खेल, गीत-नृत्य और नवाचार से पढ़ाई को बनाया रोचक; शिक्षा और कला के क्षेत्र में योगदान के लिए दिल्ली से मिली मानद उपाधि
गुरुर/बालोद। शिक्षक दिवस पर ऐसी शिक्षिका की कहानी प्रेरणा देती है, जिनके लिए स्कूल केवल पढ़ाने की जगह नहीं, बल्कि बच्चों के साथ आत्मीय रिश्ता बनाने और उनके व्यक्तित्व को निखारने का मंच है। गुरुर विकासखंड के बासीन संकुल अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला डांडेसरा की शिक्षिका विमला (बिंदिया) रानी गंगबेर अपने मधुर व्यवहार, नवाचारी शिक्षण और बच्चों के प्रति आत्मीयता के कारण विशेष पहचान रखती हैं।
बच्चे उन्हें केवल शिक्षिका नहीं, बल्कि ‘मां’ जैसा स्नेह देने वाली अपनी बिंदिया मैडम के रूप में देखते हैं।
कभी जमीन पर बैठकर पढ़ाती हैं, कभी गीत-नृत्य से जोड़ती हैं पाठ
बच्चों की भाषा और भावनाओं को समझकर पढ़ाने में विश्वास रखने वाली विमला रानी कई बार बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर गतिविधियों में शामिल होती हैं। उनका मानना है कि प्राथमिक शिक्षा में बच्चे जितना सहज महसूस करेंगे, सीखने की प्रक्रिया उतनी ही प्रभावी होगी।
खेल, गीत, नृत्य और स्थानीय गतिविधियों को शिक्षण से जोड़कर वे पढ़ाई को सहज और रोचक बनाने का प्रयास करती हैं। ‘पिंकी-पिंकी, व्हाट कलर’ जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को रंगों, पेड़-पौधों, सब्जियों और आसपास की वस्तुओं की पहचान कराई जाती है।
खेल-खेल में पढ़ाई, साथ में संस्कार और पर्यावरण की सीख
उनकी शिक्षण शैली केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है। नैतिक शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और व्यवहारिक ज्ञान को भी विभिन्न गतिविधियों का हिस्सा बनाया जाता है। इससे बच्चे पढ़ाई के साथ अपने आसपास की दुनिया को समझने और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक होने का प्रयास करते हैं।
पुराने विद्यार्थी भी नहीं भूले अपनी शिक्षिका
वर्ष 2008-10 बैच के विद्यार्थियों ने उनके प्रति सम्मान और स्नेह व्यक्त करते हुए उन्हें ‘स्पोर्ट्स टीचर सम्मान’ प्रदान किया है। विद्यार्थियों को भविष्य की दिशा दिखाने और मार्गदर्शन देने के लिए उन्हें ‘फ्यूचर गाइडर टीचर सम्मान’ भी मिला है।
यह उनके और विद्यार्थियों के बीच वर्षों से बने आत्मीय संबंध की एक विशेष मिसाल है।
कोरोना में भी नहीं थमी पढ़ाई की राह
कोरोना काल में जब नियमित शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई, तब उन्होंने डांडेसरा के सामुदायिक भवन में ऑफलाइन कक्षाएं संचालित करने के साथ मास्क वितरण और जागरूकता गतिविधियों में सहभागिता की।
इसके अलावा 100 दिन पठन कार्यक्रम, ब्लॉक पीएलसी, ‘अंगना म शिक्षा’ के ब्लॉक स्तरीय कार्य तथा स्काउट-गाइड के बुलबुल दल के संचालन में भी उन्होंने भूमिका निभाई।
योग से कर्मा नृत्य तक, हर मंच पर सक्रिय
विमला बिंदिया रानी केवल शिक्षण तक सीमित नहीं रहीं। योग एवं व्यायाम में ब्लॉक और जिला स्तर पर प्रथम स्थान हासिल करने के साथ उन्हें लगातार दो वर्षों तक बेस्ट एक्टिविटी टीचर का सम्मान मिला।
युवा महोत्सव में संभाग स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली सामूहिक कर्मा नृत्य टीम से भी वे जुड़ी रही हैं।
दिल्ली से मिली मानद उपाधि, कई सम्मानों से नवाजी गईं
शिक्षा, कला, गतिविधियों और सामाजिक क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें दिल्ली मैजिक एंड आर्ट कॉलेज से पीपीएचटी डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है।
इसके अलावा उन्हें राष्ट्रीय नारी शक्ति सम्मान, भारतीय दलित साहित्य अकादमी पुरस्कार, कलेक्टर द्वारा उत्कृष्ट कार्य सम्मान तथा NTCF की ओर से बेस्ट डांस टीचर और बेस्ट मंच संचालन सम्मान सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
जहां शिक्षिका का स्नेह, वहां बच्चों के लिए स्कूल भी अपना घर
विमला (बिंदिया) रानी गंगबेर की कार्यशैली यह संदेश देती है कि जब शिक्षा में आत्मीयता, रचनात्मकता और गतिविधियों का समावेश होता है, तो विद्यालय बच्चों के लिए केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं रह जाता।
वहां स्कूल सीखने की जगह बनता है, शिक्षक मार्गदर्शक बनता है और बच्चों के लिए शिक्षिका का स्नेह ‘मां’ के अपनत्व जैसा महसूस होने लगता है।
