सेवा पखवाड़ा के तहत ग्रामीणों, राम-जानकी सेवा समिति और भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया श्रमदान
कुसुमकसा/अरमुरकसा। सेवा पखवाड़ा के तहत जनपद क्षेत्र अरमुरकसा में निर्माणाधीन श्री राम-जानकी मंदिर की छत ढलाई के दौरान सामूहिक श्रमदान का आयोजन हुआ। राम-जानकी सेवा समिति, सनातनी समाज, ग्रामवासियों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर निर्माण कार्य में श्रमदान किया। इस दौरान जिला संघ चालक राजेंद्र राठी और दल्ली नगर संघ चालक महेन्द्र भाई पटेल ने भी श्रमदान किया।
कार्यक्रम में पूर्व जनपद सदस्य एवं भाजपा नेता संजय बैस ने भी निर्माण कार्य में श्रमदान किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का मंदिर केवल ईंट-पत्थरों से बनने वाला भवन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उनके अनुसार जब समाज के लोग बिना किसी भेदभाव के एक उद्देश्य के लिए साथ आते हैं तो सामूहिक सेवा की भावना मजबूत होती है।
संजय बैस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में चल रहे सेवा पखवाड़ा के माध्यम से समाज सेवा और जनभागीदारी को प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने युवाओं से ऐसे सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
ग्रामीणों ने उत्साह से संभाली जिम्मेदारी
राम-जानकी सेवा समिति के सदस्यों और ग्रामीणों ने पूरे उत्साह के साथ मंदिर की छत ढलाई का कार्य पूरा कराया। आयोजन के दौरान श्रमदान करने वालों में सेवा और सहयोग की भावना दिखाई दी। ग्रामीणों ने इसे गांव की सामूहिक आस्था और सहभागिता से जुड़ा अवसर बताया।
इस अवसर पर संतोष जैन, कमलकांत साहू, पोषण भूआर्य, गौरीशंकर साहू, तेजराम राम साहू, राजू सिन्हा, कमलेश्वर सिन्हा, मनीष जेठवानी, टिकेंद्र साहू, राकेश देवांगन, मिथिलेश, प्रवीण जैन, शेखर रेड्डी, पंकज जेठवानी, गौतम साहू, पुष्पजीत बैस, संदीप साहू, पोषण धनकर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे और श्रमदान में सहभागिता निभाई।
सहयोगियों के प्रति जताया आभार
कार्यक्रम के समापन पर संजय बैस ने राम-जानकी सेवा समिति, सनातनी समाज, भाजपा कार्यकर्ताओं, ग्रामवासियों तथा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के श्रम, समर्पण और सहयोग से मंदिर निर्माण का कार्य लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक सहभागिता से श्री राम-जानकी मंदिर जल्द ही भव्य स्वरूप में क्षेत्र की आस्था का केंद्र बनेगा।
संजय बैस ने कहा, “सेवा ही संस्कार है, सेवा ही संकल्प है; सामूहिक श्रमदान ही समाज की सबसे बड़ी शक्ति है।”


