त्योहारों की हलचल में कैसे रखें बोर्ड परीक्षा की तैयारी ऑन-ट्रैक?
अक्टूबर का महीना दस्तक दे चुका है। एक ओर त्योहारों की जगमगाहट और उल्लास है, तो दूसरी ओर बोर्ड परीक्षाओं की उल्टी गिनती भी शुरू हो चुकी है। ऐसे समय में अधिकांश विद्यार्थियों के मन में एक स्वाभाविक सवाल रहता है—“त्योहार मनाएं या पढ़ाई करें?”
वास्तविकता यह है कि बोर्ड परीक्षा कोई ऐसी पाबंदी या सजा नहीं है, जिसके लिए आपको त्योहारों की खुशियों से पूरी तरह दूर होना पड़े। जरूरत है केवल एक सही और व्यावहारिक ‘रोडमैप’ की, जिससे पढ़ाई की निरंतरता भी बनी रहे और आप बिना अनावश्यक तनाव के परिवार के साथ त्योहारों का आनंद भी ले सकें।
1. सुबह का ‘गोल्डन ब्लॉक’ — 6:00 से 9:00 बजे तक
त्योहारों के दौरान शाम के समय मेहमानों की आवाजाही, बाजार की खरीदारी और पारिवारिक व्यस्तताएं बढ़ जाती हैं। इसलिए सुबह के समय का बेहतर उपयोग करें।
अपने दिन का सबसे कठिन और अधिक एकाग्रता मांगने वाला विषय—जैसे गणित, भौतिकी या लेखाशास्त्र—सुबह के शुरुआती तीन घंटों में पढ़ने का प्रयास करें।
जब दिन का सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण काम सुबह ही पूरा हो जाता है, तो बाकी समय और शाम को आप अपेक्षाकृत निश्चिंत होकर परिवार के साथ त्योहार मना सकते हैं।
2. ‘जीरो-डे’ कभी न बनने दें
यदि किसी दिन घर में अधिक काम है या उत्सव के कारण 6–7 घंटे पढ़ना संभव नहीं हो पा रहा है, तब भी अपनी पढ़ाई को पूरी तरह शून्य पर न आने दें।
सिर्फ 30 से 40 मिनट निकालकर फॉर्मूला शीट, फ्लोचार्ट, आरेख या 15–20 वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का अभ्यास किया जा सकता है।
याद रखें, नियमित अध्ययन की कड़ी टूटने के बाद दोबारा शुरुआत करना अक्सर सबसे कठिन लगता है। इसलिए समय कम हो तो पढ़ाई कम करें, लेकिन उसे पूरी तरह छोड़ें नहीं।
3. त्योहार के ‘हैंगओवर’ से तुरंत बाहर आएं
अक्सर मुख्य पर्व भले ही एक दिन का हो, लेकिन उसकी सुस्ती, खान-पान में बदलाव और अव्यवस्थित दिनचर्या अगले 3–4 दिनों तक बनी रहती है। यही समय पढ़ाई की लय को सबसे ज्यादा प्रभावित कर सकता है।
इसलिए त्योहार समाप्त होते ही अगली सुबह के अध्ययन के लिए पहले से ही अपना पसंदीदा और अपेक्षाकृत आसान अध्याय तय करके रखें।
आसान टॉपिक से शुरुआत करने पर मस्तिष्क बिना अधिक दबाव के दोबारा पढ़ाई की सामान्य लय और एकाग्रता हासिल कर सकता है।
आज का रोडमैप मंत्र
“परीक्षा केवल यह नहीं परखती कि आपने कितना याद किया है, बल्कि यह भी सिखाती है कि आप जीवन के उत्सव और अपनी प्राथमिकताओं के बीच बेहतर संतुलन कैसे बनाते हैं।”
त्योहार मनाइए, परिवार के साथ समय बिताइए और खुशियां बांटिए, लेकिन अपनी मंजिल को नजरअंदाज मत कीजिए। सही समय-प्रबंधन के साथ पढ़ाई और त्योहार—दोनों का आनंद लिया जा सकता है।
विद्यार्थियों के मार्गदर्शन हेतु यह प्रेरणादायक लेख-श्रृंखला प्रति सप्ताह निरंतर प्रकाशित की जा रही है।
विवेक धुर्वे
व्याख्याता
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सांकरा/ज
जिला–बालोद, छत्तीसगढ़

