पुणे में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में रखा नवाचारी भाषा शिक्षण का मॉडल, कन्वर्सेशन कॉर्नर, ओपन रीडिंग सर्कल और इंग्लिश क्लब से विद्यार्थियों का बढ़ेगा आत्मविश्वास
बालोद। अंग्रेजी भाषा को केवल पाठ्यपुस्तकों, व्याकरण और कक्षा शिक्षण तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन में उसके प्रयोग के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। इसी सोच को केंद्र में रखते हुए प्राचार्य अरुण कुमार साहू ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक सम्मेलन में अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने अंग्रेजी भाषा शिक्षण को अधिक व्यावहारिक, रोचक और संवादपरक बनाने के लिए विद्यालयों में नवाचारी गतिविधियां अपनाने पर जोर दिया।
पुणे की अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में साझा किए विचार
इंग्लिश लैंग्वेज टीचर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ELTAI) की वार्षिक कॉन्फ्रेंस के अंतर्गत 7 से 10 अक्टूबर तक एमआईटी आर्ट, डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी, पुणे में अंतरराष्ट्रीय अंग्रेजी भाषा सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें प्राचार्य अरुण कुमार साहू ने “English Beyond the Classroom: Creating Real-Life Situations for Language Learning” विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया।
सम्मेलन की थीम “English in the Age: Survive, Evolve, Thrive” रही। इस दौरान आमंत्रित वक्ताओं ने पैनल चर्चा के माध्यम से बदलते शैक्षिक परिवेश में अंग्रेजी भाषा शिक्षण की नवीन पद्धतियों, चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार साझा किए।
कक्षा के बाहर भी हो भाषा सीखने का अभ्यास
शोध पत्र प्रस्तुत करते हुए अरुण कुमार साहू ने कहा कि अंग्रेजी भाषा का प्रभावी अधिगम केवल पाठ्यपुस्तक, व्याकरण और कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे वास्तविक परिस्थितियों में अंग्रेजी बोलने, सुनने, पढ़ने और अपने विचार व्यक्त करने का अभ्यास कर सकें। अंग्रेजी को केवल एक विषय के रूप में पढ़ने के बजाय अभिव्यक्ति और संवाद के माध्यम के रूप में सीखने पर जोर दिया जाना चाहिए।
उन्होंने विद्यालयों में भाषा सीखने के लिए विशेष मॉडल विकसित करने का सुझाव दिया, जिसमें उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय परिवेश का उपयोग किया जा सके।
कन्वर्सेशन कॉर्नर से ओपन रीडिंग सर्कल तक, सीखने के कई तरीके
अरुण कुमार साहू ने विद्यार्थियों के भाषा कौशल को विकसित करने के लिए कई व्यावहारिक गतिविधियों की रूपरेखा प्रस्तुत की। विद्यालय में कन्वर्सेशन कॉर्नर बनाकर विद्यार्थियों को आपस में अंग्रेजी में बातचीत करने का अवसर दिया जा सकता है। वहीं, समाचार पत्रों, पुस्तकों, पत्रिकाओं और अन्य पठन सामग्री के माध्यम से ओपन रीडिंग सर्कल विकसित कर उनमें नियमित पढ़ने की आदत को बढ़ावा दिया जा सकता है।
उन्होंने मॉर्निंग असेंबली को भी भाषा अभ्यास का प्रभावी मंच बनाने की बात कही। इसके अंतर्गत समाचारों की सुर्खियां, नए शब्द, विचार और सामान्य ज्ञान से जुड़ी प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थी मंच पर बोलने का आत्मविश्वास विकसित कर सकते हैं। इसके साथ ही इंग्लिश क्लब के माध्यम से विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित कर उनकी भाषा संबंधी दक्षताओं को निखारा जा सकता है।
शिक्षक की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं
शोध पत्र का केंद्रीय विचार यह रहा कि अंग्रेजी सीखने के लिए विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़ाने के साथ-साथ भाषा का प्रयोग करने के पर्याप्त अवसर देना भी जरूरी है। शिक्षक की भूमिका केवल भाषा संबंधी ज्ञान देने तक सीमित न होकर ऐसे अवसर और परिस्थितियां तैयार करने वाले मार्गदर्शक की होनी चाहिए, जिनसे विद्यार्थी स्वाभाविक रूप से भाषा सीख सकें।
स्थानीय संसाधनों को सीखने की प्रयोगशाला के रूप में उपयोग करते हुए प्रोजेक्ट वर्क और गतिविधियां तैयार करने पर भी उन्होंने जोर दिया। इससे भाषा शिक्षण को विद्यार्थियों के दैनिक जीवन से जोड़ा जा सकता है।
प्रमाण पत्र देकर किया गया सम्मानित
सम्मेलन में शोध पत्र प्रस्तुत करने के बाद प्राचार्य अरुण कुमार साहू को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। उनकी सहभागिता और अंग्रेजी भाषा शिक्षण में नवाचार, अनुभव आधारित अधिगम तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता की चेयरपर्सन ने सराहना की। उनकी यह पहल विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय परिवेश का उपयोग कर अंग्रेजी भाषा शिक्षण को अधिक प्रभावी एवं व्यावहारिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।




