शिक्षक संगठनों से एकजुट होकर साझा मंच बनाने की अपील, शासन से सकारात्मक संवाद के जरिए न्यायसंगत समाधान पर जोर
बालोद। शिक्षकों के सेवा स्थायित्व, भविष्य और सम्मानजनक सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए शिक्षक संवर्ग द्वारा किए जा रहे प्रयासों को छत्तीसगढ़ व्याख्याता वाणिज्य विकास संघ ने अपना पूर्ण नैतिक समर्थन दिया है। संघ ने टीईटी अनिवार्यता से उत्पन्न स्थिति तथा पूर्व सेवा की गणना जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शासन के साथ सकारात्मक एवं सार्थक संवाद की आवश्यकता बताई है।
संघ के संयोजक एवं प्रदेश अध्यक्ष विष्णु प्रसाद साहू, प्रदेश संचालक खोमन लाल साहू, प्रदेश उपाध्यक्ष ममता वाडदे एवं गीता नायर तथा प्रदेश सचिव विवेक धुर्वे ने संयुक्त बयान में शिक्षक हित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी।
टीईटी अनिवार्यता का विषय संवेदनशील
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि सेवारत शिक्षकों, विशेष रूप से सहायक शिक्षक साथियों के लिए टीईटी की अनिवार्यता से उत्पन्न स्थिति अत्यंत संवेदनशील और विचारणीय है। यह सीधे तौर पर शिक्षकों के भविष्य एवं सेवा सुरक्षा से जुड़ा विषय है। ऐसे मामलों में शासन और शिक्षक प्रतिनिधियों के बीच सकारात्मक एवं सार्थक संवाद के माध्यम से समाधान की दिशा तलाशना जरूरी है।
पूर्व सेवा गणना से वरिष्ठता और पेंशन पर असर
संघ ने कहा कि प्रथम नियुक्ति तिथि से पूर्व की सेवा की गणना नहीं होने से शिक्षकों की वरिष्ठता, क्रमोन्नति तथा सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले पेंशन लाभ प्रभावित हो रहे हैं।
पदाधिकारियों ने कहा कि वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में सेवा देने के बाद भी पूर्व सेवा अवधि का लाभ नहीं मिलना शिक्षकों के लिए चिंता का विषय है। इस मुद्दे पर न्यायसंगत समाधान के लिए प्रभावी पहल जरूरी है।
अलग-अलग प्रयासों के बजाय साझा मंच की जरूरत
संघ ने कहा कि वर्तमान में शिक्षक हित से जुड़े विषयों को लेकर विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग प्रयास किए जा रहे हैं। इससे शिक्षक समुदाय में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
ऐसे समय में सभी शिक्षक संगठनों को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर समन्वय स्थापित करते हुए साझा मंच पर आना चाहिए, ताकि शासन के समक्ष शिक्षक हित के मुद्दों को एकजुट, स्पष्ट और प्रभावशाली तरीके से रखा जा सके।
सकारात्मक संवाद से समाधान पर जोर
छत्तीसगढ़ व्याख्याता वाणिज्य विकास संघ का कहना है कि टीईटी से स्थायी राहत एवं पूर्व सेवा गणना जैसे महत्वपूर्ण विषयों का समाधान सकारात्मक, सौहार्दपूर्ण और प्रभावी वार्ता के माध्यम से निकाला जाना चाहिए।
संघ ने कहा कि शिक्षक समुदाय के व्यापक हित, गरिमा और कल्याण को ध्यान में रखते हुए इन मुद्दों के समाधान के लिए प्रयासरत सभी शिक्षक संगठनों के साथ वह पूरी आत्मीयता से खड़ा है।


