“गाय हमारी संस्कृति और जीवन का अभिन्न अंग, गौ-संरक्षण के लिए सर्व समाज आगे आए” — श्री अक्षयमुनिजी मसा

Darshan Balod
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बालोद। समता भवन में आयोजित धर्मसभा में शासन दीपक श्री अक्षयमुनिजी मसा ने गौ-संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि गाय हमारी संस्कृति और जीवन का अभिन्न अंग है। गाय के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से गौशालाओं, गायों तथा पेड़-पौधों की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया।

संतश्री ने कहा कि संसार की बढ़ती उलझनों का समाधान हिंसा में नहीं, बल्कि धर्म, ध्यान और आत्मबोध में है। धर्म केवल विचारों का विषय नहीं, बल्कि ध्यान और आत्मबोध का मार्ग है। व्यक्ति को केवल जानकारी जुटाने के बजाय स्वयं को जानने और इंसानियत के साथ जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मनुष्य की पहचान ठंडे दिमाग, गर्म खून, कोमल हृदय और प्रखर पुरुषार्थ से होती है। वाणी में मधुरता और हृदय में कोमलता रखते हुए जीवन को आनंदपूर्वक जीना चाहिए। जीवन केवल लंबा होने के बजाय गहरा, सार्थक और उद्देश्यपूर्ण होना चाहिए।

तपस्या में बढ़ रहा उत्साह

श्री अक्षयमुनिजी मसा की प्रेरणा से चातुर्मास के दौरान श्रद्धालुओं में तपस्या के प्रति उत्साह लगातार बढ़ रहा है। अब तक काजल नाहर, शर्मिला बाफना, प्रिया श्रीश्रीमाल, स्नेहल लोढ़ा एवं नमिता नाहटा के 5 मासक्षमण पूर्ण हो चुके हैं।

इसी क्रम में नमिता तरुण नाहटा ने 30, ईशा नेहा तातेड़ ने 29, कुसुम सौरभ नाहटा ने 17 तथा अमित भंसाली डौंडीलोहारा ने 8 उपवास की तपस्या का संकल्प ग्रहण किया। धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने तपस्वियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके प्रति मंगलकामनाएं व्यक्त कीं।

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