हिंदी दिवस पर जन-जन से हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग और प्रसार का किया आह्वान
राजनांदगांव। भारत की प्रमुख राजभाषा हिंदी के प्रति समर्पण और उसके महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। हिंदी निरंतर वैश्विक स्तर पर अपना विस्तार कर रही है और आज विश्व की प्रमुख बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल है। हिंदी दिवस के अवसर पर नगर के शिक्षाविद् एवं विचारक डॉ. कृष्ण कुमार द्विवेदी ने हिंदी को विश्व की सर्वाधिक गौरवमान भाषा बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि सरल देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली हिंदी सहज और सरल रूप से बोली-समझी जाने वाली भाषा है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी व्यापक रूप से संचार का माध्यम है। हिंदी ने भारतीय संस्कृति, प्राचीन ज्ञान, साहित्य और विविध परंपराओं को जनसामान्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि हिंदी आज केवल साहित्य और सामान्य संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार, विज्ञापन, संचार माध्यम और बाजार की भाषा के रूप में भी तेजी से स्थापित हुई है। हिंदी का समृद्ध शब्दकोश, व्यवस्थित व्याकरण तथा गद्य-पद्य, खंडकाव्य और महाकाव्य सहित विशाल साहित्यिक भंडार इसकी समृद्धता को दर्शाता है। विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में हिंदी का अध्ययन-अध्यापन भी किया जा रहा है।
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि बदलते समय के साथ हिंदी ने कला, विज्ञान, तकनीकी शिक्षा, कंप्यूटर शिक्षा और चिकित्सा शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी अपनी उपयोगिता सिद्ध की है। शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में हिंदी के बढ़ते प्रयोग ने इसे व्यापक जनसमुदाय के लिए और अधिक उपयोगी बनाया है।
उन्होंने कहा कि किसी भाषा का विस्तार केवल संस्थागत प्रयासों से नहीं, बल्कि उसके दैनिक व्यवहार में अधिकाधिक प्रयोग से होता है। यदि हम अपने सामान्य संभाषण, लेखन और विचार-विमर्श में हिंदी को प्राथमिकता दें, तो इसके प्रसार को और गति मिल सकती है।
डॉ. द्विवेदी ने जनसामान्य, विशेषकर प्रबुद्ध वर्ग से आह्वान किया कि वे अपने नाम, हस्ताक्षर, पत्र-प्रपत्र, आमंत्रण, लेख और आलेख आदि में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि हिंदी को सम्मान देना और उसके प्रयोग को बढ़ाना प्रत्येक हिंदीप्रेमी का दायित्व है। सामूहिक प्रयासों से हिंदी को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिष्ठित बनाया जा सकता है। उन्होंने हिंदी दिवस पर “जय हिंद, जय हिंदी” के उद्घोष के साथ हिंदी के सम्मान और संवर्धन का संकल्प लेने की अपील की।

