उर्वरक वितरण में पारदर्शिता लाने और कालाबाजारी पर नियंत्रण की पहल; ऐप से टोकन या क्यूआर कोड बनाकर किसान ले सकेंगे खाद, डिजिटल सुविधा से वंचित किसानों के लिए सीएससी का विकल्प
बालोद, 12 अक्टूबर। खेती-किसानी के मौसम में खाद प्राप्त करने के लिए किसानों को अब नई डिजिटल व्यवस्था से गुजरना होगा। बालोद जिले में उर्वरक वितरण को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मोबाइल ऐप और टोकन आधारित प्रणाली लागू की जा रही है। इसके तहत किसान मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रक्रिया पूरी कर टोकन या क्यूआर कोड की मदद से संबंधित उर्वरक विक्रय केंद्र से खाद प्राप्त कर सकेंगे। वहीं, जिन किसानों को डिजिटल प्रक्रिया अपनाने में परेशानी होगी, उनके लिए कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से भी सुविधा उपलब्ध रहेगी।
कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार कृषि विभाग द्वारा गांवों में किसानों को इस नई व्यवस्था की जानकारी दी जा रही है। विभाग का उद्देश्य किसानों को खाद प्राप्त करने की प्रक्रिया से अवगत कराना और व्यवस्था लागू होने के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करना है।
मोबाइल ऐप से बनेगा टोकन, फिर मिलेगी खाद
नई व्यवस्था के तहत किसानों को गूगल प्ले स्टोर से Framework for Fertilizer Sale मोबाइल ऐप डाउनलोड करना होगा। ऐप में आवश्यक जानकारी दर्ज करने के बाद प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। इसके बाद प्राप्त टोकन या क्यूआर कोड के माध्यम से संबंधित उर्वरक विक्रय केंद्र से खाद ली जा सकेगी।
जिन किसानों के पास स्वयं का मोबाइल फोन नहीं है, वे परिवार के किसी अन्य सदस्य के मोबाइल में ऐप इंस्टॉल कर इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। इससे मोबाइल की अनुपलब्धता के कारण किसानों को परेशानी न हो, इस बात का भी ध्यान रखा गया है।
डिजिटल प्रक्रिया अपनाने में असमर्थ किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पहुंचकर टोकन या क्यूआर कोड बनवा सकेंगे। इस विकल्प से ऐसे किसानों को भी नई व्यवस्था के तहत खाद प्राप्त करने में मदद मिलेगी, जो मोबाइल ऐप का उपयोग करने में सहज नहीं हैं।
गरियाबंद और बीजापुर के बाद बालोद में पहल
कृषि विभाग के अनुसार, गरियाबंद और बीजापुर जिलों में इस प्रणाली को मॉडल के रूप में संचालित करने के बाद अब बालोद जिले में भी लागू किया जा रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण को व्यवस्थित करना, किसानों की मांग के अनुरूप खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करना और कालाबाजारी पर नियंत्रण रखना है।
खाद की मांग बढ़ने के दौरान वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में टोकन और क्यूआर कोड आधारित प्रणाली से वितरण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, किसानों को इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि ऐप, टोकन और विक्रय केंद्रों की व्यवस्था किस तरह सुचारु रूप से संचालित होती है।
पीओएस मशीन से स्टॉक की निगरानी, वितरण में पारदर्शिता
नई प्रणाली में उर्वरक विक्रय केंद्रों पर उपलब्ध खाद के स्टॉक का पीओएस मशीन के माध्यम से वास्तविक समय में मिलान किया जा सकेगा। इससे केंद्रों में खाद की उपलब्धता की जानकारी रखने, मांग का आकलन करने और भंडारण तथा वितरण की बेहतर योजना बनाने में सहायता मिलेगी।
स्टॉक की निगरानी और वितरण का रिकॉर्ड व्यवस्थित होने से खाद की उपलब्धता से जुड़ी जानकारी जुटाना आसान हो सकता है। साथ ही, उर्वरकों की कालाबाजारी और अनियमित वितरण पर नियंत्रण रखने में भी यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।
समिति प्रबंधकों और विक्रेताओं को दिया गया प्रशिक्षण
नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए चिप्स कार्यालय में वर्चुअल प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसमें मास्टर ट्रेनर्स ने समिति प्रबंधकों और उर्वरक विक्रेताओं को मोबाइल ऐप के माध्यम से खाद वितरण की प्रक्रिया समझाई। प्रशिक्षण का उद्देश्य संबंधित कर्मचारियों और विक्रेताओं को नई प्रणाली की कार्यप्रणाली से परिचित कराना है, ताकि किसानों को खाद लेने के दौरान अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
कृषि विभाग का मैदानी अमला भी किसानों को इस डिजिटल व्यवस्था की जानकारी दे रहा है। विभाग की ओर से किसानों को ऐप डाउनलोड करने, टोकन या क्यूआर कोड प्राप्त करने और संबंधित विक्रय केंद्र से खाद लेने की प्रक्रिया के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
किसानों के लिए जरूरी है नई प्रक्रिया की जानकारी
बालोद जिले में मोबाइल ऐप और टोकन आधारित उर्वरक वितरण व्यवस्था लागू होने से खाद के स्टॉक और वितरण की निगरानी अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है। किसानों के लिए जरूरी होगा कि वे खाद लेने जाने से पहले नई प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर लें। जिन किसानों को ऐप चलाने में परेशानी हो, वे परिवार के किसी सदस्य की सहायता ले सकते हैं या नजदीकी सीएससी से संपर्क कर सकते हैं।
कृषि विभाग की यह पहल उर्वरक वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने और किसानों तक खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि किसानों को समय पर जानकारी, टोकन बनाने की सुविधा और विक्रय केंद्रों पर उपलब्ध खाद का लाभ कितनी सहजता से मिल पाता है।

