टैक्टाइल बुक से आसान होगी दृष्टिबाधित बच्चों की पढ़ाई

Darshan Balod
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विशेष विद्यालय शक्ति में दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू, स्पर्शनीय सामग्री के निर्माण और कक्षा में उपयोग की दी जा रही जानकारी



सक्ति।
किसी चित्र को देख पाना संभव न हो, तो क्या उसे स्पर्श से समझा जा सकता है? दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए टैक्टाइल बुक इसी सवाल का व्यावहारिक जवाब है। चित्र, आकृति, मानचित्र और जटिल अवधारणाओं को उभरे हुए स्पर्शनीय रूप में प्रस्तुत कर विद्यार्थियों को उन्हें महसूस करके समझने में मदद मिलती है। इसी दिशा में दृष्टिबाधित विशेष विद्यालय शक्ति में दो दिवसीय टैक्टाइल बुक (स्पर्शनीय पुस्तक) प्रशिक्षण शुरू हुआ है।

प्रशिक्षण में शिक्षकों एवं प्रशिक्षणार्थियों को टैक्टाइल बुक तैयार करने, उसके उपयोग तथा कक्षा शिक्षण में स्पर्शनीय सामग्री को प्रभावी तरीके से शामिल करने की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण का उद्देश्य दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई को अधिक सहज, अनुभव आधारित और प्रभावी बनाना है।

प्रशिक्षण के शुभारंभ अवसर पर समाज कल्याण विभाग के संचालक श्री मेवाराम झारिया एवं प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री मांगे राम अग्रवाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम में रेसलाइन फाउंडेशन से जुड़ी सुश्री नंदिनी, दृष्टिबाधित विशेष विद्यालय शक्ति के संचालक श्री जसवंत आदिले तथा दृष्टिबाधित विकास संघ के महासचिव श्री राजन भैरवी सहित विद्यालय के शिक्षक एवं प्रशिक्षणार्थी मौजूद रहे।

किताब में उभरते हैं चित्र और आकृतियां

प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए ब्रेल पाठ्य सामग्री के साथ ऐसी सामग्री भी जरूरी है, जिसके जरिए वे चित्र, आकृतियां, मानचित्र और ग्राफ जैसी चीजों को स्पर्श के माध्यम से समझ सकें। टैक्टाइल बुक में इन्हीं तत्वों को स्पर्शनीय रूप देकर विद्यार्थियों को अवधारणाओं को अनुभव के जरिए समझने का अवसर मिलता है।

रेसलाइन फाउंडेशन की अहम भूमिका

प्रशिक्षण में रेसलाइन फाउंडेशन की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई। संस्था द्वारा दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए टैक्टाइल बुक और अन्य स्पर्शनीय शिक्षण सामग्री तैयार की जाती है। इन सामग्रियों के माध्यम से विद्यार्थी विभिन्न चित्रों, आकृतियों और शैक्षणिक अवधारणाओं को स्पर्श के जरिए समझ सकते हैं।

इन टैक्टाइल पुस्तकों और शिक्षण सामग्रियों के लिए CSR (कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) के माध्यम से सहयोग एवं प्रायोजन उपलब्ध कराया जाता है। वहीं Vision Aid के माध्यम से प्राप्त सहयोग से ऐसी सामग्री दृष्टिबाधित विद्यार्थियों और विद्यालयों तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।

स्पर्श के जरिए सीखने की नई तकनीक

प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर एवं संसाधन व्यक्ति अरविंद शर्मा ने टैक्टाइल बुक की उपयोगिता और उसके व्यावहारिक प्रयोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों की आवश्यकता के अनुरूप स्पर्शनीय सामग्री के इस्तेमाल तथा विभिन्न विषयों की अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाने की तकनीकें बताईं।

उन्होंने बताया कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए किसी अवधारणा को केवल सुनने के बजाय स्पर्श के माध्यम से अनुभव करने का अवसर मिलने पर सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज हो सकती है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण टैक्टाइल शिक्षण सामग्री का विकास और उसका नियमित उपयोग महत्वपूर्ण है।

समावेशी शिक्षा की दिशा में पहल

दो दिवसीय प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को टैक्टाइल बुक और अन्य स्पर्शनीय सामग्री के प्रभावी इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसमें स्पर्शनीय चित्र एवं आकृतियों के उपयोग, शिक्षण सामग्री के चयन और कक्षा में उसके व्यावहारिक प्रयोग से जुड़े पहलुओं पर जानकारी दी जा रही है।

आयोजकों के अनुसार, इस तरह के प्रशिक्षण से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए शिक्षा को अधिक सुगम, समावेशी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने में मदद मिलेगी। टैक्टाइल बुक उनके लिए केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि बिना देखे चीजों को समझने और महसूस करने का एक नया माध्यम बन सकती है।

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