्षण का माध्यम बनाया। धनात्मक और ऋणात्मक पूर्णांकों को समझाने के लिए उन्होंने पनघट की सीढ़ियों का उदाहरण लिया। पानी के नीचे की सीढ़ियों को ऋणात्मक और ऊपर की सीढ़ियों को धनात्मक पूर्णांक से जोड़कर संख्या रेखा की अवधारणा विद्यार्थियों को सहज ढंग से समझाई।
उनका ‘वर्ग चक्रव्यूह’ नवाचार भी चर्चित रहा है।
नवाचारों को मिला राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान
शैक्षिक नवाचारों के लिए उन्हें वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण ‘शिक्षा श्री’ तथा 5 सितंबर 2022 को राजभवन में राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला है।
चौक-चौराहों तक पहुंचाने की कोशिश, गणित को जनजीवन से जोड़ने का प्रयास
गंगबोईर बालोद शहर के चौक-चौराहों को लेकर भी अध्ययन किए हैं। उनका प्रयास है कि सार्वजनिक स्थानों पर गणितीय नवाचारों को प्रदर्शित कर विद्यार्थियों और आम लोगों में गणित के प्रति रुचि बढ़ाई जाए।
शिक्षण के साथ वे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों तथा सामाजिक एवं संगठनात्मक गतिविधियों में भी सक्रिय रहते हैं। स्थानीय परिवेश, गतिविधियों और नवाचारों के माध्यम से गणित को सरल और रोचक बनाना उनके शिक्षकीय सफर की खास पहचान बन गई है।
