गुरुर। शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गुरुर का ऐतिहासिक प्रांगण उस समय भावनाओं से भर उठा, जब वर्ष 1988 से 2000 तक के विभिन्न बैचों के सैकड़ों पूर्व छात्र-छात्राएं वर्षों बाद अपने पुराने विद्यालय में एक साथ पहुंचे। मौका था ‘स्कूल रियूनियन 2026’ का। लंबे अंतराल के बाद एक ही परिसर में जुटे पूर्व विद्यार्थियों ने बचपन की यादों को फिर से जिया और अपने गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
प्रातः 10 बजे विद्यालय की घंटी के साथ आयोजन की शुरुआत हुई। आयोजन प्रमुख जितेंद्र शर्मा ने सभी पूर्व विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया। पंजीयन के दौरान प्रतिभागियों को विशेष आईडी कार्ड दिए गए। मुख्य द्वार पर स्वागत समिति ने तिलक लगाकर और गुलाब का पुष्प भेंट कर आगंतुकों, गुरुजनों एवं सहपाठियों का स्वागत किया। इसके बाद पोहा-चना और गर्मागर्म जलेबी के साथ पुराने दिनों की यादें ताजा हुईं। विद्यालय के बाहर कभी पोहा-चना का ठेला लगाने वाले ‘महाराज’ की दुकान का स्वाद भी इस मिलन समारोह में चर्चा का विषय रहा।
गुरु वंदन में झलकी कृतज्ञता
सुबह 11 बजे ‘ज्ञान की पाठशाला’ नाम से मुख्य कार्यक्रम शुरू हुआ। स्कूल बैंड की धुन और तालियों के बीच गुरुजनों का मंच पर स्वागत किया गया। पूर्व विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। गुरुजनों को कोसा की पारंपरिक शॉल, श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीफल तथा पर्यावरण संरक्षण और निरंतर विकास के प्रतीक के रूप में पौधे भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन जितेंद्र शर्मा एवं सह-संचालक विक्रम राजपूत ने किया। जितेंद्र शर्मा ने कहा कि 1988 से 2000 तक के इतने बड़े कालखंड के साथियों को एक मंच पर लाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सभी के प्रेम और समर्पण ने इस आयोजन को संभव बनाया।
‘मस्ती की पाठशाला’ में लौट आया बचपन
दोपहर के भोजन सत्र में पूर्व विद्यार्थियों ने गुरुजनों और पुराने सहपाठियों के साथ भोजन किया। इस दौरान विद्यालय के पूर्व छात्र एवं सांस्कृतिक दल ‘लहर गंगा’ के प्रमुख पुराणिक साहू और उनकी टीम ने सरप्राइज सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
इसके बाद ‘मस्ती की पाठशाला’ में पहचान कौन, पुरानी कक्षा की शरारतें, शिक्षकों की नकल और बचपन के किस्सों से माहौल ठहाकों से गूंज उठा। वर्षों बाद मिले साथियों ने एक-दूसरे के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और पुरानी यादों को संजोया।
दिवंगत गुरुजनों और साथियों को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि
समारोह का सबसे भावुक क्षण श्रद्धांजलि सभा का रहा। दिवंगत शिक्षकों एवं पूर्व छात्र-छात्राओं को याद करते हुए दीप प्रज्ज्वलित कर मौन धारण किया गया। उन गुरुजनों और साथियों की स्मृतियां साझा की गईं, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए सभी ने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान कई पूर्व विद्यार्थियों की आंखें नम हो गईं।
पूर्व विद्यार्थियों को बताया विद्यालय की वास्तविक धरोहर
विद्यालय के वर्तमान प्राचार्य तपेश गौतम ने कहा कि यह आयोजन केवल पूर्व विद्यार्थियों का मिलन नहीं, बल्कि विद्यालय की परंपरा और संस्कारों का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने कहा कि 1988 से 2000 तक के विद्यार्थियों को एक साथ विद्यालय परिसर में देखना पूरे विद्यालय परिवार के लिए गौरव का विषय है। पूर्व विद्यार्थी विद्यालय की वास्तविक धरोहर हैं और उनका गुरुजनों के प्रति सम्मान वर्तमान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।
मातृ संस्था को भेंट किया अत्याधुनिक वाटर कूलर
अपनी मातृ संस्था के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए आयोजन समिति एवं सभी पूर्व छात्र-छात्राओं ने शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गुरुर को बड़ा एवं अत्याधुनिक वाटर कूलर भेंट किया। इसका उद्देश्य विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों को स्वच्छ एवं शीतल पेयजल उपलब्ध कराना है। पूर्व विद्यार्थियों की इस पहल को विद्यालय परिवार ने सराहनीय बताया।
अंतिम घंटी के साथ आंखों में आंसू और फिर मिलने का वादा
शाम 5:30 बजे विद्यालय की अंतिम घंटी बजी तो पूरे परिसर में विदाई का भावुक दृश्य देखने को मिला। वर्षों बाद मिले बचपन के साथी एक-दूसरे से गले मिले। जल्द दोबारा मिलने और आपसी संपर्क बनाए रखने के वादों के साथ सभी पूर्व विद्यार्थी भावुक मन से अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए।
गुरुजनों की मौजूदगी ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा
कार्यक्रम में वर्तमान प्राचार्य तपेश गौतम के साथ एन.पी. पांडे, पी. पांडे, देशमुख, डॉ. प्रदीप शर्मा, बी.आर. साहू, टी.के. साहू, मोहन चतुर्वेदी, एन.एस. साहू, पंचागम, के. पतंगीवार, पौसार्य, कोमिया, के.आर. यादव, राजपुरिया, एनु राम सोनवानी, मूर्ति, एफ.आर. कोशरिया, जी.पी. जोशी एवं ज्योति सहित अनेक गुरुजन उपस्थित रहे।
दिवंगत शिक्षक स्व. जी.पी. पांडेय, स्व. टी.आर. महमल्ला, स्व. जी.आर. कोमिया, स्व. एन.आर. चंद्राकर, स्व. दौलत मैडम, स्व. गोदावरी नायक, स्व. आर.डी. हिरवानी, स्व. आर्य सर, स्व. भुआर्य सर, स्व. जोशी सर, स्व. एच.एल. साहू, स्व. घनश्याम साहू एवं स्व. जाऊलकर बाबू तथा दिवंगत छात्र-छात्राओं स्व. अनिल जॉन, स्व. जय किरी, स्व. विक्रम सिंह राजपूत, स्व. महेंद्र मढरिया, स्व. संतोष चंद्राकर, स्व. ईश्वर चंद्राकर, स्व. कुलेश्वर यादव, स्व. विष्णुशंकर पांडेय, स्व. कन्हैया वाधवान, स्व. डी.आर. साहू (पीटीआई), स्व. नीता बघेल एवं स्व. मानवेंद्र खत्री को भी श्रद्धापूर्वक याद किया गया।
आयोजन को सफल बनाने में इनका रहा योगदान
‘स्कूल रियूनियन 2026’ के आयोजन में जितेंद्र शर्मा, विक्रम राजपूत, द्वारिका भारद्वाज, उमेश साहू, सुनील जॉन एवं डॉ. पुष्पलता चंद्राकर की प्रमुख भूमिका रही। वहीं सेवक साहू, हरीश टुवानी, प्रखर श्रीवास्तव, युगलकिशोर सेन, सादिक अली, कमल टावरी, जयंत किरी, गोपाल राठी, प्रदीप साहू, राकेश दीवान, डी.एल. साहू, पुरन अठनागर, उमाकांत कौशिक, पुराणिक साहू, चंद्रहास साहू, आशीष महल्ला, नागवंशी मैडम, डॉ. प्रेमिन साहू, कमलेश्वरी साहू सहित एनसीसी कैडेट्स का विशेष सहयोग रहा।





