कृष्ण जन्माष्टमी पर बच्चों ने प्रस्तुत की मनमोहक झांकी, आध्यात्मिक संदेश के साथ पवित्रता और सद्गुणों को जीवन में उतारने का दिया संदेश
बालोद। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के आत्मज्ञान भवन, आमापारा बालोद में प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर चैतन्य झांकी सजाई गई। कार्यक्रम में बच्चों द्वारा प्रस्तुत भगवान श्रीकृष्ण एवं राधा के बाल रूप की मनमोहक झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। झांकी देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
कार्यक्रम का शुभारंभ वार्ड क्रमांक-14 आमापारा की पार्षद बहन आशा पटेल, आर्ट ऑफ लिविंग से भ्राता रविप्रकाश पांडेय, बहन प्रीति बाला साहू, एलआईसी एजेंट भ्राता अजय साहू, ब्रह्माकुमारीज की संचालिका बी.के. विजयलक्ष्मी दीदी एवं बी.के. सरिता दीदी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मंच संचालन बी.के. नेहा दीदी ने किया।
बाल राधा-कृष्ण की झांकी ने मोहा मन
आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़े रविप्रकाश पाण्डेय ने कहा कि यहां आकर आनंद की अनुभूति हो रही है। छोटे-छोटे बच्चे राधा-कृष्ण के रूप में अपनी बाल लीलाएं प्रस्तुत कर रहे हैं, जो बेहद मनमोहक हैं।
ब्रह्माकुमारीज की संचालिका बी.के. विजयलक्ष्मी दीदी ने जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यहां प्रस्तुत सुंदर झांकी को देखकर ऐसा अनुभव होता है, मानो स्वर्ग का आनंद मिल रहा हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग में केवल श्रीकृष्ण जयंती मना लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि श्रीकृष्ण के महान कार्यों और उनके जीवन मूल्यों पर चिंतन कर उन्हें अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है।
मन के विकारों से मुक्ति का दिया संदेश
बी.के. विजयलक्ष्मी दीदी ने कहा कि वर्तमान समय में काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष और घृणा जैसे मनोविकार बढ़ रहे हैं, जिसके कारण लोग दुखी हो रहे हैं। ऐसे में यह चिंतन जरूरी है कि स्वर्णिम दुनिया का निर्माण कैसे हो।
उन्होंने कहा कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय में परमशिक्षक परमात्मा द्वारा श्रेष्ठ ज्ञान दिया जाता है। इस ज्ञान को सुनकर और जीवन में धारण कर व्यक्ति अपने अंदर के विकारों को दूर कर परमात्मा की शक्तियों एवं सकारात्मक गुणों को आत्मसात कर सकता है। इससे मन में सभी के प्रति शुभभावना और शुभकामना का भाव जागृत होता है।
पवित्रता, प्रेम और आनंद के प्रतीक हैं श्रीकृष्ण
बी.के. सरिता दीदी ने कहा कि श्रीकृष्ण केवल भक्ति के पात्र ही नहीं, बल्कि पवित्रता, प्रेम, आनंद और दिव्य गुणों के प्रतीक हैं। उनके जीवन से हमें अपने जीवन को श्रेष्ठ संस्कारों और सद्गुणों से सजाने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने संसार से दूर जाने का संदेश नहीं दिया, बल्कि संसार में रहते हुए श्रेष्ठ कर्मों के माध्यम से उदाहरण प्रस्तुत करने की प्रेरणा दी। उनका जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, हमें अपने श्रेष्ठ कर्म, दिव्य गुण और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखते हुए समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनना चाहिए।
पार्षद आशा पटेल ने साझा किया अनुभव
वार्ड क्रमांक-14 की पार्षद आशा पटेल ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह प्रतिदिन ब्रह्माकुमारी संस्थान आती हैं। यहां मिलने वाला ज्ञान उन्हें सुख और शांति की अनुभूति कराता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि वे अपने जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता चाहते हैं तो संस्था से जुड़कर आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ लें।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों द्वारा प्रस्तुत राधा-कृष्ण की चैतन्य झांकी और बाल लीलाओं ने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं नगरवासी उपस्थित रहे।



