बालवाटिका और किसलय के लिए 11 बच्चों ने कराई रिकॉर्डिंग, महज डेढ़ घंटे में छत्तीसगढ़ी और हिंदी के 18 कार्यक्रम तैयार
बालोद/गुरुर। बच्चों की मासूमियत, उनकी कल्पनाशीलता और बड़े सपनों की उड़ान को मंच मिल जाए तो नन्हे कदम भी ऊंची उड़ान भर सकते हैं। शासकीय प्राथमिक विद्यालय चिटौद के 11 नन्हे बाल कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है। विद्यालय की प्रेरणा, पलक, झरना, रेणु, धीरज, त्रिषिका, जानवीर, रिया, झनेंद्र, गौरव एवं कनिका अब आकाशवाणी रायपुर के बाल कार्यक्रमों में अपनी आवाज के माध्यम से पहचान बनाएंगे।
इन बच्चों ने प्रसार भारती के अंतर्गत आकाशवाणी रायपुर के लोकप्रिय बाल कार्यक्रम ‘बालवाटिका’ और ‘किसलय’ के लिए रिकॉर्डिंग कराई। इनमें ‘बालवाटिका’ का प्रसारण छत्तीसगढ़ी भाषा में तथा ‘किसलय’ का प्रसारण हिंदी में किया जाता है। आकाशवाणी के कार्यक्रम प्रस्तुतकर्ता बीरभान साहू ने बताया कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों का मनोरंजन करने के साथ उनके ज्ञानवर्धन, मानसिक विकास, मौखिक अभिव्यक्ति, रचनात्मकता, जागरूकता और सावधानी जैसे गुणों को विकसित करना है।
डेढ़ घंटे में 18 कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग
विद्यालय के इन नन्हे कलाकारों ने महज डेढ़ घंटे में छत्तीसगढ़ी एवं हिंदी भाषा में देशभक्ति, पर्यावरण संरक्षण, लोक संस्कृति, शिक्षा, नशामुक्ति और परिश्रम जैसे विषयों पर 18 कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग की। इन कार्यक्रमों का प्रसारण आकाशवाणी रायपुर से 24 सितंबर को ‘बालवाटिका’ तथा 27 सितंबर को ‘किसलय’ कार्यक्रम के अंतर्गत किया जाएगा।
कक्षा पांचवीं की छात्रा प्रेरणा तारम के संचालन में 6 से 10 वर्ष आयु के बच्चों ने छत्तीसगढ़ी कार्यक्रम ‘बालवाटिका’ में ‘बलिदानी मन के सुरता’, ‘धरती दाई के जतन’, ‘जंगल के राम कहानी’, ‘पचरा गीत’, ‘सोन के फर’ नाटक, ‘श्रम के आरती’, ‘जीवन के दोहा’, ‘चिटौद गांव के कहानी’ और ‘साक्षरता पंथी गीत’ जैसे विषयों की प्रस्तुति दी।
वहीं हिंदी कार्यक्रम ‘किसलय’ में ‘मैं अमर शहीदों का चारण’, ‘हार नहीं होती’, ‘नशा न करना मान लो कहना’, ‘भोला भाला था सीधा साधा था’, ‘छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर’ पर वार्ता, बाल संसद में विशेषज्ञों से राष्ट्रीय प्रतीकों पर चर्चा, ‘महानदी की आत्मकथा’ तथा सौर ऊर्जा और कंप्यूटर जैसे विषयों को बच्चों ने अपनी अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत किया। संगतकार के रूप में हारमोनियम पर ईश्वरी कुमार तथा ढोलक पर कक्षा छठवीं के झनेंद्र साहू ने साथ दिया।
‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की झलक
इस रिकॉर्डिंग में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना भी दिखाई दी। बच्चों ने असमिया माटी गीत की प्रस्तुति दी। वहीं छह वर्षीय गौरव सेन ने अल्प तैयारी और कम उम्र के बावजूद निर्भीकता के साथ हिंदी में मौखिक गीत प्रस्तुत किया, जिसे कार्यक्रम से जुड़े लोगों ने सराहा।
पाठ्यक्रम से व्यवहारिक जीवन तक
कार्यक्रम के निर्माण एवं निर्देशन में सहभागी राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त सहायक शिक्षक ईश्वरी कुमार सिन्हा ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मंशा के अनुरूप विद्यालयीन पाठ्यक्रम को व्यवहारिक जीवन से जोड़ने का प्रयास किया गया है। कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों की मौखिक अभिव्यक्ति, आत्मनिर्भर जीवन निर्माण, देशभक्ति, पर्यावरण संरक्षण, लोक संस्कृति, नशामुक्ति, शिक्षा और परिश्रम के महत्व को रेखांकित किया गया है।
उन्होंने कहा कि कई वर्षों से देखे गए ऊंचे सपनों को हकीकत में बदलते हुए बच्चों को अपनी प्रतिभा के माध्यम से स्वयं, परिवार, समाज और स्वदेश के मजबूत निर्माण से जोड़ना उनके लिए बचपन को फिर से जीने जैसा अनुभव है।
इस सृजनात्मक सफर में सहयोगी साथी कौशल सिन्हा एवं पूर्व विद्यार्थी इंद्राणी तारम भी सहभागी रहे। कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग रायपुर के राजभवन मार्ग स्थित काली मंदिर चौक के आकाशवाणी केंद्र में की गई।
बच्चों की इस उपलब्धि पर शासकीय प्राथमिक विद्यालय चिटौद परिवार, शिक्षा समुदाय के साथियों, बाल संरक्षण अधिकारी, ग्राम पंचायत के सरपंच एवं पंचगण, ग्राम विकास समिति, स्वास्थ्य विभाग, पालकों और ग्रामवासियों ने शुभकामनाएं एवं बधाई दी।




