बीएसपी की लीज भूमि के नामांतरण और आरटीआई जवाब पर उठे सवाल

Darshan Balod
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आशा टॉकीज के पास की जमीन को लेकर 5 बिंदुओं पर मांगी गई जानकारी में अधिकांश सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं मिलने का आरोप

दल्ली राजहरा। आशा टॉकीज के पास स्थित बीएसपी की लीज भूमि के नामांतरण और उससे संबंधित संपत्ति कर वसूली को लेकर नगर पालिका परिषद दल्ली राजहरा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। व्यापारी संघ के मानद सदस्य प्रवीण जैन ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत नगर पालिका से इस संपत्ति से जुड़ी जानकारी मांगी थी। उनका आरोप है कि मांगी गई पांच प्रमुख जानकारियों में से अधिकांश पर स्पष्ट एवं प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध कराने के बजाय सीमित जानकारी देकर जवाब दिया गया।

प्रवीण जैन के अनुसार, वार्ड क्रमांक 21 स्थित आशा टॉकीज वाली संपत्ति के संबंध में उन्होंने 13 अगस्त को पांच बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। पहले बिंदु में वर्तमान में संपत्ति कर किसके नाम से लिया जा रहा है तथा उसकी प्रमाणित प्रति मांगी गई थी। इसके जवाब में संपत्ति कर रजिस्टर की फोटो कॉपी उपलब्ध कराई गई, जिसमें क्रमांक 433 पर “आशा टॉकीज अजय कुमार दिलीप कुमार” नाम दर्ज दिखाई देता है। जैन का कहना है कि इससे वर्तमान नाम दर्ज होने का आधार स्पष्ट नहीं होता।

दूसरे बिंदु में उन्होंने वर्ष 2012 के विक्रय पत्र के आधार पर नामांतरण किए जाने की स्थिति में संबंधित विक्रय पत्र और नामांतरण आवेदन की प्रमाणित प्रति मांगी थी। उनके अनुसार, इसके स्थान पर केवल रसीद बुक का एक पृष्ठ उपलब्ध कराया गया और विक्रय पत्र की प्रति नहीं दी गई।

तीसरे बिंदु में यह जानकारी मांगी गई थी कि यदि भूमि बीएसपी की लीज भूमि है तो नामांतरण से पूर्व बीएसपी से अनापत्ति प्रमाण पत्र अथवा अनुमति ली गई थी या नहीं। यदि अनुमति नहीं ली गई तो किस नियम के तहत नामांतरण किया गया, इसकी जानकारी भी मांगी गई थी। जैन का आरोप है कि इस बिंदु पर स्पष्ट जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया।

चौथे बिंदु में वर्ष 2002 में लीज समाप्त हो चुकी बीएसपी भूमि के नाम परिवर्तन से संबंधित नगर पालिका के अधिकार, नियम और दिशा-निर्देश की जानकारी मांगी गई थी। पांचवें बिंदु में नामांतरण की प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी का नाम और पदनाम पूछा गया था। जैन का कहना है कि इन बिंदुओं पर भी उन्हें अपेक्षित स्पष्ट जानकारी नहीं मिली।

15 साल का संपत्ति कर एक साथ जमा

इस मामले में संपत्ति कर की एक रसीद भी चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 23 मार्च 2026 को संबंधित संपत्ति के लिए 15 वर्षों का संपत्ति कर 30,831 रुपये तथा समेकित कर 650 रुपये, यानी कुल 31,431 रुपये जमा किए गए। जैन का सवाल है कि यदि इतने वर्षों तक संपत्ति कर नियमित रूप से जमा नहीं हुआ था तो एक साथ इतनी लंबी अवधि का कर वसूलने और संपत्ति को संबंधित नाम से दर्ज करने की प्रक्रिया किस आधार पर की गई।

प्रवीण जैन ने पूरे मामले में संबंधित दस्तावेजों, नामांतरण की प्रक्रिया और बीएसपी की अनुमति से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने तथा मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि आरटीआई के तहत मांगी गई मूल जानकारियों के स्थान पर सीमित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने से संदेह और बढ़ता है।

अब मामला इस बात पर केंद्रित है कि संबंधित भूमि के स्वामित्व एवं लीज की वास्तविक स्थिति क्या है, नगर पालिका के रिकॉर्ड में नामांतरण किस आधार पर हुआ, बीएसपी की अनुमति ली गई थी या नहीं तथा संपत्ति कर निर्धारण की प्रक्रिया किस नियम के तहत अपनाई गई। इन बिंदुओं पर नगर पालिका प्रशासन और बीएसपी प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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