शिक्षक समाज और राष्ट्र के भविष्य के निर्माता : वक्ता

Darshan Balod
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ब्रह्माकुमारीज संस्था ने शिक्षक दिवस पर किया शिक्षकों का सम्मान, अनेक विद्यालयों के प्राचार्य व शिक्षक हुए शामिल

बालोद। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय आत्मज्ञान भवन आमापारा बालोद के तत्वावधान में रविवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्य, प्रधान पाठक एवं शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल हुए। इस दौरान शिक्षकों को मोमेंटो एवं सम्मान पत्र भेंटकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य अरुण साहू, साहित्यकार जगदीश देशमुख, रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमैन एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष तोमन साहू, प्राचार्य आर.एल. ठाकुर, ब्रह्माकुमारीज संचालिका बी.के. विजयलक्ष्मी दीदी एवं बी.के. सरिता दीदी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम का संचालन बी.के. नेहा दीदी ने किया।

शिक्षक दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाते हैं : बी.के. विजयलक्ष्मी

बी.के. विजयलक्ष्मी दीदी ने कहा कि जिस तरह दीपक प्रकाश और अगरबत्ती सुगंध फैलाती है, उसी तरह शिक्षक भी अपने ज्ञान और संस्कारों से दूसरों के जीवन को दिशा देते हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता जीवन देते हैं, जबकि शिक्षक जीवन जीने की कला सिखाते हैं।

उन्होंने कहा कि आज शिक्षा का उद्देश्य केवल संगीत, भाषण या लेखन जैसी कलाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों को अच्छा सोचने, मधुर बोलने, दूसरों की विशेषताओं को देखने, श्रेष्ठ कर्म करने तथा सकारात्मक बातें सुनने की कला भी सिखाई जानी चाहिए।

उन्होंने शिक्षक की भूमिका को शिल्पकार, कुंभकार और इंजीनियर से जोड़ते हुए कहा कि शिक्षक बच्चों के व्यक्तित्व को इस तरह गढ़ सकते हैं कि वे समाज और राष्ट्र के हित में योगदान दे सकें। उन्होंने जीवन में विभिन्न धार्मिक परंपराओं से मिलने वाले सत्य, ज्ञान, शक्ति, समानता, दया, करुणा, प्रेम, सेवा, अहिंसा, क्षमा, पवित्रता, वीरता और आनंद जैसे मूल्यों को आत्मसात करने पर जोर दिया।

शिक्षा का लक्ष्य सर्वांगीण विकास : बी.के. सरिता

बी.के. सरिता दीदी ने कहा कि शिक्षक भविष्य के निर्माता होते हैं और बच्चों का भविष्य शिक्षक के मार्गदर्शन से आकार लेता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान और डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक विकास को शिक्षा का हिस्सा बताया। उनके अनुसार आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से श्रेष्ठ संस्कारों और जीवन मूल्यों का विकास होता है, जिससे विद्यार्थी समाज के लिए सकारात्मक योगदान देने वाले अच्छे इंसान बन सकते हैं।

ज्ञान को आचरण में उतारना जरूरी : जगदीश देशमुख

साहित्यकार जगदीश देशमुख ने कहा कि वर्तमान समय में नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों की आवश्यकता पहले से अधिक है। ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसे अपने आचरण में उतारा जाए। उन्होंने कहा कि मूल्यनिष्ठ शिक्षा के कारण भारत की विश्व में विशिष्ट पहचान रही है।

उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्था में दिए जाने वाले आध्यात्मिक ज्ञान को मूल्यनिष्ठ जीवन से जोड़ते हुए शिक्षकों से विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों के विकास पर जोर देने की बात कही।

शिक्षक स्वयं प्रकाशित होकर समाज को रोशन करे : अरुण साहू

प्राचार्य अरुण साहू ने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के लिए तैयार करना भी है। उन्होंने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के शिक्षक के रूप में याद किए जाने की इच्छा के संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक अपने ज्ञान और गुणों से समाज को प्रकाशित करता है।

उन्होंने शिक्षक की तुलना मोमबत्ती से करते हुए कहा कि जिस प्रकार मोमबत्ती स्वयं प्रकाशमान होकर दूसरों को रोशनी देती है, उसी प्रकार शिक्षक को भी स्वयं ज्ञान एवं चेतना से प्रकाशित होकर विद्यार्थियों के जीवन में प्रकाश फैलाना चाहिए।

शिक्षक देश और समाज को दिशा देते हैं : तोमन साहू

तोमन साहू ने कहा कि शिक्षक ही देश और समाज को सही दिशा देकर आगे बढ़ाने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस के अवसर पर परमशिक्षक परमात्मा के सानिध्य में ज्ञान प्राप्त करना सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान जीवन को नई दिशा देने में सहायक है।

आर.एल. ठाकुर ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि व्यक्ति के शारीरिक, बौद्धिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास का होना आवश्यक है। आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से जीवन की दिशा को बेहतर बनाया जा सकता है।

शिक्षकों को मोमेंटो व सम्मान पत्र भेंट

कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों से पहुंचे प्राचार्य, प्रधान पाठक एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं का संस्था की ओर से मोमेंटो एवं सम्मान पत्र भेंटकर सम्मान किया गया। इस दौरान संस्था के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज संस्था से जुड़े भाई-बहनों सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति रही।

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