डौंडी। वनग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की प्रक्रिया, वन अधिकार कानून एवं सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों को लेकर राजा राव पठार में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें बालोद जिले के डौंडी एवं गुरुर ब्लॉक के साथ धमतरी, कांकेर और गरियाबंद जिले के विभिन्न वनग्रामों से ग्रामीण एवं सामाजिक प्रतिनिधि शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत राजा राव बाबा, बड़ादेव एवं शहीद वीर नारायण सिंह की पूजा-अर्चना के साथ हुई। प्रशिक्षण में पहुंचे मास्टर ट्रेनर अश्वनी कांगे, सेनापति KBKS भारत, सहायक ट्रेनर संदीप सलाम एवं सामाजिक प्रमुखों का पारंपरिक रूप से पीले चावल से स्वागत किया गया।
वनग्रामों के इतिहास से शुरू हुआ प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में मास्टर ट्रेनर अश्वनी कांगे ने वनग्रामों के इतिहास और उनके अस्तित्व में आने की परिस्थितियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वनग्रामों की वर्तमान स्थिति को समझने के लिए उनके ऐतिहासिक एवं प्रशासनिक स्वरूप को समझना जरूरी है। उन्होंने भारतीय वन अधिनियम, 1927 और औपनिवेशिक दौर में विकसित वन प्रशासन व्यवस्था का उल्लेख करते हुए वनग्रामों से जुड़े अभिलेखों की उपयोगिता समझाई।
कांगे ने बताया कि छत्तीसगढ़ में 434 वनग्रामों को अधिसूचना के माध्यम से राजस्व ग्राम में परिवर्तित किया जा चुका है, जबकि अन्य वनग्रामों को राजस्व ग्राम में बदलने की प्रक्रिया जारी है।
वन अधिकार कानून और CFR की दी जानकारी
प्रशिक्षण में वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत मिलने वाले अधिकारों की जानकारी दी गई। ग्रामीणों को व्यक्तिगत वन अधिकार, सामुदायिक वन अधिकार एवं सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFR) की दावा प्रक्रिया, आवश्यक अभिलेख और ग्राम स्तर पर होने वाली कार्रवाई के संबंध में जानकारी दी गई।
कुछ ग्रामों को प्राप्त सामुदायिक वन संसाधन अधिकार प्रमाण-पत्रों और ग्राम समितियों के अनुभवों को भी प्रतिभागियों के साथ साझा किया गया।
राजस्व ग्राम बनाने की प्रक्रिया समझाई
दूसरे सत्र में सहायक ट्रेनर संदीप सलाम ने वनग्राम को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समझाया। उन्होंने आवश्यक दस्तावेज, संबंधित प्रारूप, प्रक्रिया में ग्रामवासियों एवं ग्राम समितियों की भूमिका तथा आगे की कार्रवाई के संबंध में व्यावहारिक जानकारी दी। ग्रामीणों के सवालों का जवाब भी दिया गया।
हर वनग्राम में बैठक कर प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर जोर
अंतिम सत्र में अश्वनी कांगे ने कहा कि प्रशिक्षण के बाद प्रत्येक वनग्राम में बैठक आयोजित कर आवश्यक दस्तावेज एवं पुराने अभिलेख जुटाने की दिशा में काम किया जाना चाहिए। उन्होंने ग्रामीणों से वनग्राम से संबंधित पुराने दस्तावेज, ग्रामसभा के रिकॉर्ड एवं अन्य आवश्यक कागजात व्यवस्थित रखने की अपील की।
पांच जिलों से पहुंचे ग्रामीण
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा जिला बालोद की अध्यक्ष प्रेमलता कुंजाम, उपाध्यक्ष भोलाराम नेताम, सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग डौंडी अध्यक्ष तुलेश्वर हिचामी, जिला प्रवक्ता निलिमा श्याम, सर्व आदिवासी समाज जिला बालोद के सचिव सूरज गावड़े सहित लक्ष्मी उइके, बंशी कुंजाम, भूमि कुंजाम, रामचरण पड़ोटी, मनीषा कोर्राम एवं वर्षा ठाकुर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य वनग्रामों के इतिहास, वन अधिकार कानून, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार तथा वनग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों को जागरूक एवं सक्षम बनाना रहा।
गोरेलाल सोनी की रिपोर्ट


