कार बनी कक्षा, नवाचार बना पहचान—‘कार वाले गुरुजी’ विवेक धुर्वे की प्रेरक यात्रा

Darshan Balod
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कोरोना काल में चलती-फिरती कक्षा से शुरू हुई अलग पहचान, अब शिक्षा, स्काउटिंग, पर्यावरण, करियर गाइडेंस और शिक्षक प्रशिक्षण में निभा रहे बहुआयामी भूमिका

बालोद। शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तक का ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को बदलते समय के अनुरूप आगे बढ़ने की राह दिखाने वाला मार्गदर्शक भी होता है। इसी सोच को अपनी शिक्षकीय कार्यशैली का आधार बनाकर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सांकरा/ज के व्याख्याता विवेक धुर्वे शिक्षा के साथ नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, स्काउटिंग, करियर मार्गदर्शन और शिक्षक प्रशिक्षण के क्षेत्र में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

उनके प्रयासों ने उन्हें विद्यार्थियों और शिक्षा जगत के बीच अलग पहचान दिलाई है।

जब स्कूल बंद हुए तो कार को बना दिया चलता-फिरता क्लासरूम

कोरोना काल में जब विद्यालय बंद थे और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी, तब विवेक धुर्वे ने परिस्थितियों को चुनौती मानते हुए अपनी कार को ही चलती-फिरती कक्षा का रूप दे दिया। वे विद्यार्थियों तक पहुंचकर उन्हें पढ़ाने का प्रयास करते रहे।

उनके इस अनूठे नवाचार के कारण वे ‘कार वाले गुरुजी’ के नाम से चर्चित हुए। शिक्षा विभाग ने भी उनके इस प्रयास को सराहा और उनके कार्य पर राज्य स्तर पर शॉर्ट टेलीफिल्म तैयार की गई।

किताबों से आगे बढ़कर अनुभवों से सीखने पर जोर

वर्तमान में भी विवेक धुर्वे पारंपरिक शिक्षण के साथ गतिविधि आधारित और प्रयोगात्मक शिक्षण को प्राथमिकता देते हैं। उनका प्रयास रहता है कि विद्यार्थी केवल किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि अपने आसपास के वातावरण और समाज से भी सीखें।

पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से वे विद्यार्थियों में जिम्मेदारी और नेतृत्व की भावना विकसित करते हैं।

करियर की उलझन सुलझाने में भी कर रहे मार्गदर्शन

करियर गाइडेंस के क्षेत्र में वे विद्यार्थियों को उनकी रुचि, क्षमता और भविष्य की संभावनाओं के अनुरूप मार्गदर्शन देते हैं, ताकि विद्यार्थी सही समय पर अपने करियर को लेकर बेहतर निर्णय ले सकें।

स्काउटिंग से सिखा रहे अनुशासन, सेवा और नेतृत्व

भारत स्काउट्स एवं गाइड्स से जुड़े विवेक धुर्वे रोवर लीडर के रूप में विद्यार्थियों को अनुशासन, नेतृत्व, सेवा भावना और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ते हैं। विभिन्न शिविरों तथा सेवा और पर्यावरण से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से वे विद्यार्थियों में टीम भावना और समाज के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का प्रयास करते हैं।

शिक्षक प्रशिक्षण और अकादमिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका

विवेक धुर्वे का योगदान केवल विद्यालय तक सीमित नहीं है। वे माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर, SCERT रायपुर, समग्र शिक्षा रायपुर और DIET दुर्ग से जुड़े विभिन्न अकादमिक कार्यों में सहभागिता कर चुके हैं।

ब्लूप्रिंट आधारित प्रश्न बैंक, मॉडल प्रश्नपत्र निर्माण तथा पाठ्य सामग्री संपादन जैसे कार्यों में भी उनकी भूमिका रही है। SCERT, समग्र शिक्षा, ICT, उजियारा युवा करियर मार्गदर्शन एवं परामर्श कार्यक्रम तथा UNICEF से जुड़े आयोजनों में वे राज्य एवं जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर के रूप में शिक्षकों को प्रशिक्षण दे चुके हैं।

‘शिक्षा श्री’ से ‘आचार्य शिरोमणि’ तक मिली पहचान

शिक्षा के क्षेत्र में उनके कार्यों को विभिन्न स्तरों पर सम्मान मिला है। उन्हें मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण के तहत राज्य स्तरीय ‘शिक्षा श्री’ सम्मान, ‘पढ़ई तुंहर द्वार’ अभियान में जिला स्तरीय सम्मान, 15 अगस्त पर उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान तथा राज्य स्तरीय ब्लॉग राइटर के रूप में पहचान मिली है।

नोवेल टीचर्स क्रिएटिव फाउंडेशन द्वारा शिक्षक सृजन गौरव अलंकरण से भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।

हाल ही में राजधानी रायपुर के सिविल लाइंस स्थित वृंदावन हॉल में शकुंतला फाउंडेशन छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित ‘आचार्य शिरोमणि सम्मान समारोह-2026’ में शिक्षा एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए विवेक धुर्वे को सम्मानित किया गया।

नवाचार से शुरू हुआ सफर, अब बहुआयामी बनी शिक्षकीय पहचान

नवाचार से शुरू हुई उनकी शिक्षकीय यात्रा आज शिक्षा के साथ पर्यावरण, स्काउटिंग, करियर मार्गदर्शन, अकादमिक कार्य और शिक्षक प्रशिक्षण तक विस्तृत हो चुकी है।

विद्यार्थियों को केवल पढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें सीखने, सोचने, नेतृत्व करने और समाज के लिए उपयोगी नागरिक बनने की दिशा देना ही ‘कार वाले गुरुजी’ विवेक धुर्वे की शिक्षकीय पहचान बन गई है।

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