पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के तहत विद्यार्थियों ने पेड़ों को बांधी राखी, संरक्षण का लिया संकल्प
गुंडरदेही/बालोद। ज्ञान गंगा पब्लिक स्कूल, कुरदी में पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, जिला बालोद के तत्वावधान में ‘पहले वृक्षाबंधन, फिर रक्षाबंधन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भारत के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यालय के भैया-बहनों ने अपने हाथों से वृक्षों के लिए रक्षा सूत्र (राखी) तैयार किए और पेड़ों को राखी बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 9:30 बजे भारत माता के चलचित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नारायण साहू, प्रधानपाठक रहे। विशेष अतिथि के रूप में श्रीमती रुखमणी एवं विनोद कुमार साहू उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पर्यावरण गतिविधि जिला सह-संयोजक संजय साहू ने की, जबकि प्रशिक्षक एवं पर्यावरण गतिविधि जिला संयोजक कमलकृष्णाकांत साहू ने कार्यशाला में पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी दी।
मुख्य अतिथि नारायण साहू ने रक्षाबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह भाई-बहन के पवित्र प्रेम, स्नेह और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेता है, उसी प्रकार वृक्षों को राखी बांधकर प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेना भी हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथाओं का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं की जानकारी दी।
विशेष अतिथि श्रीमती रुखमणी ने कहा कि वृक्ष हमारे जीवन के सच्चे रक्षक हैं। वे हमें ऑक्सीजन, छाया, फल और स्वच्छ पर्यावरण प्रदान करते हैं। जिस प्रकार भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है, उसी प्रकार हमें पेड़ों को बचाने और अधिक से अधिक नए पौधे लगाने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेड़ बचेंगे, तभी पृथ्वी पर जीवन और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहेगा। वृक्षों को राखी बांधना प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने तथा पर्यावरण संरक्षण को संस्कार से जोड़ने का सुंदर माध्यम है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संजय साहू ने कहा कि रक्षाबंधन के साथ-साथ वृक्षों को भी रक्षा सूत्र बांधना आवश्यक है। पर्यावरण संरक्षण के लिए सीडबॉल निर्माण एवं बीजरोपण, वृक्षारोपण, जलस्रोतों का संरक्षण, वर्षाजल संग्रहण, जल का संयमित उपयोग तथा प्लास्टिक और प्रदूषणकारी पदार्थों का न्यूनतम प्रयोग जैसे प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण तभी व्यापक रूप ले सकता है, जब परिवार, विद्यालय और समाज मिलकर इसे जनआंदोलन बनाएं।
उन्होंने सीडबॉल निर्माण की जानकारी देते हुए कहा कि परिवार के प्रत्येक सदस्य की इसमें भागीदारी हो सकती है। परिवार मिलकर स्मृति वृक्ष या पारिवारिक वाटिका तैयार करे तो पर्यावरण के प्रति भावनात्मक जुड़ाव भी बढ़ता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने परिवार के सदस्यों को भी पर्यावरण संरक्षण की गतिविधियों से जोड़ने का आह्वान किया।
कार्यशाला में बताया गया कि वृक्षारोपण मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण कर पर्यावरण को शुद्ध करने, मिट्टी के कटाव को रोकने, जलचक्र को बनाए रखने तथा जलवायु और तापमान को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हरित वातावरण मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।
कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षक कमलकृष्णाकांत साहू ने विद्यार्थियों को ‘नेशनल स्टूडेंट पर्यावरण प्रतियोगिता-2026 (NSPC)’ के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण आधारित प्रतियोगिता है, जिसे भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा शिक्षा मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया।
कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकों सविता जलालकर, मोहन विश्वकर्मा, वैष्णवी साहू, ज्योति साहू, ललिता साहू, मानिया जलांबकर, किरण साहू, हेमलता विश्वकर्मा एवं सावित्री ठाकुर का सहयोग रहा। पर्यावरण गतिविधि के कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों, विद्यालय के भैया-बहनों एवं स्थानीय नागरिकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। सभी ने अधिक से अधिक पौधे लगाने और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल एवं सुरक्षा करने का संकल्प लिया।
