छत्तीसगढ़ से TET मुक्ति का प्रस्ताव केंद्र को भेजने की मांग, विभागीय परीक्षा के विकल्प पर भी मोर्चा ने दिए सुझाव
बालोद। छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने सेवाकालीन शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की बाध्यता से स्थायी रूप से मुक्त करने की मांग दोहराई है। मोर्चा ने कहा कि तमिलनाडु की तर्ज पर छत्तीसगढ़ सरकार विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजे, ताकि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को TET की बाध्यता से राहत मिल सके।
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के जिला संयोजक दिलीप साहू ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सेवाकालीन शिक्षकों के लिए TET अर्हता प्राप्त करने की समय-सीमा 31 अगस्त 2028 तक किए जाने के बाद प्रदेश में TET को लेकर शिक्षकों की चिंता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि इसी विषय को लेकर मोर्चा लगातार सरकार के समक्ष अपनी मांगें और सुझाव रख रहा है।
मोर्चा के प्रदेश संयोजक संजय शर्मा ने कहा कि वर्तमान में कार्यरत शिक्षक नई नियुक्ति के लिए TET नहीं दे रहे हैं, बल्कि पहले से सेवा में हैं। विभाग द्वारा शिक्षकों को प्रशिक्षण, व्यवहारिक ज्ञान और अन्य माध्यमों से लगातार दक्ष बनाया जाता है। ऐसे में सेवाकालीन शिक्षकों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकाला जाना चाहिए।
17 अगस्त 2012 से पहले नियुक्त शिक्षकों को पूरी छूट देने की मांग
मोर्चा के प्रदेश संयोजक संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे एवं केदार जैन ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 17 अगस्त 2012 तक TET की अनिवार्यता नहीं थी। ऐसे में इससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों के संबंध में सरकार को विशेष रूप से विचार करते हुए उन्हें TET की बाध्यता से स्थायी छूट दिलाने की दिशा में पहल करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की तर्ज पर राज्य विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाए। मोर्चा को उम्मीद है कि छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से भेजे गए ऐसे प्रस्ताव पर केंद्र स्तर पर सकारात्मक विचार होगा।
विभागीय TET का भी दिया सुझाव
मोर्चा ने कहा कि यदि वर्तमान न्यायिक एवं वैधानिक परिस्थितियों में TET उत्तीर्ण करना आवश्यक है, तो सेवाकालीन शिक्षकों के लिए पृथक विभागीय सीमित शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए। इस संबंध में मोर्चा की ओर से शिक्षा विभाग को सुझाव भी दिए जा चुके हैं।
मोर्चा ने बताया कि शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के साथ हुई चर्चा में TET से स्थायी मुक्ति सहित पांच सूत्रीय मांगों पर सकारात्मक बातचीत हुई। इनमें पूर्व सेवा की गणना कर हितलाभ, केंद्रीय वेतनमान के अनुरूप वेतन विसंगति दूर करना, D.Ed. धारक शिक्षकों के लिए B.Ed. हेतु ब्रिज कोर्स की व्यवस्था तथा भर्ती-पदोन्नति नियम 2026 में निरस्तीकरण अथवा संशोधन की मांग भी शामिल है।
विभागीय परीक्षा के लिए 10 सुझाव
शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने विभागीय TET के लिए कई सुझाव सरकार के समक्ष रखे हैं। इनमें—
- सेवाकालीन शिक्षकों के लिए पृथक विभागीय सीमित TET आयोजित की जाए।
- TET का वार्षिक कैलेंडर जारी किया जाए।
- वर्ष में कम से कम तीन बार परीक्षा आयोजित की जाए।
- परीक्षा प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध हो।
- पाठ्यक्रम व्यवहारिक एवं सेवाकालीन शिक्षकों के अनुभव के अनुरूप हो।
- न्यूनतम उत्तीर्णांक 33 प्रतिशत रखा जाए।
- TET को पदोन्नति एवं सेवा सुरक्षा से जोड़ा जाए।
- परीक्षा विभागीय स्तर पर संचालित की जाए।
- प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक दोनों स्तरों के लिए परीक्षा आयोजित हो।
- विकासखंड स्तर पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया जाए।
OMR आधारित परीक्षा का प्रस्ताव
मोर्चा ने परीक्षा आयोजन की प्रक्रिया को लेकर भी प्रस्ताव दिया है। इसके तहत पेपर-I एवं पेपर-II आयोजित करने, कक्षा I-V तथा VI-VIII के पाठ्यक्रम एवं सामान्य शैक्षणिक समझ पर आधारित प्रश्न रखने, दोनों परीक्षाओं के बीच कम से कम 15 दिन का अंतर रखने तथा परीक्षा ऑफलाइन OMR आधारित कराने का सुझाव दिया गया है।
प्रस्ताव के अनुसार परीक्षा में 100 बहुविकल्पीय प्रश्न, प्रत्येक एक अंक का तथा परीक्षा की अवधि तीन घंटे रखने की बात कही गई है। सेवाकालीन शिक्षकों को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम उत्तीर्णांक 33/100 रखने और तैयारी के लिए शिक्षकों को शीघ्र मॉड्यूल उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।
जिला संयोजक दिलीप साहू, बीरबल देशमुख, रामकिशोर खरांशु, कामता प्रसाद साहू, शिव शांडिल्य, वीरेंद्र देवांगन, पवन जोशी, नीलेश देशमुख, कांतु राम चंदेल, नरेंद्र साहू, पवन कुंभकार सहित मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा मंत्री के साथ हुई चर्चा से उन्हें सेवा सुरक्षा को लेकर भरोसा है, लेकिन सरकार को स्थायी समाधान की दिशा में भी पहल करनी चाहिए।

